मुंबई: आरक्षण की आग में भी नहीं घटी भाजपा की लोकप्रियता

मुंबई: आरक्षण की आग में भी नहीं घटी भाजपा की लोकप्रियता


मुंबई। राज्य में मराठा समुदाय, लिंगायत, धनगर और मुस्लिम समुदाय आरक्षण की आग धधक रही है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री मंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार का जलवा बरकरार है। हाल में जलगांव और सांगली-मिरज-कुपवाड महानगरपालिका चुनाव के आए नतीजों ने भाजपा के प्रति जनता की विश्वसनीयता को और पुख्ता किया है।

दोनों मनपाओं पर कब्जा होने से भाजपाईयों का मनोबल बढ़ा है जबकि मुख्यमंत्री फडणवीस की लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है। इस चुनाव से स्पष्ट हो गया है आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को छोटे भाई शिवसेना के वैशाखी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इधर विपक्षी दल कांग्रेस-एनसीपी की कमजोरियों भी जगजाहिर हो गई हैं। बीते कई दिनों से मराठा आरक्षण को लेकर हिंसक आंदोलन चल रहा है। यहां तक कि मराठों के विरोध के कारण मुख्यमंत्री को पंढरपुर की आषाढ़ी एकादशी की पूजा की परंपरा भी तोडऩी पड़ी। मुख्यमंत्री ने राज्य में शांति और अमन चैन बनाए रखने के लिए सांगली में चुनावी रैलियां नहीं की। इधर धनगर समाज ने भी अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। लिंगायत समाज और मुस्लिम समुदाय भी आरक्षण का अपना अधिकार मांग रहा है। इन तमाम मसलों के बीच भाजपा की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। भाजपा एक के बाद एक चुनाव जीतती जा रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस न केवल सरकार में बल्कि संगठन में भी सशक्त नेता के रूप में उभरे हैं।

संभावना जताई जा रही थी कि मराठा समाज की बेरूखी भाजपा को ले डूबेगी। यैसी विपरीत स्थितियों में जलगांव और सांगली में भाजपा का स्पष्ट बहुमत आना राजनीति के विशेषज्ञों के लिए भी पहेली बना हुआ है। खासकर सांगली में जिसे मराठों का गढ़ माना जाता है, वहां भाजपा ने बाजी मारकर विपक्षियों की बोलती बंद कर दी है।

सांगली-मिरज-कुपवाडा मनपा की स्थापना के बाद से यहां कांग्रेस -एनसीपी का कब्जा रहा है। लेकिन इस बार भाजपा ने यहां कमल खिलाकर पूरी बाजी पलट दी है। सांगली मनपा की कुल 78 सीटों में भाजपा ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस-एनसीपी को केवल 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा। शविसेना के हथ निराशा लगी। इसीतरह जलगांव मनपा में शिवसेना का दबदबा था। भाजपा ने शिवसेना के कद्दावर नेता सुरेशदादा जैन के वर्चस्व को खत्म कर दिया है। भाजपा ने यहां 75 सीटों में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की। शिवसेना को केवल 13 सीटें जीती जबकि कांग्रेस-एनसीपी का खाता भी नहीं खुला।

राज्य में 54 शांति मार्च निकालने के बाद मराठा समुदाय का आंदोलन उग्र रूप ले लिया है। यैसे हालात में मुख्यमंत्री फडणवीस और राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल के इस्तीफे को लेकर भी दबाव बढ़ाया गया। लग रहा था कि विपक्ष के हाथ बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है, लेकिन जलगांव और सांगली मनपा चुनाव मेें साबित कर दिया है विपक्षी दल कांग्रेस-एनसीपी का तालमेल कमज़ोर है।


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