खाली भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के आगे बेबस रेलवे

खाली भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के आगे बेबस रेलवे


नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अपनी खाली पड़ी जमीन पर बनी झुग्गियाें और अन्य अवैध कब्जों को हटाने के लिए भले ही नियमित रूप से कार्रवाई करने के तमाम दावे करे लेकिन आंकड़े कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। आलम ये है कि आज भी भारतीय रेलवे की 844.38 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण की जद में है।

रेल मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च, 2015 तक की स्थिति के अनुसार देश में रेलवे के पास अपनी कुल 4.61 लाख हेक्टेयर भूमि थी। इसमें से 914.80 हेक्टेयर अर्थात 0.19 प्रतिशत भूमि पर अवैध कब्जा था। 31 मार्च, 2018 की स्थिति के अनुसार भारतीय रेलवे के पास उपलब्ध 4.77 लाख हेक्टेयर भूमि में से लगभग 844.38 हेक्टेयर अर्थात 0.18 प्रतिशत अतिक्रमण के तहत है।

इस दौरान रेल मंत्रालय द्वारा अतिक्रमणों को हटाने और भूमि पर नया अतिक्रमण रोकने के तमाम प्रयास किए गए। इस दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए किए गए प्रयासों का परिणाम रहा कि वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में कुल 70.02 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सका है।

रेल मंत्रालय के अनुसार अतिक्रमणों का हटाना एक सतत प्रक्रिया है। इसके लिए रेलवे नियमित तौर पर भूमि व अतिक्रमण के सर्वेक्षण करवाती है। अतिक्रमित भूमि की सही मात्रा का आंकलन करने के लिए भूमि अभिलेखों को अद्यतन करती है और उसके बाद उन्हें हटाने के लिए कार्रवाई करती है। यदि अतिक्रमण झुग्गियों, झोपड़ियों और अवैध आवास के रूप में अस्थाई स्वरूप (सॉफ्ट अतिक्रमण) का होता है, तो उसे रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय सिविल प्राधिकारियों के साथ परामर्श करके और उनकी सहायता से हटवाया जाता है।

रेलवे पुराने अतिक्रमणों के लिए, जिनमें पार्टी को समझा-बुझाकर मनाया न जा सकता हो, उन मामलों में समय-समय पर आशोधित सार्वजनिक स्‍थल (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 (पीपीई अधिनियम 1971) के तहत कार्रवाई करता है। अनधिकृत अधिभोगियों के विरुद्ध वास्तविक कार्रवाई राज्य सरकार तथा पुलिस की सहायता से की जाती है।

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