कांग्रेस, बसपा और सपा दलित-विरोधी..कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की उपेक्षा की : पासवान

कांग्रेस, बसपा और सपा दलित-विरोधी..कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की उपेक्षा की : पासवान


नयी दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर दलित-विरोधी होने का आरोप लगाते हुए आज इनसे 18 सवाल पूछे।

लोजपा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आजादी के बाद 55 वर्षों तक देश की सत्ता पर काबिज रहने वाली कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की न केवल उपेक्षा की, बल्कि उन्हें लोकसभा चुनाव में हराया भी।

उन्होंने सवाल किया कि नेहरू-गांधी परिवार के तीन सदस्यों- मोती लाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी की संसद के केंद्रीय कक्ष में तस्वीरें लगी हैं, जबकि बाबा साहब की तस्वीर लंबे समय तक वहां नहीं लगने दिया गया। इतना ही नहीं, बाबा साहब को उनके कार्यकाल में न तो भारत रत्न से सम्मानित किया गया और न ही उनके जन्मदिवस पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की गयी।

पासवान ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) आयोग, पिछड़ी जाति के लिए गठित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को संवैधानिक दर्जा नहीं दिये जाने, एससी/एसटी को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने देने तथा बाबा साहब से जुड़े स्थलों पर स्मारक नहीं बनाये जाने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

लोजपा अध्यक्ष ने बसपा प्रमुख मायावती पर दलितों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2007 में जब उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार थी तो उन्होंने एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को कमजोर करने का आदेश दिया। उस दौरान एक राज्यादेश भी निकाला गया, जिसमें इस कानून से जुड़े मामलों को दर्ज करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों से उसकी पुष्टि की बात कही गयी थी।

इसके साथ ही इस वर्ग की महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में चिकित्सा जांच में अपराध की पुष्टि होने पर ही मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया था। उन्होेंने सुश्री मायावती से एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के बाद चुप्पी पर भी सवाल खड़े किये

पासवान ने आरोप लगाया कि इन वर्गों को पदोन्नति में आरक्षण देने के मामले में संसद के दोनों सदनों में सभी दलों के लोग सहमत थे, लेकिन सपा ने इसका विरोध किया और लोकसभा में इसे पारित नहीं होने दिया। लोजपा प्रमुख ने दलितों के उत्थान के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकारों के दौरान किये गये कार्यों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वाजपेयी सरकार के दौरान पदोन्नति में आरक्षण को लेकर तीन बार संविधान संशोधन किया गया था।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को न केवल मजबूत किया गया, बल्कि इसमें 25 नये अपराध जोड़े गये। इस सरकार के दौरान बाबा साहब से जुड़े स्थलों को स्मारक के रूप में विकसित किया गया और भव्य अम्बेडकर फाउंडेशन का निर्माण किया गया। प्रोन्नति में आरक्षण के मामले को भी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में जोरदार ढंग से उठाया और पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को बहाल रखने संबंधी आदेश पाने में सफलता प्राप्त की। इसी सरकार के दौरान एनसीबीसी को संवैधानिक दर्जा दिया गया और उच्चतम न्यायालय के फैसले के कारण कमजोर हुए एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को मूल स्वरूप में बहाल किया गया।

पासवान ने कहा कि मोदी सरकार की मुद्रा योजना, जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया आदि योजनाओं का लाभ दलितों और गरीबों को मिल रहा है और इसका लक्ष्य 'पावर टू द पुअर' है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने राम जन्मभूमि, धारा 370 तथा कुछ विवादास्पद मुद्दों पर कभी भी अपनी राय नहीं रखी है। सरकार जिस तरह से विकास की योजनाओं को क्रियान्वित कर रही है उसका प्रचार सही तरीके से नहीं किया जा रहा है, जिसका विपक्ष फायदा उठा रहा है।

इससे पहले लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह सरकार दलितों, शोषितों, पीड़ितों और पिछड़े वर्ग के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर 20 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने जो फैसला दिया उससे न केवल यह कानून कमजोर हुआ, बल्कि इस समाज के लोगों में आक्रोश चरम पर पहुंच गया। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री से तर्कपूर्ण ढंग से अपनी दलीलें रखी और उन्होंने इसकी गम्भीरता को समझा तथा जितनी जल्दबाजी में इस कानून को मूल स्वरूप में लाया गया, वह उनकी (श्री मोदी की) प्रतिबद्धता को ही दर्शाता है।

चिराग पासवान ने कहा कि इस मामले को लेकर सरकार पर कोई दबाव नहीं बनाया गया, बल्कि विभिन्न स्तरों पर मजबूती से यह बात रखी गयी कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से एससी/एसटी के लोगों पर क्या असर होगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर पार्टी की ओर से सभाएं की जायेंगी और उसमें मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताया जायेगा।

लोजपा से जुड़े दलित सेना के प्रमुख और सांसद रामचंद्र पासवान ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय आने के बाद दलित समाज, खासकर युवाओं में भारी आक्रोश था, जिसके कारण उनके संगठन ने इस मामले को लेकर आंदोलन तक करने का निर्णय लिया था। हालांकि इस समस्या का पहले ही समाधान हो गया और आंदोलन की नौबत ही नहीं आयी।

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