अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति बनाने की पहल करुणानिधि ने की थी, मनमोहन ने कटवाया था नाम

अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति बनाने की पहल करुणानिधि ने की थी, मनमोहन ने कटवाया था नाम


नईदिल्ली। आज न तो अर्जुन सिंह हैं, न हीं करुणानिधि । अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति बनवाने की पहल द्रमुक नेता करुणानिधि ने की थी। वामपंथी व अन्य दल भी राजी हो गये थे। तय भी हो गया था। सूत्रों का कहना है कि नाम की घोषणा के लगभग एक घंटे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए चेयर परसन व तबकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से कहा कि यदि अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति बनाया जायेगा तो उनकी बेटी सब कुछ चलायेंगी। जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय अघोषित रूप से चलाती रही हैं। सूत्रों के अनुसार मनमोहन सिंह के यह कहने के बाद सोनिया गांधी ने अर्जुन सिंह का नाम ड्राप करके उस प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को राष्ट्रपति बना दिया, जिनके बनने से पद की गरिमा गिरी, बदनामी हुई। मनमोहन सिंह की हालत यह थी कि प्रधानमंत्री बनने के पहले तक वह अर्जुन सिंह का पांव छूकर आशीर्वाद मांगते थे।

जब प्रधानमंत्री बन गये तो उनको किनारे लगाने का कोई मौका नहीं छोड़े थे। सोनिया गांधी को पीवी नरसिंह राव इटली वापस भेजना चाहते थे। यदि अर्जुन सिंह ने अलग पार्टी बनाकर राव के प्रभाव वाली कांग्रेस को नहीं हराया होता तो दूबारा सत्ता में आने के बाद राव, सोनिया को इटली भेज दिये होते। उस सोनिया गांधी , उनके पुत्र राहुल गांधी, पुत्री प्रियंका गांधी ने अर्जुन सिंह के साथ क्या व्यवहार किया, सबको पता है। उस समय म.प्र. में अपना मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए नरसिंह राव का साथ देने वाले दिग्विजय सिंह के साथ भी अब सोनिया गांधी , उनके पुत्र राहुल गांधी, प्रियंका गांधी उसी तरह का व्यवहार करने लगे हैं।

इस बारे में अर्जुन सिंह के विश्वासी रहे आन्ध्र प्रदेश के एक नेता एस.एन. राव का कहना है कि सबको पता है कि अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति नहीं बनने देने के लिए मनमोहन सिंह से लगायत उनकी चंडीगढ़ लाबी वाले जो उनके कैबिनेट में मंत्री थे, वे तो लगे ही थे, महाराष्ट्र , राजस्थान ,हरियाणा,गुजरात के तब के कई प्रमुख सत्ताधारी कांग्रेसी नेता भी लगे थे। इनमें अधिकतर वे थे जो नरसिंह राव के कीर्तनी थे। लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद पाला बदल कर सोनिया के कीर्तनी हो गये। और अचरज यह है कि इनमें किसी ने भी, जब नरसिंह राव ने सोनिया गांधी पर नकेल कसना शुरू किया था, उनको किनारे लगाने का उपक्रम शुरू किया था , तो उनके विरूद्ध आवाज नहीं उठाई थी। केवल अर्जुन सिंह ने उसका खुलकर विरोध किया , अलग पार्टी बनाकर राव को लोकसभा चुनाव में हरवाया था। राव सरकार में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे, उन्हीं मनमोहन को सोनिया गांधी ने यूपीए –एक व यूपीए -2 में प्रधानमंत्री बनवा दिया। यह तो सोनिया गांधी को सोचना चाहिए था कि देश की भावी राजनीतिक के लिए प्रधानमंत्री किसी नौकरशाह को बनाना कितना उचित रहेगा। नहीं सोचीं तो अब उसका खामियाजा वह और कांग्रेस भुगत रही है। यदि उन्होंने अर्जुन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया होता तो आज देश का परिदृष्य कुछ और होता। यदि उनको राष्ट्रपति भी बनाईं होतीं , तो भी बहुत कुछ अंतर होता। लेकिन उन्होंने मनमोहन, अहमद पटेल, शरद पवार आदि के कहने पर अंतिम समय में अर्जुन सिंह का नाम काट दिया था।

इस बारे सर्वोच्च न्यायालय के वकील वी.चतुर्वेदी का कहना है कि मनोहन सिंह की साजिश के कारण अर्जुन सिंह को राष्ट्रपति नहीं बनाया गया। सोनिया गांधी के कई विश्वासपात्र तो अर्जुन सिंह को कभी देखना ही नहीं चाहे। लेकिन अंतिम निर्णय तो सोनिया गांधी का था। सोनिया गांधी व उनके मनमोहन, अहमद जैसे रणनीतिकारों को विवादास्पद प्रतिभा देवी पाटिल अच्छी प्रत्याशी लगी थीं। अब कुछ कांग्रेसी कहते हैं कि अर्जुन सिंह को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनाया गया होता तो आज देश की राजनीति कुछ और होती। होती, लेकिन नहीं है सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है?


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