कोलकाता पुलिस का झूठ उजागर, राजीव कुमार से पूछताछ पर हाईकोर्ट ने नहीं दिया था स्थगन आदेश

कोलकाता पुलिस का झूठ उजागर, राजीव कुमार से पूछताछ पर हाईकोर्ट ने नहीं दिया था स्थगन आदेश


कोलकाता। अरबों रुपये के सारदा और रोज वैली चिटफंड मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को लेकर कोलकाता पुलिस द्वारा बोला गया सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश मंगलवार को हुआ है। रविवार को जिस दिन सीबीआई की टीम ने कुमार के घर पूछताछ करने के लिए छापेमारी की योजना बनाई थी उस दिन पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने किसी भी तरह की पूछताछ पर 13 फरवरी तक के लिए स्थगनादेश लगाया है लेकिन मंगलवार की सुबह पता चला है कि स्थगन आदेश राजीव कुमार से पूछताछ पर नहीं बल्कि 3 अन्य आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ पर लगाया गया है। दरअसल सोमवार को जब कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति शिव कांत प्रसाद की अदालत में राज्य सरकार की ओर से याचिका लगा कर सीबीआई कार्रवाई के खिलाफ सुनवाई की मांग की गई तब न्यायालय ने प्राथमिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। खास बात यह है कि सुनवाई के दौरान मीडिया को अंदर नहीं रहने दिया गया था| इसलिए क्या बातचीत हुई थी, इसका खुलासा नहीं हो सका था| लेकिन मंगलवार की सुबह पता चला है कि न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया था कि 13 फरवरी तक लगा हुआ स्थगन आदेश राजीव कुमार के लिए था ही नहीं।

30 नवम्बर को सीबीआई ने सारदा मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सदस्य रहे आईपीएस अर्नव घोष, दिलीप हाजरा, शंकर भट्टाचार्य से पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। न्यायालय ने इन तीनों से पूछताछ पर रोक लगाई थी। सोमवार को जब राज्य सरकार की ओर से याचिका लगाकर राजीव कुमार के बारे में जिक्र किया गया था तब न्यायालय ने राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्त को जमकर फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति ने साफ किया था कि स्थगनादेश का लाभ केवल तीन अधिकारियों के लिए था। इसे राजीव कुमार के लिए राज्य सरकार कैसे इस्तेमाल कर रही है? इसका जवाब देना होगा। अब मंगलवार यानी आज सुनवाई होनी है तो निश्चित तौर पर माना जा रहा है कि कोलकाता पुलिस की मुश्किलें बढ़ेंगी। उल्लेखनीय है कि रविवार की शाम सीबीआई की टीम कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित राजीव कुमार के आवास पर पूछताछ के लिए गई थी लेकिन कुमार की आवास की सुरक्षा में तैनात डीसी साउथ मिराज खालिद और अन्य पुलिस अधिकारियों ने सीबीआई अधिकारियों का कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए हिरासत में ले लिया था। पुलिस की ओर से सफाई दी गई थी कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राजीव कुमार से पूछताछ पर रोक लगाई है। अब पता चला है कि ऐसी कोई रोक राजीव कुमार के लिए थी ही नहीं।

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