मोदी-ट्रम्प का मंच साझा करना पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश : विदेश मंत्री

मोदी-ट्रम्प का मंच साझा करना पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश : विदेश मंत्री


नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बारे में विश्व समुदाय भारत के पक्ष को समझता है तथा अमेरिका में ह्युस्टन रैली में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक मंच पर आना पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश होगा।

विदेश मंत्री ने ह्युस्टन के 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान को पता लगेगा कि दुनिया में भारत की क्या छवि है और खुद उसके बारे में दुनिया का क्या नजरिया है। जयशंकर ने प्रधानमंत्री को उद्धृत करते हुए कहा कि आईटी भारत और पाकिस्तान दोनों पर लागू होता है। भारत आईटी यानी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (सूचना प्रौद्योगिकी) के लिए जाना जाता है जबकि पाकिस्तान के लिए आईटी इंटरनेशनल टेररिज्म (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद) के रूप में लागू होता है।

जयशंकर ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में विदेश नीति की उपलब्धियों का ब्योरा मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में दिया।पाकिस्तान से बातचीत की संभावना के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत आखिर किस आधार पर हो सकती है? उन्होंने कहा कि कोई भी देश किसी अन्य देश से, जो आतंकवाद फैलाता हो, बातचीत नहीं कर सकता।

उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केवल अच्छे बयान देना जमीन पर मौजूद हालात और चुनौतियों को हल नहीं कर सकते। जरूरत इस बात की है कि पड़ोसी देश सीमा पार आतंकवाद के उद्योग को नष्ट करे, जो जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत के लिए समस्या बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इमरान खान के बीच मुलाकात की संभावना के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने सवालिया लहजे में कहा, "क्या हालात ऐसे हैं, जिसमें वार्ता संभव है।"

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के औचित्य को दुनिया भलीभांति समझ रही है। भारत ने राजनयिक माध्यम से विभिन्न देशों को बताया है कि अनुच्छेद 370 एक अस्थाई प्रावधान था। इसे एक न एक दिन खत्म होना था।

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर कुछ पक्षों की ओर से की जा रही आलोचना का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि यह लोग ऐसा सोचते हैं कि इस फैसले के पहले जम्मू-कश्मीर में सबकुछ ठीक चल रहा था। हकीकत यह है कि पिछले तीन दशकों के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और हिंसा के कारण हालात बहुत बदतर थे। मोदी सरकार के सामने दो ही रास्ते थे या तो वह हिंसा और अव्यवस्था का पुराना घटनाक्रम चलते रहने देती या हालात में बदलाव के लिए सकारात्मक कदम उठाती । सरकार ने महिला पुरुष समानता और उपेक्षित वर्गों को न्याय देने के लिए यह फैसला किया था कि पूरे देश में एक जैसे कानून लागू हों।

विदेश मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाया जाना भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा मुद्दा आतंकवाद है। वार्ता की मेज पर पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के बारे में जवाबदेह होना पड़ेगा।

विदेश मंत्री ने कश्मीर के बारे में विदेशी मीडिया की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि उसकी रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मीडिया में इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया कि अनुच्छेद 370 एक अस्थाई प्रावधान था ।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में शामिल करने के बारे में उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत का है और एक न एक दिन यह वास्तविक रूप से भारत के अधिकार क्षेत्र में आ जाएगा।

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के कमजोर होने के संबंध में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि इसके लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। सार्क की स्थापना व्यापार बढ़ाने, संपर्क सुविधाओं का विस्तार करने और आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए की गई थी। पाकिस्तान को छोड़कर अन्य सभी सार्क देश यह भलिभांति समझ रहे हैं कि इस संगठन को कौन देश नुकसान पहुंचा रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर बाहरी दुनिया क्या कहती है, इस पर अनावश्यक रूप से ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हमें अपने फैसले पर पूरे आत्मविश्वास के साथ कायम रहना होगा और दुनिया पर यह जाहिर कर देना होगा कि अंत में भारत वही करेगा, जो उसके हित में होगा।


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