'पेट्रोटेक 2019'- देश में ब्लू फ्लेम क्रांति गति पकड़ रही है: मोदी



ग्रेटर नोएडा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत तेजी से सबके लिए उर्जा की तरफ बढ़ रहा है और देश में ब्लू फ्लेम क्रांति गति पकड़ रही है।

श्री मोदी ने यहां पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी पर आयोजित 13वें सम्मेलन 'पेट्रोटेक 2019' का उद्घाटन करते हुये कहा कि उर्जा आर्थिक विकास का महत्त्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से गरीब भी विकास में भागीदार हो सकते हैं। हम ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां सबके लिए उर्जा उपलब्ध होगी। भारत इस दिशा में नेतृत्व कर रहा है और दुनिया के अन्य देश हमारे अनुभव से सीख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वह उर्जा न्याय में यकीन रखते हैं। उर्जा तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों के परिणाम भी दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा 'देश के हर गांव तक बिजली पहुंच चुकी है और इस साल के अंत तक हर घर तक पहुंच जायेगी। बड़े पैमाने पर एलईडी बल्बों के इस्तेमाल से लोगों के बिजली बिल में सालाना कुल 17 हजार करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उज्ज्वला योजना के तहत छह करोड़ 40 लाख परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन दिये गये हैं। ब्लू फ्लेम क्रांति गति पकड़ रही है।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में 55 प्रतिशत परिवारों के पास रसोई गैस कनेक्शन था जो अब बढ़कर 90 प्रतिशत पर पहुंच गया है। जल्द ही इसके शत—प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद है।

सम्मेलन में मौजूद पेट्रोलियम उत्पादक देशों को एक तरह से लक्षित करते हुये उन्होंने कहा 'तेल एवं गैस व्यापार की वस्तुएं मात्र नहीं हैं। ये लोगों की रोजमर्रा की जरूरत हैं। चाहे रसोई में खाना पकाना हो या विमान की उड़ान, सबके लिए ईंधन की जरूरत है। हमें तर्कसंगत मूल्य की ओर बढ़ना होगा। तेल एवं गैस दोनों के लिए ही पारदर्शी एवं लोचपूर्ण बाजार तैयार करना होगा।'

मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उर्जा उपभोक्ता देश है। देश में ऊर्जा की मांग पांच प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है तथा वर्ष 2040 तक इसके दुगना होने का अनुमान है। सबके लिए उर्जा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नीतिगत स्तर पर भी काफी प्रयास किये हैं। तेल एवं गैस ब्लॉकों के आवंटन में राजस्व साझेदारी की शुरुआत की गयी है। गैस की कीमत तय करने की प्रणाली में सुधार किया गया है। तेल विपणन क्षेत्र में उदारता लायी गयी है। पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त किया गया है। पिछले साल राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति बनायी गयी है। ईंधन में इथेनॉल मिश्रण तथा बायो डीजल कार्यक्रमों से प्रदूषण कम हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से गैस आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है। सोलह हजार किलोमीटर गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है तथा 11 हजार किलोमीटर गैस पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। पूर्वी भारत में 3,200 किलोमीटर गैस पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है। एक माह के भीतर 400 जिलों में पाइपलाइन के माध्यम से गैस वितरण को नेटवर्क विकसित कर लिया जायेगा। शहरी गैस वितरण के दायरे में 70 प्रतिशत आबादी शामिल हो जायेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल एवं गैस सेक्टर में इस समय बदलाव का दौर है। आपूर्ति, स्रोत और उपभोग के तौर—तरीके बदल रहे हैं। पहले जहां पश्चिमी देश सबसे बड़े उपभोक्ता होते थे अब पूरब उसकी जगह ले रहा है। शेल आॅयल के बाद अमेरिका सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन गया है। सौर एवं नवीकरणीय उर्जा की कीमत प्रतिस्पर्द्धी हुई है। उर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी उर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक ग्राहक—विक्रेता समझौतों की बजाय रणनीतिक साझेदारी की तरफ बढ़ा है।

हर दो साल में होने वाले इस सम्मेलन में तेल एवं गैस क्षेत्र की एक अंतर्राष्ट्रीय हस्ती को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया जाता है। इस साल संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री तथा मासदार कंपनी के अध्यक्ष और अबुधाबी नेशनल आॅयल कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुल्तान अहमद अल जबर को यह सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार में संयुक्त अरब अमीरात से भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है तथा ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध की आशंका के मद्देनजर यह और महत्त्वपूर्ण है।

इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों में उर्जा तक लोगों की पहुंच नहीं होने के कारण विकास बाधित रहा है। यह सम्मेलन इससे जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर चर्चा के लिए मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति 4.0 से उर्जा उपभोग के तौर—तरीकों में भारी बदलाव आयेगा।

रविवार से शुरू हुये तीन दिवसीय सम्मेलन में 70 से ज्यादा देशों के करीब सात हजार प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें कई देशों के मंत्री भी शामिल हैं। देश की सभी प्रमुख तेल विपणन कंपनियां और तेल खनन कंपनियां तथा तेल एवं गैस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां भी इसका हिस्सा हैं। यहां 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने अपने स्टॉल लगाये हैं।

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