हार्दिक पटेल का आमरण अनशन 19 वें दिन समाप्त, मोदी, शाह पर साधा निशाना, गांधी आश्रम भी गये

हार्दिक पटेल का आमरण अनशन 19 वें दिन समाप्त, मोदी, शाह पर साधा निशाना, गांधी आश्रम भी गये

मदाबाद। पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने किसानों की कर्ज माफी, पाटीदार आरक्षण और राजद्रोह के मामले में जेल में बंद अपने एक साथी अल्पेश कथिरिया की रिहाई की मांग को लेकर गत 25 अगस्त से चल रहे उनके आमरण अनशन को आज 19 वें दिन समाप्त कर दिया और इसके बाद सत्तारूढ़ भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर सीधा प्रहार किया।

बाद में वह यहां महात्मा गांधी के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम में भी गये और चरखा चलाया। बाद में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि उपवास के दौरान सत्य, अङ्क्षहसा के ताकत का अहसास उन्हें हुआ है। वह गांधी जी के विचारों को लेकर आगे का आंदोलन चलायेंगे। भगत ङ्क्षसह का नाम लेते लेते गांधीजी की शरण में आने के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दोनो का लक्ष्य एक ही था कि भारत को आजादी कैसे मिले। इससे पहले पाटीदार समुदाय के प्रमुख धार्मिक संगठन उमिया धाम के प्रमुख प्रहलाद पटेल, खोडलधाम के चेयरमैन नरेश पटेल तथा इन दोनो समेत छह संगठनों के प्रतिनिधियों के समन्वयक सी के पटेल के हाथों नींबू पानी, नारियल पानी और पानी पीकर अनशन समाप्त करने के बाद हार्दिक ने कहा कि वह अपने समाज के वरिष्ठों को सम्मान देने के लिए उनके समक्ष झुके हैं। वह सरकार के समक्ष नहीं झुके हैं। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठजनों ने कहा है कि वे सरकार से बात करेंगे। अगर सरकार हमारी बात मानती है तो ठीक है पर अगर यह नहीं मानती तो यह माना जायेगा कि उसे हमारी जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की। कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले हार्दिक ने भाजपा का नाम लिये बिना कहा कि यह भी सोचना होगा कि समुदाय कब तक गुलामी की मानसिकता रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई गरीब किसानों और मात्र दस पंद्रह हजार रूपये कमाने वाले शहर के ऐसे गरीब पाटीदारों के लिए है जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा तक नहीं दिला सकते। बाद में पत्रकारों से बातचीत में हार्दिक ने कहा कि लोगो को गुजरात में पर्यटक स्थलों को नहीं बल्कि श्री मोदी और श्री शाह के निर्देश पर चल रही भाजपा की अंग्रेजों जैसी तानाशाह हुकूमत को देखने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में अगर किसानों की रिण माफी और पाटीदार आरक्षण की मांगें पूरी करने की ताकत नहीं है तो इसे सत्ता की कुर्सी खाली कर देनी चाहिए। अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो जनता इससे सत्ता खुद ही छीन लेगी। इससे पहले पाटीदार समाज के नेताओं ने आपसी एकता और संगठन की ताकत पर जोर दिया। श्री सी के पटेल ने यह भी कहा कि इस बात के लिए होशियार रहना होगा कि कोई समुदाय को विभाजित न करे अथवा तोड़े नहीं। इस बीच, हार्दिक के पूर्व साथी और भाजपा नेता केतन पटेल ने कहा कि पाटीदार समाज ने अब समझ लिया है कि हार्दिक पटेल राजनीतिक कारणों से आंदोलन को किसी तरह ङ्क्षजदा रखना चाहते हैं। राज्य सरकार ने पहले ही पाटीदार आंदोलन संबंधी अधिकतर संभव मांगों को मान लिया था और आंदोलन तभी समाप्त हो जाना चाहिए था पर हार्दिक अपने निजी महत्वाकांक्षा को लेकर इसे किसी तरह जारी रखना चाहते थे। इसलिए अब उन्हें कोई समर्थन नहीं मिल रहा । उनके पिछले कार्यक्रमों के दौरान हुई तोडफ़ोड़ और हिंसा चलते बाहर उपवास आंदोलन की अनुमति नहीं मिलने पर यहां अपने आवास ग्रीनवुड रिसार्ट में आमरण अनशन पर बैठे हार्दिक पटेल को उपवास के 14 वें दिन सात सितंबर को पहले सरकारी अस्पताल में और बाद में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद 9 सितंबर को वापस वह अपने आवास पर आकर अनशन पर बैठ गये। आज कुल मिला कर उनके अनशन का 19 वां दिन था। उन्होंने इस बीच दो बार पानी का त्याग भी किया था पर इसे फिर से लेना शुरू कर दिया था। हार्दिक कैंप की ओर से बार-बार दिये गये अल्टीमेटम के बावजूद राज्य की भाजपा सरकार ने इस बार कड़ा रूख बनाये रखा। उसने कहा कि हार्दिक ने पिछले चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था कि अब भी वह उसी के इशारे पर आगामी लोकसभा चुनाव में उसे लाभ दिलाने की नीयत से यह आंदोलन कर रहे हैं।

हार्दिक से मिलने वालों में अधिकतर कांग्रेस के नेता था इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा तथा कई अन्य ऐसे चेहरे शामिल थे। आज हार्दिक के अनशन के समापन के मौके पर कांग्रेस के कई विधायक और गढड़ा के स्वामीनारायण मंदिर के प्रमुख एस पी स्वामी भी उपस्थित थे। बाद में श्री सी के पटेल ने कहा कि कुछ दिन पहले सरकार को पाटीदार समुदाय से जुड़े मामलों की एक सूची दी गयी है और अब इसमें कुछ और विषयों को जोड़ा जायेगा। उम्मीद है कि सरकार इसे गंभीरता से लेकर इन्हें हल करेगी। समुदाय की छह संस्थायें (उक्त दो के अलावा सरदार धाम और विश्व उमिया फाउंडेशन अहमदाबाद, समस्त पाटीदार समाज, सूरत तथा सिदसर उमिया धाम) पाटीदार आरक्षण के मामले में कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने पाटीदार आंदोलन के 70 प्रतिशत मुकदमे वापस ले लिये हैं। बाकी 30 प्रतिशत पर भी चर्चा जारी है। श्री नरेश पटेल ने कहा कि राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार कथिरिया की रिहाई के मामले को भी प्रमुखता से उठाया जायेगा।

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