महबूबा की केन्द्र को चेतावनी..पीडीपी तोड़ने के प्रयास पर केंद्र को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

महबूबा की केन्द्र को चेतावनी..पीडीपी तोड़ने के प्रयास पर केंद्र को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम



श्रीनगर - जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्य में सरकार के गठन के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) में विभाजन के किसी भी प्रयास के प्रति केन्द्र को चेतावनी देते हुए शुक्रवार को कहा कि यदि ऐसा किया गया तो इसके गंभीर नतीजे सामने आयेंगे।
पीडीपी प्रमुख सुश्री मुफ्ती ने श्रीनगर के पुराने इलाके में नकाशबंद साहिब मजार पर 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद संवाददाताओं से कहा," यदि नयी दिल्ली 1987 को दोहराने की कोशिश करेगी तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे।" उन्होंने कहा कि 1987 में एक पार्टी को तोड़ने का ही नतीजा था कि मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन (पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख) और जेकेएलएफ प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक जैसे नेता उभरे और यदि अब पीडीपी तोड़ी जाती है तो इसके और भी खतरनाक परिणाम होंगे। "
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा," यदि 1987 में नयी दिल्ली के हस्तक्षेप के कारण सलाहुद्दीन और यासीन मलिक का जन्म हुआ, तो आज स्थिति और भी बदतर हो जाएगी। "
उन्होंने कहा कि दिल्ली की मंजूरी के बिना राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा,
" मेरी पार्टी एकजुट है। घर में समस्याएं हो सकती हैं जिन्हें घर के भीतर मिल-बैठक हल किया जा सकता है। लेकिन, 1987 में जिस प्रकार लोगों के मुस्लिम संयुक्त मोर्चा (एमयूएफ) के पक्ष में मतदान करने के बावजूद उसे तोड़ा गया था, उसी प्रकार यदि नयी दिल्ली इस बार भी हस्तक्षेप करने की कोशिश करेगी तो इसके बहुत खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।"
सुश्री मुफ्ती की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन की सरकार थी। भाजपा ने 19 जून को गठबंधन से हटने की घोषणा की थी जिसके बाद सुश्री मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया था। राज्य में 20 जून से राज्यपाल शासन लागू है।
सुश्री मुफ्ती के इस्तीफे के तुरंत बाद पार्टी के चार विधायकों ने उनके विरुद्ध बागी तेवर अपनाते हुए विद्रोह का एलान कर दिया था। पार्टी के बागी विधायकों ने उनकी खुलेआम आलोचना करते हुए उन पर भाई-भतीजावाद करने तथा गठबंधन सरकार में मंत्री रहे अपने भाई को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।
राज्य में राज्यपाल का शासन लगाया गया है लेकिन विधानसभा को निलंबित रखा गया है, जिसने इस प्रकार के संदेह को जन्म दिया कि यह केंद्र की सलाह पर किया गया है ताकि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सके और नयी सरकार बना सके। भाजपा को छोड़कर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने विधान सभा को भंग करने की मांग की है और स्थिति अनुकूल होने और उचित समय पर नए चुनाव कराने की मांग की है।

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