राजनीति के क्षितिज पर ध्रुव तारा थे अटल: प्रमोद तिवारी

राजनीति के क्षितिज पर ध्रुव तारा थे अटल: प्रमोद तिवारी



इलाहाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राजनीति के क्षितिज का ध्रुव तारा बताते हुये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनका निधन देश में संसदीय ज्ञान के पुंज का अंत है।

तिवारी ने शनिवार को कहा कि राजनीति के क्षितिज पर जो रिक्तता उभरी है, अब लम्बे समय तक कहीं दूर-दूर वह प्रकाश पुंज नजर नहीं आ रहा है। उसकी भरपाई नहीं हो सकती। उनके निधन से राजनीति के एक युग का अंत हो गया। विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री वाजपेयी में विश्वास और वाकपटुता की ऐसी तरंग थी जो विपक्षियों को भी प्रेम से धराशायी कर देती थी।

उन्होंने कहा कि देश के संसदीय इतिहास में कुछ गिने चुने ही लोग रहे जिनकी भाषा का मुख्य आकर्षण उनका चुटीला अंदाज था जिसमें वह बड़ी से बड़ी बात भी कह जाते थे। उनके बोलने के अंदाज को पार्टी और उसके बाहर बहुत से लोगों ने प्रेरणा के रूप में अपनाने का प्रयास किया। श्री वाजपेयी का जाना देश में संसदीय ज्ञान के पुंज का अंत है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी दूरदर्शिता अतुलनीय थी। वह राजनीति के भीष्म पितामह भी कहे जाते थे। उनकी एक खासियत थी जो चीज वह राजनीति में नहीं कह पाते थे, उसे कविता के मार्फत कह जाते थे। उनके भाषण का कोई मुकाबला नहीं था। वह सच्चे लोकतांत्रिक थे और आम सहमति में विश्वास रखते थे। वह हमारे दिलों में सदा 'अमर' रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अटल एक ऐसे नेता थे जिन्हें हर दल के लोग आदर प्रदान करते थे। उन्होंने राजनीति को दलगत राजनीति से ऊपर उठाया। उन्होंने अपने दर्शन पर अड़िग रहना सिखाया और जब भी राजनीति भटकी उसको सही मार्ग दिखाया।

तिवारी ने कहा," अटल जी का जो सबसे बड़ा गुण उनकी संसदीय क्षमता और स्वीकार्यता थी। उनकी स्वीकार्यता आैर विश्वसनीयता केवल देश में ही नहीं थी बल्कि विश्वस्तर पर थी, खासकर पड़ोसी देशों में।

वरिष्ठ नेता ने बताया कि उनके लिए देशहित सर्वोपरि था, उसके लिए वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करते थे।

श्री लालकृष्ण आडवानी के साथ उनकी निकटता भी थी तो वैचारिक मतभेद भी थे। श्री आड़वणी में कट्टरवाद ताे उनमें उदारवाद था। श्री आड़वणी ने जब रथ यात्रा निकाली तो उन्होंने महसूस किया कि यह पार्टी हित में तो है लेकिन देश हित में नहीं है, इसलिए उन्होंने इससे दूरी बनायी थी।

उन्होंने कहा, "पार्लियामेन्ट्रियन और पब्लिक वक्ता में बड़ा फर्क होता है। बहुत से लोग पब्लिक स्पीकर बहुत अच्छे होते हैं लेकिन पार्लियामेन्ट्रियन नहीं परन्तु अटल जी में दोनो ही गुण विद्यमान थे।"

तिवारी ने बताया कि वह भावुक थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन पर नेता विरोधी दल के रूप में संसद में श्रद्धांजलि देने के बाद जिस अंदाज में उन्होंने उनका महिमा मंडन किया था उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। वह अपने आप में एक दस्तावेज है। उन्होंने पंडित जी का क्या विराट व्यक्तित्व बना दिया था। उन्हीं में ही ऐसा साहस था कि वह ऐसा बोल सकते थे। उस समय लगता ही नहीं था कि उन पर कोई बंधन भी है।

कांग्रेसी नेता ने कहा कि श्री वाजपेयी ने राजनीतिक जीवन में कई ऐसी मिसालें पेश की हैं जिन्हें बार-बार याद किया जाता है। एक ऐसा ही किस्सा 1971 के दौर का है जिसमें उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कथित तौर पर दुर्गा कहकर संबोधित किया था। सन् 1971 में वह विपक्ष के नेता थे और श्रीमती गांधी देश की प्रधानमंत्री। उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर एक कदम आगे जाते हुए इंदिरा को 'दुर्गा' की उपमा उस समय दी जब भारत को पाकिस्‍तान पर 1971 की लड़ाई में कामयाबी हासिल हुई थी।

उन्होंने बताया, "श्रीमती इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को तोड़कर जब बंग्लादेश का निर्माण कराया तो उस समय उन्होंने "दुर्गा" की 'उपमा' दी। वह अटल जी जैसा साहसी और निडर व्यक्तित्व वाला ही कर सकता है।" उनके मन में था कि इंदिरा जी ने राष्ट्रिहत में एक बड़ा काम किया है। वह गलत को गलत और सही को सही कहने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाते थे। उस समय करीब एक करोड़ शरणार्थी हिन्दुस्तान में आये। तब उन्होंने कहा कि इन्दिरा की गलत नीतियों के कारण देश पर एक करोड़ लोगों का बोझ बढ़ गया और यह शरणार्थी कभी वापस नहीं जायेंगे, लेकिन बाद में बंग्लादेश के प्रधानमंत्री से शरणार्थियों को वापस बुलाने का दबाव डालकर एक इबारत लिखी।

तिवारी ने कहा कि बंग्लादेश में पाकिस्तान के सैनिक महिलाओं की आबरू से खुलेआम खेलते थे। सैनिक उन्हें बैरकों में उठा ले जाते थे। द्वितीय विश्व युद्ध में भी इतना महिलाओं के साथ व्यभिचार नहीं हुआ होगा जितना उस समय सैनिकों ने किया। उसके बाद यूएनओ को सैनिकों की उस गन्दगी को साफ करने के लिए चिकित्सकों के एक दल को भेजना पड़ा। इन सब चीजों को लेकर अटल जी के मन में कहीं सराहना थी कि श्रीमती इंदिरा ने इनसब चीजों से मुक्ति दिलायी। इसीलिए उनके मुंह से 'दुर्गा' निकल गया। दुर्गा बताने का तात्पर्य था कि यह काम कोई साधारण महिला नहीं कर सकती थी।

उन्होंने बताया कि अटल जी ने दुर्गा की उपमा देकर इंदिरा जी को जितना बड़ा नहीं बनाया, उससे कहीं अधिक विराट उनका व्यक्तित्व बन गया।

तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उनके भाषण को अटल जी ने बहुत पसंद किया था। इस घटना के कुछ दिन बाद लोकसभा के सेंट्रल हाल में मुलाकात हाेने पर उन्होंने कहा,"तिवारी जी आप का उस दिन का भाषण बहुत प्रभावित था।"


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