स्वामी जी से नाता टूटने के बाद हमीरपुर कभी नहीं आये अटल जी

स्वामी जी से नाता टूटने के बाद हमीरपुर कभी नहीं आये अटल जी


-जनसंघ छोड़ कांग्रेस में जाने के बाद भी अटल जी से मिलने जाते थे स्वामी ब्रम्हानंद जी

-बुन्देलखण्ड के पिछड़ेपन को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वामी जी जताई थी चिंता

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किसी जमाने में स्वामी ब्रम्हानंद महाराज से बड़ा ही लगाव था मगर स्वामी जी के जनसंघ पार्टी तोड़कर इन्दिरा गांधी की पार्टी में शामिल होने पर अटल बेहद दुखी हुये थे। इसीलिये पूरे जीवन काल तक वह हमीरपुर नहीं आये। स्वामी जी से नाता टूटने के बाद अटल जी बुन्देलखण्ड के चित्रकूट में नाना देशमुख के यहां कई बार आये थे।

वरिष्ठ पत्रकार एवं भाजपा से जुड़े बाबूराम प्रकाश त्रिपाठी ने शुक्रवार को बताया कि अटल ने जनसंघ पार्टी की स्थापना करने के बाद हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र के महान संत स्वामी ब्रम्हानंद जी को अपनी पार्टी में शामिल किया था।

वर्ष 1967 में जनसंघ पार्टी से लोकसभा चुनाव में 54.7 प्रतिशत वोट पाकर सांसद बने थे। स्वामी जी और अटल जी के प्रभाव के कारण ही कांग्रेस के दिग्गज नेता मन्नूलाल द्विवेदी को पराजय का सामना देखना पड़ा था। स्वामी जी की जीत से अटल जी को बेहद खुशी हुयी थी इसीलिये स्वामी जी के जन्मदिन पर 04 दिसम्बर 1969 को अटल बिहारी वाजपेयी कार से स्वामी जी को बधाई देने पहुंचे थे। ब्रम्हानंद महाविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद अटल ने वहां सम्बोधन भी किया था।

स्वामी ब्रम्हानंद समाज सुधार ब्रिगेड के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण सिंह लोधी (दादा) ने बताया कि स्वामी ब्रम्हानंद जब जनसंघ पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये थे तब अटल जी को ठेस पहुंची थी। अटल जी की महानता भी देखिये कि पहले से जानकारी होने के बाद भी उन्होंने स्वामी जी को इस बारे में मना भी नहीं किया था। स्वामी जी वर्ष 1977 में लोकसभा का चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ा और सांसद बीकेडी के तेज प्रताप सिंह को पराजय कर दिया था। उस समय स्वामी जी को 52.0 प्रतिशत ही वोट मिले थे। स्वामी जी को अपना आदर्श मानने वाले लक्ष्मीनारायण सिंह ने बताया कि वह बहुत छोटे थे तब अटल जी राठ कस्बे में स्वामी जी के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आये थे। वह करीब पांच घंटे तक रहे थे और कस्बे के कोट बाजार में बैठकर सभी के साथ नाश्ता किया था। लेकिन उसके बाद दोबारा अटल जी हमीरपुर जनपद में कभी नहीं आये। उन्होंने बताया कि अटल जी स्वामी जी से कहते थे कि बुन्देलखण्ड एतिहासिक क्षेत्र है जो बेहद पिछड़ा हैै क्योंकि यहां के लोग लड़ते रहते है। अटल जी बुन्देलखण्ड के पिछड़ेपन को लेकर चिंतित रहते थे।

दिल टूटने के बाद भी अटल से मिलने जाते थे स्वामी

-स्वामी ब्रम्हानंद समाज सुधार बिग्रेड के संस्थापक लक्ष्मीनारायण सिंह हमीरपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रहे है। उन्होंने बताया कि यह बात बिल्कुल सत्य है कि जनसंघ छोड़ कांग्रेस में शामिल होने के बाद स्वामी जी के यहां अटल जी कभी नहीं आये थे लेकिन कांग्रेस के टिकट से सांसद बनने के बाद स्वामी जी दिल्ली में अक्सर अटल जी से मिलने जाते थे। दिल्ली में स्वामी जी को कोठी-13 एलाट था जहां लक्ष्मीनारायण सिंह भी स्वामी जी के सानिध्य में रहते थे। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली में स्वामी की कोठी में एक दो बार अटल स्वामी जी से मिलने आये थे तब उन्होंने अटल जी को प्रणाम किया था। उनका कहना है कि इतना सब होने के बाद भी अटल के चेहरे में मुस्कान रहती थी। वह एक महान नेता थे जिन्हें खोने का दर्द है। उन्होंने बताया कि स्वामी जी कर्मयोगी थे इसीलिये अटल जी उन्हें पसंद करते थे।

23 साल की उम्र में ही स्वामी जी बन गये थे संत

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण सिंह ने शुक्रवार को बताया कि 04 दिसम्बर 1894 में जिले के राठ क्षेत्र के बरहरा गांव में एक किसान परिवार में स्वामी जी का जन्म हुआ था। मात्र 23 साल की उम्र में ही स्वामी संत बन गये थे। स्वाधीनता आंदोलन में स्वामी जी महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू व गणेश शंकर विद्यार्थी के नजदीक रहे है। अंग्रेजों से मोर्चा लेने पर स्वामी जी कई बार जेल गये थे। स्वामी जी ने जीवन भर पैसे को हाथ नहीं लगाया था। इसीलिये क्षेत्र के सभी लोग उन्हें मानते थे। अटल जी इनके त्याग से प्रभावित हुये थे। शिक्षा क्षेत्र में 1938 में स्वामी जी ने, ब्रम्हानंद इण्टरकालेज, 1943 में ब्रम्हानंद संस्कृत महाविद्यालय व 1960 में ब्रम्हानंद महाविद्यालय की स्थापना करायी थी। वर्ष 1977 में लोकसभा चुनाव में स्वामी जी के सांसद बनने के बाद इन्दिरा गांधी व पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि यहां राठ आये थे।


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