रेप के आरोप में मलावी जेल में बंद कल्पतरू के कर्मचारी, परिजनों का कंपनी पर आरोप

रेप के आरोप में मलावी जेल में बंद कल्पतरू के कर्मचारी, परिजनों का कंपनी पर आरोप


नई दिल्ली। झारखंड के दो व्यक्ति अफ्रीकी देश मलावी की जेल में बंद हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ है। दोनों व्यक्ति भारतीय कंपनी कल्पतरू पॉवर ट्रॉन्समिशन्स के प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए मलावी गए थे। लेकिन जब हिन्दुस्थान समाचार ने इन कर्मचारियों के परिजनों से बात की तो दूसरी ही बात सामने आई है। मलावी जेल में बंद कर्मचारियों के परिजनों का आरोप है कि दोनों को झूठे केस में फंसाया गया है। बलात्कार मामले में मेडिकल जांच में इन दोनो के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं मलावी की अदालत में इनकी पेशी के समय कंपनी से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हो रहा है। रॉयल बुलेटिन ने कल्पतरू पॉवर ट्रॉन्समिशन के मुख्यालय में जब एचआर प्रमुख से बात की तो उन्होंने इस पूरे मामले से अनिभिज्ञता जारी की।
रॉयल बुलेटिन ने इन कर्मचारियों के परिजनों में से एक झारखंड में रहने वाले घनश्याम महतो से बात की। महतो ने बताया कि 19 अप्रैल, 2018 से मलावी जेल में बंद झारखंड के हजारीबाग के गोरहर गांव निवासी 23 साल के गिरधारी महतो और बोकारो के चतरो चट्टी गांव के 43 साल के कामेश्वर महतो से वे फोन पर बात कर चुके हैं। इन दोनों ने घनश्याम महतो को बताया कि कल्पतरू के दो अधिकारी वहां कंपनी प्रोजेक्ट से सामान बेचा करते थे। जो सीमेंट, स्टील रॉड्स एवं अन्य सामान कंपनी प्रोजेक्ट के लिए आता था, ये दोनों अधिकारी उसे चोरी करवा रहे थे। जब गिरधारी महतो और कामेश्वर महतो ने इस पर विरोध जताया, तो इन दोनों अधिकारियों ने प्रोजेक्ट में काम कर रहे स्थानीय कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर उन पर बलात्कार का झूठा आरोप लगवाया। परिजनों की मानें तो जेल भेजे जाने के एक महीने पहले इन दोनों को स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया और वहां पर इनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। यह विदेशों में पकड़े गए किसी भी व्यक्ति के साथ स्थानीय जांच एजेंसियों का बहुत ही प्रचलित तरीका है। इसमें पकड़े गए व्यक्ति को कहा जाता है कि वो या तो कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर दे या फिर जेल चले जाए। ये तरीका जांच एजेंसियां राजनायिक दबाव पड़ने से बचने के लिए अपनाती हैं। वहीं कंपनी ने उन दोनों अधिकारियों को वापस भारत बुला लिया है।
महतो और बाकी परिजनों ने ही इन दोनों कर्मचारियों के मलावी जेल में बंद होने की बात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक पहुंचाई थी। विदेश मंत्री ने इस पूरे मामले को लेकर मलावी स्थित भारतीय उच्चायोग को कहा। इस पर मलावी में स्थित भारतीय उच्चायोग से एक अधिकारी ने उन दोनों व्यक्तियों से जेल में जाकर मुलाकात की। मलावी उच्चायोग ने बताया कि ये केस न्यायलय में लंबित है। फिर भी भारतीय उच्चायोग मलावी एजेंसियों, इनकी कंपनी और वकील से लगातार संपर्क में है।
इस पूरे मामले पर रॉयल बुलेटिन ने कल्पतरू पॉवर ट्रॉन्समिशन लिमिटेड के मुंबई स्थित मुख्यालय में बात की। तो कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट, मानव संसाधन श्री राव ने इस पूरे मामले से अनिभिज्ञता जाहिर की। कंपनी के वीपी (एचआर) ने कहा कि कंपनी में हजारों कर्मचारी काम करते हैं, और कौन कहां है, इसकी जानकारी वो कैसे रख सकते हैं। उनके कोई दो कर्मचारी मलावी में जेल में बंद है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
उसके बाद से कंपनी के इस अधिकारी ने हिस के फोन का उत्तर देना बंद कर दिया। कंपनी प्रबंधन सवालों के घेरे में है, कि आखिर मानव संसाधन विभाग को ही नहीं पता कि उसके दो कर्मचारी विदेश में जेल में बंद हैं। क्या इस पूरे मामले में कंपनी ने भारतीय विदेश मंत्रालय से मदद मांगी? उन दो अधिकारियों को भारत वापस क्यों बुलाया गया? क्या उनके खिलाफ कोई जांच की गई है?

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