प्रदूषण का कहर: सुप्रीमकोर्ट ने फिर जताई चिंता...प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिये उपाय तलाशे केन्द्र

प्रदूषण का कहर: सुप्रीमकोर्ट ने फिर जताई चिंता...प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिये उपाय तलाशे केन्द्र

नई दिल्ली। देश, खासकर राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों, में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को हाइड्रोजन आधारित ईंधन के इस्तेमाल की संभावना तलाशने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र को बुधवार को यह सलाह दी। न्यायालय ने कहा कि देश में, खासकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति खतरनाक स्तर पर पहुंच गयी है। इस पर नियंत्रण के लिए केंद्र को उपाय करना चाहिए। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार तकनीक और अन्य उपायों के सहारे इस बाबत पुख्ता उपाय सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकार प्राप्त कमेटी तकनीकी उपयोगिता की बाबत अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में तीन दिसंबर तक रिपोर्ट तलब की है। वहीं राजधानी दिल्ली में बुधवार को प्रदूषण के कारण वायु की गुणवत्ता काफी बदतर रही और दोपहर बाद एक बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 452 दर्ज किया गया। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह जानकारी दी है। इस हालत को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑड-ईवन योजना की अवधि में इजाफा कर सकती है। दिल्ली में वायु की गुणवत्ता पर इस समय 35 स्टेशनों से निगरानी की जा रही है और उन्हीं से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह औसत आंकड़े जारी किए हैं। द्वारका, बवाना, आनंद विहार और वजीरपुर राजधानी में सबसे प्रदूषित रहे और इन स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 से ऊपर रहा है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने में पिछले कई दिनों में कोई कमी नहीं आई है और इसकी वजह से गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अन्य समीपवर्ती हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 से ऊपर रहा है।

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