डीएसपी का दर्द : जब नफरत की खेती होगी तो हम सभी 'सुबोध' हो जाएंगे...

डीएसपी का दर्द : जब नफरत की खेती होगी तो हम सभी सुबोध हो जाएंगे...

बुलंदशहर में हिंसा के दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या पर यूपी पुलिस के डीएसपी अभिषेक प्रकाश का दर्द छलककर सामने आ गया। भदोही में तैनात डीएसपी ने फेसबुक पर अपनी व्यथा सुनाई है। उन्होंने स्वीकारा है कि पुलिस का इकबाल कम हुआ है। पुलिस पर संसाधन कम हैं और राजनीतिक दबाव ज्यादा है। उनके इस कमेंट को डीजीपी मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है। डीजीपी आफिस में तैनात आईजी प्रशासन हरिराम शर्मा ने कहा कि आईटी सेल इसकी सत्यता की जांच करेगी। और आपत्तिजनक होने पर जवाब तलब किया जाएगा।

फेसबुक पर अभिषेक प्रकाश ने लिखा-संविधान की आत्मा ऐसे ही नहीं मरेगी। उसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उसके लिए जरूरी है कि एक ऐसी ही भीड़, ऐसा ही उन्माद और ऐसे ही सोच, जो धीरे-धीरे संविधान की हत्या स्वयं कर देगी। उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर सुबोध सिंह कोई एक्टीविस्ट, राजनेता, कलाकार, पत्रकार या उद्यमी नहीं थे जिनके लिए कोई हाय तौबा मचे। वह इंसान एक पुलिसकर्मी था और मैं जानता हूं कि सभी बड़े-महान लोगों की नजर में पुलिसवाला चोर, बेईमान, नेताओं के तलवे चाटने वाला ही होता है। खैर पुलिस की नियति ही यही है। डीएसपी ने कहा कि पुलिसकर्मी अपनी कमजोरी के साथ दूसरे विभाग की नाकामियों के बोझ को भी अपने कंधे पर ढोती है। पुलिस सभी के आशाओं को कंधा देती है और इसीलिए अपने कंधे तुड़वा बैठती है।रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

अभिषेक प्रकाश ने कहा कि पुलिस को जहां डील करनी होती है उस कार्य की प्रकृति कुछ ज्यादा ही गंभीर होती है, जिसकी परिणति सुबोध सिंह के रूप में भी होती है। सभी को मंदिर-मस्जिद निर्माण से ज्यादा पुलिस सुधार की बातें करनी होगी। डीएसपी अभिषेक प्रकाश ने अपनी तैनाती के दौरान का एक संस्मरण ताजा करते हुए फेसबुक पर लिखा, इस तरह की एक घटना मेरे क्षेत्र में भी घटित हुई थी जब एक गाय को काटकर फेंक दिया गया था। उस समय भीड़ की मानसिकता का अंदाजा हमें है। नफरत की खेती जब लगातार होगी तो बीज वृक्ष बनेगा ही। तब कोई एक सुबोध सिंह नहीं रहेगा, हम सभी 'सुबोध' हो जाएंगे। हो सकता है कि कोई गोली हमारा भी इंतजार कर रही हो।

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