समुन्द्र में बह जाने वाले पानी को पश्चिम महाराष्ट्र तक पहुंचाएंगे :फडणवीस

समुन्द्र में बह जाने वाले पानी को पश्चिम महाराष्ट्र तक पहुंचाएंगे :फडणवीस


-बाढ़-पीड़ितों का तय समय में होगा पुनर्वास

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कोंकण क्षेत्र का बारिश का पानी पश्चिम महाराष्ट्र तक पहुंचाने के लिए उनकी सरकार कृतसंकल्प है। इसके लिए 480 किलोमीटर की सुरंग बनाकर समुंद्र में बह जाने वाला पानी को सूबे के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण करने बाद कहा कि उनकी सरकार का सूबे को जलपरिपूर्ण करने का लक्ष्य है। पिछले पांच वर्षों में जलशिवार योजना से राज्य के कई इलाकों में बारिश का पानी रोकने का प्रयास किया गया है। कोंकण क्षेत्र में बारिश का पानी बहकर समुंद्र में चला जाता है, जबकि विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र की जनता सूखे से परेशान है। इसलिए राज्य सरकार कोंकण क्षेत्र से बारिश का पानी वैनगंगा व नलगंगा योजना के माध्यम से मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र तक पहुंचाएगी। इसके 480 किलोमीटर लंबी सुरंग खोद कर यह महत्वपूर्ण काम किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम महाराष्ट्र, विदर्भ व मराठवाड़ा के सभी प्रलंबित सिंचन प्रकल्प जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास कर रही है।

मंत्रालय में गुरुवार को ध्वजारोहण करने के बाद कहा कि सूबे के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन जिलों में बहुत ही कम समय में 800 मिमी. बारिश दर्ज की गई। यह बारिश औसतन 110 फीसदी से भी अधिक थी। इसलिए सूबे के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, एनडीआरएफ, कोस्टगार्ड की टीम ने बाढ़-पीड़ितों की तत्काल मदद की। मुख्यमंत्री ने इन सभी टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 6813 करोड़ रुपये आर्थिक मदद की मांग की है लेकिन राज्य सरकार केंद्र की मदद की प्रतीक्षा करते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठी नहीं रहने वाली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की मदद सरकारी तिजोरी से करना शुरू कर दिया है। बाढ़ पीड़ितों का तय समय में पुनर्वास कराने को लेकर सरकार कृतसंकल्प है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बाढ़ पीड़ितों के खुशी के पल वापस लाने के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं।


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