भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक: भाजपाई दिग्गजों की मौजूदगी में बढ़ी दलित संगठनों की गतिविधि

भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक: भाजपाई दिग्गजों की मौजूदगी में बढ़ी दलित संगठनों की गतिविधि


मेरठ। दलितों के साथ संघर्ष की घटनाओं को लेकर दलित संगठनों ने उग्र रूख अपना लिया है। भीम आर्मी समेत कई संगठनों ने उल्देपुर और कपसाड़ गांव जाकर दलितों से मुलाकात की। 11 और 12 अगस्त को मेरठ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आने के कारण दलित संगठन ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में दलित चिंतक इस मामले को उछालने में लगे हैं। गंगानगर थाना क्षेत्र के उल्देपुर गांव में हुए जातीय संघर्ष के बाद से ही दलित राजनीति गरमाई हुई है। दिल्ली से लेकर देश के कोने-कोने से दलित संगठन और चिंतक इस मामले से जुड़ गए हैं। सपा के राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव के संसद में उल्देपुर कांड को उठाने से मामला गरमा गया। दलितों के उत्पीड़न की लड़ाई लड़ने की कमान खुद भीम आर्मी संगठन ने थाम रखी है। भीम आर्मी के कार्यकर्ता लगातार उल्देपुर गांव जाकर दलितों से मिल रहे हैं और आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। भीम आर्मी ने 24 घंटे में हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इसी तरह से समता सैनिक दल के कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को लेकर दलितों के बीच सक्रिय हो गए हैं। इस संगठन ने तो रासुका नहीं लगने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। दिल्ली की आॅल इंडिया दलित महासभा के पदाधिकारी भी उल्देपुर गांव पहुंचे। अंबेडकर समिति, मिशन सुरक्षा परिषद, कांग्रेस नेता भी गांव पहुंच रहे हैं।

भाजपाई दिग्गजों की मौजूदगी में सरगर्मी तेज : 11 और 12 अगस्त को मेरठ में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. महेंद्र नाथ पांडे, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डाॅ. दिनेश शर्मा समेत कई केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक मौजूद रहेंगे। ऐसे में दलित संगठनों ने भाजपा को परेशानी में डालने के लिए उल्देपुर और कपसाड़ कांड को उछालने का मन बनाया है। इससे भाजपा की परेशानियां बढ़ गई है।

बैकफुट पर दिखाई दे रही बसपा : दलित समाज की हिमायती दिखाई देने की होड़ में दूसरे दलित संगठनों के मुकाबले बसपा पिछड़ रही है। बसपा को सबसे ज्यादा खतरा भीम आर्मी से दिखाई पड़ रहा है। ऐसे में बसपा इस संगठन को आरएसएस से प्रभावित बताकर दलितों को मैसेज देने की कोशिश में है। बसपा के तेजतर्रार नेता और पूर्व विधायक योगेश वर्मा के जेल में होने से भी बसपा की गतिविधियां सीमित हो गई है। ऐसे में बसपा नेता चुप्पी साधे हुए हैं।

खुलकर विरोध करने से बच रहे दलित चिंतक : दो अप्रैल को हुई दलित हिंसा में जिस तरह से पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की। उससे दलित चिंतक भी डरे हुए हैं। वह खुलकर कोई आंदोलन करने से बच रहे हैं और गुपचुप जाकर अपने समाज के लोगों से मिल रहे हैं। उन्हें डर है कि पुलिस कहीं दो अप्रैल की हिंसा में 4000 अज्ञात लोगों की सूची में उन्हें शामिल न कर लें। ऐसे में सभी दलित चिंतक उग्र विरोध से बच रहे हैं, लेकिन चुपचाप जाकर अपनी गतिविधि चला रहे हैं।

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