शारदा चिटफंड घोटाला: राजीव कुमार ने सीबीआई से फिर मांगा समय

शारदा चिटफंड घोटाला: राजीव कुमार ने सीबीआई से फिर मांगा समय


कोलकाता। अरबों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाला मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार ने एक बार फिर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) की पूछताछ का सामना करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सीआईडी अधिकारियों के हाथों शुक्रवार सुबह एक चिट्ठी सॉल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में स्थित सीबीआई के पूर्वी क्षेत्रीय मुख्यालय में भिजवाया है। इस चिट्ठी के जरिए उन्होंने और एक सप्ताह का समय मांगा है।

दरअसल चिटफंड मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई ने पहले भी राजीव कुमार को समन भेजा था। उस दौरान भी उन्होंने सीआईडी अधिकारियों के हाथों एक चिट्ठी भिजवाई थी। इसमें एक सप्ताह का समय मांगा था। सीबीआई ने उसे स्वीकार कर लिया था। अब आज यानी 16 अगस्त को वह समय सीमा पूरी हो गई थी और राजीव कुमार को पूछताछ के लिए हाजिर होना था लेकिन आज भी वह नहीं आए। उनकी जगह सीआईडी के दो अधिकारी सीबीआई दफ्तर पहुंचे और कुमार की ओर से एक चिट्ठी दी। जांच एजेंसी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस चिट्ठी के जरिए राजीव कुमार ने एक बार फिर सात दिन के अतिरिक्त समय की मांग की है। हालांकि कुमार को सीबीआई समय देगी या नहीं, इस बारे में निर्णय नहीं लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि राजीव कुमार फिलहाल राज्य सीआईडी के एडीजी हैं। आगामी 19 अगस्त को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि उस दिन न्यायालय का रुख देखने के बाद ही राजीव कुमार सीबीआई दफ्तर में आने या नहीं आने के बारे में फैसला लेंगे। शारदा चिटफंड समूह के मालिक सुदीप्त सेन और उसकी सहयोगी देबजानी मुखर्जी को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने जम्मू-कश्मीर के सोनमार्ग से गिरफ्तार किया था। 2013 में इन दोनों की गिरफ्तारी के समय राजीव कुमार एसआईटी के मुखिया थे और बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के तत्कालीन आयुक्त भी थे। दोनों की गिरफ्तारी के बाद उनके पास एक लाल डायरी और लैपटॉप आदि बरामद हुए थे। इसमें उन लोगों का ब्यौरा दर्ज था, जिन्होंने शारदा समूह से भारी धनराशि ली थी। हालांकि 2014 में जब सीबीआई ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू की तब से एसआईटी ने लाल डायरी और कई अन्य दस्तावेज आज तक जांच एजेंसियों को नहीं सौंपा है। आरोप है कि राजीव कुमार के निर्देश पर उन दस्तावेजों को नष्ट किया गया है ताकि सत्तारूढ़ तृणमूल के जिन नेताओं ने समूह से पैसे लिए थे उन्हें बचाया जा सके। इसी मामले में सीबीआई की टीम कुमार से पूछताछ करना चाहती है।


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