कोर्ट का दिल्ली सरकार को निर्देश, जेएनयू मामले में एक महीने में करें फैसला

कोर्ट का दिल्ली सरकार को निर्देश, जेएनयू मामले में एक महीने में करें फैसला


नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में अभियोजन चलाने के लिए स्वीकृति देने पर एक महीने में फैसला करे। इस मामले पर अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी।

बुधवार की सुबह मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट पर दिल्ली सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। उसके बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आज ही दोबारा तीन बजे पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश जारी किया।

उल्लेखनीय है कि 23 जुलाई को मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया था कि चार्जशीट पर अनुमति देने के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। तब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी से मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इससे पहले 8 अप्रैल कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फैसला लेने के लिए 23 जुलाई तक का समय दिया था। जबकि 5 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से चार्जशीट दाखिल की है। साथ ही कहा था कि वह एक महीने में इस संबंध में फैसला कर लेंगे।

3 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा था कि इस मामले में अनुमति देने के मामले पर फैसला लेने में एक महीने का वक्त लग सकता है। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वे यह बताएं कि आखिर कब तक इस मामले पर आप फैसला कर लेंगे। इससे पहले 30 मार्च को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में केस चलाने के लिए अनुमति देना एक प्रशासनिक कार्य है और ये दिल्ली सरकार के पास लंबित है।

चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने कहा था कि आपका काम खत्म हो गया, हम दिल्ली सरकार से पूछेंगे कि देर क्यों हो रही है।

29 मार्च को स्पेशल सेल के डीसीपी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे जिससे कोर्ट नाराज हो गई थी और उन्हें 30 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। पिछले 11 मार्च को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि केस चलाने के लिए जरूरी अनुमति मिलने में दो-तीन महीने का समय लग सकता है। इस पर कोर्ट नाराज हो गई और कहा कि बिना अनुमति मिले चार्जशीट दाखिल करने की क्या हड़बड़ी थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी से केस का अपडेट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

11 मार्च को दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया था कि इस मामले के जांच अधिकारी उपस्थित नहीं हैं, क्योंकि वो हादसे के शिकार हो गए हैं। कोर्ट को बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने चार्जशीट को पढ़ने के लिए दो-तीन महीने का समय मांगा है।

दरअसल, 14 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। करीब 1200 पेजों के इस चार्जशीट में सीट में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में सात अन्य कश्मीरी छात्रों के भी नाम शामिल हैं। चार्ज शीट में देशद्रोह, धोखाधड़ी, इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होना, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाया गया है।इस मामले में 9 फरवरी 2016 को जेएनयू कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल तीनों जमानत पर हैं।


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