उच्चतम न्यायालय ने पूछा....क्या एमपी सरकार ने दुष्कर्म की कीमत 65 सौ रूपये लगाई

उच्चतम न्यायालय ने पूछा....क्या एमपी सरकार ने दुष्कर्म की कीमत 65 सौ रूपये लगाई

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने निर्भया कोष के तहत मिली राशि खर्च न करने तथा दुष्कर्म पीडि़ताओं को इसका उचित लाभ नहीं देने को लेकर राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आज कड़ी फटकार लगायी।
न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने निपुण सक्सेना की याचिका की सुनवाई के दौरान सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से इस बाबत चार हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा। पीठ ने कहा कि सिक्किम को छोड़कर किसी भी राज्य सरकार ने उसे यह जानकारी नहीं दी है कि निर्भया कोष में प्राप्त राशि का उन्होंने कैसे इस्तेमाल किया और कितनी पीडि़ताओं की मदद पहुंचायी गयी। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकारों पर आरोप लगाया गया है कि निर्भया कोष का पैसा पीडि़त महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है और सरकारें इसे इधर-उधर कर दे रही हैं। न्यायालय ने कहा कि गत नौ जनवरी को सभी राज्य सरकारों को यह बताने के लिए कहा गया था कि निर्भया कोष से दुष्कर्म पीडि़ताओं को कितना पैसा दिया और किन-किन पीडि़त महिलाओं को पैसा दिया गया, लेकिन राज्य सरकारों ने इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि राज्य सरकारों के रवैये से यह क्यों न मान लिया जाये कि राज्य सरकारें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाह हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान शिवराज सिंह सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में से हैं, जिन्हें निर्भया कोष योजना के तहत केंद्र से सबसे ज्यादा राशि मिली है, लेकिन राज्य सरकार ने दुष्कर्म पीडि़ताओं को छह हजार से साढ़े हजार रुपये की मदद की है। अदालत ने शिवराज सरकार की ओर से पेश वकील से सवाल किया कि क्या मध्य प्रदेश सरकार ने दुष्कर्म की कीमत 65०० रुपये लगाई है?

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