दर्द निवारक इंजेक्शन वोवेरान पर लगा प्रतिबंध, किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पाए गए

दर्द निवारक इंजेक्शन वोवेरान पर लगा प्रतिबंध, किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पाए गए



नई दिल्ली। नोवार्टिस इंडिया लिमिटेड की ओर से पेन किलर के रूप में बेची जाने वाली दवा डायक्लोफिनैक की बिक्री पर दवा नियामक संस्था केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संघ ने रोक लगा दी है। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय की एक कमेटी ने इसकी बिक्री पर चिंता जाहिर की थी।
ड्रग्स महानियंत्रक ने सभी राज्यों के ड्रग्स नियंत्रक को निर्देश जारी कर उक्त दवा की बिक्री पर रोक लगाने को कहा है। साथ ही महानियंत्रक ने पिछले 4 जुलाई को देहरादून (उत्तराखंड) व दमन केंद्र शासित प्रदेश के ड्रग नियंत्रक से थेमिस मेडिकेयर द्वारा बनाई जाने वाली दवा डायक्लोफिनैक के लाइसेंस को रद्द करने को भी कहा है। यह आदेश गुजरात की कंपनी ट्रायका फार्माच्यूटिकल लिमिटेड के विरोध के बाद आया है। पिछले दो सालों से यह कंपनी इस लड़ाई को लड़ रही थी।
बता दें कि डायक्लोफिनैक इंजेक्शन वोवेरान के नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। उल्लेेेखनीय है कि भारत में दर्द की दवा का बाजार 2,000 करोड़ रुपये की है जिसमें डायक्लोफिनैक की हैसियत 260 करोड़ की है। फार्मा मार्केट रिसर्च फर्म एआईओसीडी के मुताबिक नोवार्टिस व ट्रायका का बाजार 60 फीसदी का है।
यह मामला तब गरमा गया था जब ट्रायका ने कहा कि वोवेरान जैसी दवा विश्व में कहीं भी बेची नहीं जा रही है। इसलिए इसे यहां भी बेचा नहीं जाना चाहिए। उल्लेखनीय है इस दवाई को बेचने के लिए ट्रायका ने पेटेंट करवा रखा है।
उल्लेखनीय है कि ड्रग महानियंत्रक व स्वास्थ्य मंत्रालय से ट्रायका ने 2015 के दौरान उक्त दवा के लाइसेंस को रद्द करने की अपील की थी। सरकार ने उस वक्त इस मामले को देखने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बना दी। समिति की ओर से जब रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद नोवार्टिस ने स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील कर दी। सरकार ने फिर एक स्वास्थ्य महानिदेशक की अध्यक्षता में एक दूसरी समिति गठित कर दी। लेकिन इस समिति ने भी नोवार्टिस को क्लीन चिट दे दी। फिर ट्रायका ने इसके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील कर दी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के हस्तक्षेप पर तीसरी समिति बनाई गई। काउंसिल अॉफ साइंटिकफिक रिसर्च के महानिदेशक गिरीश साहनी इसके अध्यक्ष बनाए गए। इस समिति की रिपोर्ट पिछले 29 दिसंबर को सौंपी गई। इसमें ट्रायका के दावे को सही माना गया। रिपोर्ट के मुताबिक वोवेरान में जहर की मात्रा पाई गई।
इसके बाद रिपोर्ट को दिल्ली उच्च न्यायालय को सौंपा गया। हालांकि ट्रायका ने इस मामले में किसी भी प्रकार के टिप्पणी से मना कर दिया। नोवार्टिस के मुताबिक उसे अभी तक आदेश की प्रति नहीं मिली है।

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