बेगूसराय लोस सीट को लेकर एनडीए में बढ़ी रार, जदयू ने ठोंकी ताल

बेगूसराय लोस सीट को लेकर एनडीए में बढ़ी रार, जदयू ने ठोंकी ताल

, जिलाध्यक्ष का दावा- पार्टी के लिए परंपरागत रही है यह सीट; फिलहाल यहां से भाजपा के भोला सिंह हैं सांसद

बेगूसराय। बेगूसराय लोकसभा सीट जदयू की परंपरागत थी और रहेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट से जदयू के बेगूसराय जिला निवासी प्रत्याशी ही चुनाव लड़ेंगे, बाहरी लोग नहीं। यह बातें जदयू जिलाध्यक्ष सह पूर्व विधान पार्षद भूमिपाल राय ने 'हिन्दुस्थान समाचार' से कही। बता दें कि रविवार को हिन्दुस्थान समाचार ने ''बेगूसराय में तेज हो गया है हलचल, कौन बनेगा सांसद'' मुद्दा को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद सोमवार की सुबह भूमिपाल राय ने उक्त बातें कही हैं। भूमिपाल राय ने कहा कि जदयू जिला सम्मेलन तथा अति पिछड़ा प्रकोष्ठ सम्मेलन में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। बागडोव में हुए अति पिछड़ा सम्मेलन में ध्वनिमत से बेगूसराय लोकसभा से जदयू के स्थानीय कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाने की मांग की गई थी।

इस पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव सह सांसद आरसीपी सिंह भी भरोसा दे चुके हैं। राय ने कहा कि अभी भले ही भाजपा के डॉ भोला सिंह बेगूसराय से सांसद हैं लेकिन इस पर अधिकार जदयू का बनता है। 2004 में बलिया एवं बेगूसराय को एकीकृत कर बेगूसराय लोकसभा का गठन किया गया तो उस समय जदयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सांसद बने थे। उसके बाद 2009 में हुए चुनाव में भी जदयू के मोनाजिर हसन सांसद बने, तो भाजपा का दावा कहां बनता है। पूर्व विधान पार्षद राय ने बताया कि 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से जनता दल के ललित विजय सिंह जीते थे, जबकि 1999 के चुनाव में जनता दल के रामजीवन सिंह बलिया से जीते थे। 2014 को छोड़ दें तो कभी भी बेगूसराय से भाजपा के सांसद नहीं बने। विधानसभा चुनाव में एनडीए के साथ जदयू चुनाव लड़ा तो सात में से छह सीट एनडीए जीता, जबकि महागठबंधन में शामिल होकर लड़ा तो सभी सातों सीटें महागठबंधन के पास रही। भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार, संगठन हर मायने में हम यहां हर दल से बेहतर हैं। मुस्लिम, पिछड़ा, अति पिछड़ा का आधार वोट हमसे ज्यादा किसी के पास नहीं है।

जब सब जगह लीड ले रहे हैं तो बेगूसराय सीट हर हाल में जदयू का था और रहेगा। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की चर्चा करते हुए भूमिपाल राय ने कहा कि जेएनयू प्रकरण के बाद चर्चित हुए कन्हैया के प्रति उस समय भले ही माहौल बना हो, लेकिन अब कांग्रेस का जमूरा कन्हैया सुपर फ्लॉप हो चुका है। बेगूसराय में दो दर्जन से अधिक जगह कन्हैया ने जनसंवाद किया, लेकिन कहीं भी वाम के सभी कार्यकर्ता नहीं पहुंचे। वामपंथियों को बताना चाहिए कि क्या उनके लिए भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं है, जिस लालू यादव के भ्रष्टाचार मुद्दे को लेकर वामपंथी गठबंधन से अलग हुए थे, तो फिर उसी के साथ कैसे जा रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बेगूसराय लोस सीट से हर हाल में बेगूसराय का ही बेटा जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ेगा और जीतेगा भी।

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