चिटफंड घोटाला: सीबीआई की पूछताछ से तनाव में आईपीएस राजीव कुमार

चिटफंड घोटाला: सीबीआई की पूछताछ से तनाव में आईपीएस राजीव कुमार



कोलकाता। अरबों रुपये के चिटफंड घोटाला मामले में कथित तौर पर साक्ष्यों को मिटाने को लेकर कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से लगातार 5 दिनों से पूछताछ चल रही है। इस सिलसिले में गत 9 फरवरी से शिलांग की सीबीआई दफ्तर में शुरू हुई पूछताछ मंगलवार रात 9:45 बजे तक जारी थी और बुधवार को भी होगी। बुधवार सुबह 10:45 बजे के करीब कुमार को सीबीआई दफ्तर में हाजिर होने को कह दिया गया है| उसके बाद एक बार फिर पूछताछ का सिलसिला आगे बढ़ेगा। इस बीच मंगलवार रात सीबीआई दफ्तर से बाहर निकलते हुए राजीव कुमार की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें उनके चेहरे पर तनाव को साफ देखा जा सकता है। कुमार कोलकाता पुलिस के उन अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिनके चेहरे पर हमेशा ही मुस्कान देखी गई है। सरकारी कार्यक्रमों से लेकर अन्य बैठकों में उनकी जितनी भी तस्वीरें सामने आती हैं उसमें उनके चेहरे पर मुस्कान और खुशी फैली रहती है। इस बीच सीबीआई दफ्तर से बाहर निकलते समय उनकी जो तस्वीर सामने आई है उसमें वह बेहद तनावग्रस्त और सोच में डूबे हुए दिख रहे हैं। दरअसल चिटफंड घोटाला मामले की जांच के लिए वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेष जांच दल (‍एसआईटी) का गठन किया था। राजीव कुमार उसके मुखिया थे और उन्होंने ही सारदा चिटफंड के मालिक सुदीप्त सेन और उनकी महिला सहयोगी देवजानी को कश्मीर के सोनमार्ग से जम्मू कश्मीर पुलिस की हिरासत से अपने सुरक्षा घेरे में लिया था।

आरोप है कि सुदीप्त और देवयानी के पास से बरामद किए गए गए कई सारे साक्ष्यों को या तो मिटा दिया गया है या उनके साथ छेड़छाड़ की गई है। दोनों के पास से पांच मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और फोन रिकॉर्ड बरामद हुए थे जिसमें कथित तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल के उन तमाम नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ साक्ष्य थे जिन्होंने सारदा समूह से समय-समय पर करोड़ों रुपये लिए थे। इसके अलावा चिटफंड कंपनी के मिडलैंड पार्क स्थित मुख्यालय से एसआईटी ने एक लाल डायरी बरामद की थी जिसमें उन सभी नेताओं के नाम लिखे गए थे जिन्होंने सारदा समूह से रुपये लिए थे। कब, किसने, कितने रुपये लिए, इस बारे में भी विस्तार से जिक्र था।

आरोप है कि 2014 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सारदा मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई, तब कोलकाता पुलिस की एसआईटी ने लाल डायरी जांच एजेंसी को दी ही नहीं और बाकी जो दस्तावेज और साक्ष्य मुहैया कराए उसमें से अधिकतर से छेड़छाड़ की गई है जिसकी वजह से मामले में संलिप्त नेताओं के खिलाफ साक्ष्य मिट गए हैं। इसी मामले में राजीव कुमार से लगातार पूछताछ चल रही है। 10 और 11 फरवरी को उन्हें तृणमूल के निलंबित राज्यसभा सांसद कुणाल घोष के साथ बैठाकर पूछताछ की गई थी। घोष 12 फरवरी मंगलवार को कोलकाता लौटे हैं और यहां लौटते ही उन्होंने राजीव कुमार पर बड़ा आरोप लगाया है। कुणाल घोष ने दावा किया है कि राजीव कुमार सीबीआई पूछताछ के बीच बाहर निकल कर एसआईटी अधिकारियों को फोन कर रहे हैं और मामले में संलिप्त लोगों को भी सीबीआई कार्रवाई से संबंधित संभावित पूछताछ की जानकारी दे रहे हैं। यानी इस सिलसिले में चल रही पूछताछ के बीच भी राजीव कुमार जांच को प्रभावित करने की कोशिश में जुटे हैं।

गौर हो कि गत 3 फरवरी को सीबीआई की एक 20 से 25 सदस्यीय टीम कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के घर जा पहुंची थी लेकिन उन्हें कुमार के घर में नहीं घुसने दिया गया और कोलकाता पुलिस के अधिकारियों ने कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए हिरासत में ले लिया था। उसके बाद दूसरे दिन यानी 4 फरवरी सोमवार को जांच एजेंसी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा कर तत्काल सुनवाई की मांग की गई लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस पर सुनवाई की और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने निर्देश दिया कि सीबीआई के बुलावे पर राजीव कुमार को शिलांग स्थित दफ्तर में पूछताछ के लिए जाना पड़ेगा। इसके साथ ही न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया था कि कुमार को पूछताछ में विश्वसनीय तरीके से सहयोग भी करना होगा। उनके साथ किसी भी तरह की सख्ती नहीं बरतने अथवा गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश भी न्यायालय ने सीबीआई को दिया है। इसी के अनुसार सीबीआई ने उन्हें शिलांग दफ्तर में गत 9 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। उस दिन से लेकर आज तक लगातार उनसे पूछताछ हो रही है। पहले दिन उनसे 10 घंटे पूछताछ हुई थी। दूसरे दिन 12 घंटे, तीसरे दिन 10 घंटे और चौथे दिन यानी मंगलवार को भी 11 घंटे तक लगातार पूछताछ चली है।

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