'उत्पादकता में उपयोग के लिए आरबीआई सरकार को सौंप दे अपनी अतिरिक्त राशि'

उत्पादकता में उपयोग के लिए आरबीआई सरकार को सौंप दे अपनी अतिरिक्त राशि



नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया (आरबीआई) से कहा है कि वह अपनी अतिरिक्त राशि बेहतर उपयोग के लिए सरकार को सौंप दे।

यह जानकारी केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को दी है। हालांकि अभी विषय को लंबित रखा गया है और आगामी 19 नवम्बर को होने वाली बैठक में इस मुद्दे को सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से उठाया जाना तय माना जा रहा है। हालांकि उक्त अधिकारियों ने इस बाबत यह भी बताया कि अतिरिक्त राशि के अनुपात को वैश्विक मानक के अनुरूप रखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि उक्त मांग से आरबीआई व सरकार के बीच तनाव का बढ़ना तय है क्योंकि आरबीआई पहले से ही नियामक बैंक की स्वायत्तता की वकालत कर रहा है। इससे पूर्व वित्त मंत्रालय ने कहा था कि वह नियामक बैंक की स्वायत्तता का आदर करता है लेकिन वह स्वायत्तता के नाम पर बाजार व देश हित को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

इस बीच उक्त अधिकारी ने कहा है कि विश्व के अधिकांश केंद्रीय बैंक अपने पास अपनी परिसंपत्ति का सिर्फ 13-14 फीसदी ही अपने सुरक्षित रखता है। इस बीच वित्तीय मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि मीडिया में भ्रामक खबरें चलाई जा रही हैं। आरबीआई से 3.6 या एक लाख रुपये सरकार ने नहीं मांगा है। सरकार ने आरबीआई से सिर्फ यही प्रस्ताव दिया है कि वह पूंजी के वाजिव स्तर को स्थापित करे।

इससे पहले सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मनियण ने कहा था कि केंद्रीय बैंक अपने पास जरूरत से ज्यादा पैसा रख रहा है जबकि इसका उपयोग देश की उत्पादकता में किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल आरबीआई ने सरकार को 10,000 करोड़ रुपये ज्यादा दिए थे लेकिन गवर्नर उर्जित पटेल ने इसका विरोध किया था। पटेल ने कहा था कि आकश्मिक स्थिति से निबटने के लिए आरबीआई को ज्यादा राशि की जरूरत है।

बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की ओर से पिछले 26 अक्टूबर को एक कार्यक्रम के दौरान कहा गया था कि नियामक के पास आकस्मिक स्थिति से निबटने के लिए ज्यादा राशि की जरूरत है। हालांकि इसके बाद सरकार व नियामक के बीच विवाद की परिस्थिति बन गई थी। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें


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