प्रियंका ने की सोनभद्र की पीडितों से मुलाकात...पीडित परिवार की महिलाओं से पूरे अपनेपन के साथ घुल मिल गयीं कांग्रेस महासचिव

प्रियंका ने की सोनभद्र की पीडितों से मुलाकात...पीडित परिवार की महिलाओं से पूरे अपनेपन के साथ घुल मिल गयीं कांग्रेस महासचिव

सोनभद्र, 13 अगस्त। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के पीडित परिवारों से मुलाकात की वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता के दौरे को महज राजनीति करार दिया है। श्रीमती वाड्रा सुबह वाराणसी हवाई अड्डा पहुंची जहां से कार द्वारा वह सोनभद्र में घोरावल क्षेत्र के उम्भा गांव पहुंची जहां पिछली जून को जमीनी विवाद में दस आदिवासियों की हत्या कर दी गयी थी। उम्भा पहुँचते ही श्रीमती वाड्रा गाँव की महिलाओं से पूरे अपनेपन के साथ घुल मिल गयीं, उनका हालचाल पूछा, बच्चों लड़कियों को सहलाती पुचकारती रहीं, यही नहीं उन्होंने पिछली बार की यात्रा के दौरान बीएचयू ट्रामा सेंटर में घायलों से मिलने के क्रम में मिली गाँव की महिला को तुरन्त पहचान लिया और उसके साथ के घायल परिजन का हालचाल जाना। प्रियंका वहाँ बैठी कई सौ महिलाओं के साथ डेढ़ घण्टे जमकर पाल्थी मार कर बैठी रहीं और पूर्ण मनोयोग और अपनेपन के साथ उनका दु:ख दर्द साझा किया। उनको पारिवारिक और आत्मीय अहसास दिया। उसके बाद गाँव की कुछ महिलाओं लड़कियों को अपनी गाड़ी में साथ बैठा कर गाँव से तीन किलोमीटर दूर घटनास्थल पर गयीं और बारीकी से मौक़ा मुआयना किया। मौक़े से वापसी में गाँव के कई पीडितों के घरों में भी गयीं और वहाँ उपस्थित बुजुर्गों महिलाओं बच्चों के साथ घुलींमिली दुख दर्द साझा किया। रास्ते में जगह जगह रुककर श्रीमती वाड्रा पत्रकारों से भी रूबरू हुईं और उनके सवालों का जवाब भी दिया। उन्होंने गाँव के पीडितों के साथ पूरी तरह से डटी रहने का वादा दुहराया और शासन प्रशासन द्वारा गाँव वालों को अभी भी प्रताड़ति करते रहने का आरोप लगाया। पीडितों समेत सभी भूमिहीनो, अन्य आवश्यक शिक्षा स्वास्थ्य सहित सभी सुविधाएँ शीघ्रतिशीघ्र देने की माँग की और मिलने तक गाँव वालों के साथ डट कर खड़े रहने का वादा किया। गौरतलब है कि पिछली 17 जुलाई को विवाद में सोनभद्र के घोरावल थाना अंतर्गत ग्राम उभ्भा में हुए गोलीकांड में गोंड जाति के दस लोगों की मौत हो गयी थी जबकि 28 लोग घायल हो गए थे। पीडितों से मिलने के लिए प्रियंका 19 जुलाई को सोनभद्र आकर घटनास्थल पर जाना चाहती थीं, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें मिर्जापुर जिले के नारायणपुर में रोक लिया गया जहाँ पर प्रियंका गांधी सड़क पर ही अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गयीं और उभ्भा जाने की बात पर अड़ गयीं। प्रशासन सोनभद्र में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए उनसे वहीं से वापस लौट जाने का निवेदन करता रहा तथा बाद में उन्हें चुनार स्थित अतिथिगृह ले जाया गया, जहाँ वो पीडितों से बिना मिले किसी भी हालत में वापस जाने को राज़ी नहीं हुईं वहीं उन्हें रात्रि विश्राम भी करना पड़ा। दूसरे दिन 2० जुलाई को उभ्भा से 7० किलोमीटर दूर पैदल चलकर पहुँची गोंड़ समाज की आदिवासी महिलाओं ने चुनार अतिथिगृह में ही उनसे मुलाक़ात की तब ग्रामीणों से इस वायदे के साथ कि शीघ्र ही सोनभद्र आकर उनसे मिलेंगी और उनके दुखदर्द बाँटेंगी वो वापस लौटीं। प्रियंका ने वहीं पर ग्रामीणों से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दस लाख की सहायता राशि भेजने का वायदा किया था और वायदे के अनुसार उन्होंने कांग्रेस सचिव बाजीराव खड़े को 27 जुलाई को उम्भा भेजकर प्रत्येक मृतक के परिजनों को दस लाख और प्रत्येक घायल को एक लाख की सहायता राशि का चेक भी भेजवा चुकी हैं। प्रियंका के उम्भा गाँव के दौरे को योगी सरकार को क़ानून व्यवस्था के मोर्चे पर असफल साबित करने का प्रयास और कांग्रेस की आक्रामक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह भी चर्चा है कि क्या उभ्भा गाँव उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का पुन: प्रवेश द्वार बन सकता है। यूं भी सोनभद्र प्रदेश की सीमा पर स्थित है। कम से कम इतना तो पक्का है कि उम्भा गाँव के मामले में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टियाँ सपा और बसपा कांग्रेस से काफ़ी पीछे रह गयीं हैं। उधर, भाजपा ने कांग्रेस नेता के इस दौरे को राजनीति से प्रेरित बताया है। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सोनभद्र में हालात बिल्कुल सामान्य है। पीडितों को सरकार की तरफ से यथासंभव मदद मुहैया करायी जा चुकी है और उन्हे न्याय दिलाने के लिये सरकार ने विभिन्न घोषणायें की है। पीडितों के परिजन सरकार के रवैये से बिल्कुल संतुष्ट भी है और वे इसका इजहार भी कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस महासचिव का सोनभद्र दौरा सिर्फ राजनीति करने का जरिया मात्र रह जाता है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि सोनभद्र में अब तक पीडित परिवारों को उनका हक नहीं मिल सका है। श्रीमती वाड्रा एक बार फिर इन पीडित परिवारों से मिलकर सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाएंगी।

Share it
Top