विपक्षी दलों की मांग को किया पूरी तरह खारिज...मतपत्रों से चुनाव कराना संभव नहीं: चुनाव आयोग

विपक्षी दलों की मांग को किया पूरी तरह खारिज...मतपत्रों से चुनाव कराना संभव नहीं: चुनाव आयोग

नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक किये जाने के दावे से उठे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश में मतपत्रों से चुनाव कराने की व्यवस्था फिर से लागू नहीं की जा सकती। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव को समावेशी बनाने और सभी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर कहा कि ईवीएम से चुनाव कराना पूरी तरह सुरक्षित है, इसलिए देश में मतपत्रों द्वारा मतदान की व्यवस्था फिर से लागू नहीं की जा सकती। श्री अरोड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग ईवीएम के मुद्दे पर सभी तरह की प्रतिक्रियाओं का स्वागत करता है, विशेषकर राजनीतिक दलों की राय का, लेकिन वह किसी भी तरह के बाहरी दबाव और धमकियों की परवाह नहीं करता और मतपत्र व्यवस्था को फिर से लागू करने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि हमने ईवीएम वीवीपैट में हर तरह की सुरक्षा की व्यवस्था की है और प्रशासनिक रूप से इसको पारदर्शी बनाया है। उन्होंने कहा कि मतपत्रों से जब मतदान होते थे, तब हमें काफी शिकायतें मिलती थी और बूथ कब्जा करने की घटनाएं होती थी, जिससे बाहुबली और असामाजिक तत्व अंजाम देते थे और इसके अलावा चुनाव के नतीजे आने में तीन से चार दिन लग जाते थे। इन समस्याओं को दूर करने के लिए ईवीएम व्यवस्था लागू की गई है और पिछले दो दशकों से कारगर ढंग कार्य कर रही है। उन्होंंने यह भी कहा कि 2०14 लोकसभा के चुनाव के बाद कई चुनाव हुए और सभी के नतीजे अलग अलग आये। पिछले पांच राज्यों के चुनाव में एक लाख 76 हजार मतदान बूथ बनाए गये, जिनमें ईवीएम का इस्तेमाल हुआ, लेकिन केवल छह स्थानों पर ही थोड़ी गडबडियां पायी गई और वह भी उन मशीनों में गडबड़ी पाई गई, जो रिजर्व में रखी गयी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत मामूली गड़बडिय़ां है। बावजूद इसके इन मामलों में कड़ी कार्रवाई की गई और चुनाव आयोग मतदान के दौरान किसी भी तरह की गडबडिय़ों को बर्दाश्त नहीं करता है। उन्होंने कहा कि ईवीएम के मुद्दे को जानबूझकर मुद्दा बनाया जा रहा है और निहित स्वार्थों से विवाद पैदा किये जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक सरकार की वैद्यता के लिए निष्पक्ष पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से चुनाव संपन्न हो एवं इसे समावेशी बनाया जाए और सभी तरह के लोगों की आवाजों को इसमें शामिल किया जाए और सभी तरह के मतदाताओं को इसमें शामिल किया जाए। चुनाव आयुक्त अशोक लावसा ने कहा कि चुनाव आयोग ने मुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र को मजबूत बनाने में पारदर्शी भूमिका निभाई है। इनता ही नहीं दुनिया के चुनाव प्रबंधन में सहयोग किया है और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को तकनीकी सहायता भी दी है और विदेशों में अपने पर्यवेक्षक भी भेजे हैं। गौरतलब है कि लंदन में पिछले दिनों भारतीय मूल के सैय्यद सूजा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खुलासा किया कि वह ईवीएम को हैक कर सकता है और उसने दावा किया कि 2०14 के लोकसभा चुनाव में भी उसने ईवीएम की हैकिंग की थी। सूजा के इस दावे से देश में विवाद खड़ा हो गया और कई विपक्षी दलों ने मतपत्रों द्वारा मतदान कराए जाने की एक बार फिर जोरदार ढग़ से मांग की है। चुनाव आयोग ने उसी दिन सूजा के दावे का खंडन करते हुए कहा था कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है और उसे हैक नहीं किया जा सकता। इसलिए उसे हैक करने का दावा करना बेबुनियाद और निराधार है। आयोग ने सूजा के खिलाफ एक मामला पुलिस में दर्ज कराया है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में रूस, बंगलादेश, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, कजाकिस्तान आदि जैसे कई देश और अतंरराष्ट्रीय संगठन भाग ले रहे हैं।

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