सबरीमाला फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सबरीमाला फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार


नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन पर 30 जनवरी से पहले सुनवाई नहीं हो सकेगी। आज जब इस मामले में एक वकील ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष इस मामले की सुनवाई तारीख तय किए जाने की मांग तो चीफ जस्टिस ने बताया कि बेंच की सदस्य जस्टिस इंदू मल्होत्रा 30 जनवरी तक मेडिकल लीव पर हैं, इसलिए 30 जनवरी तक सुनवाई नहीं हो सकती।

28 सितंबर,2018 को सुप्रीम कोर्ट ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के साथ काफी समय से भेदभाव होता रहा है। महिला पुरुष से कमतर नहीं है। एक तरफ हम महिलाओं को देवी स्वरूप मानते हैं, दूसरी तरफ हम उनसे भेदभाव करते हैं। कोर्ट ने कहा था कि बायोलॉजिकल और फिजियोलॉजिकल वजहों से महिलाओं के धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया जा सकता। तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा समेत चार जजों ने कहा था कि ये संविधान की धारा-25 के तहत मिले अधिकारों के विरुद्ध है।

जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बाकी चार जजों के फैसले से अलग फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक आस्था के मामले में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पूजा में कोर्ट का दखल ठीक नहीं है। मंदिर ही यह तय करे कि पूजा का तरीका क्या होगा। मंदिर के अधिकार का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि धार्मिक प्रथाओं को समानता के अधिकार के आधार पर पूरी तरह से परखा नहीं जा सकता है। यह पूजा करने वालों पर निर्भर करता है न कि कोर्ट यह तय करे कि किसी के धर्म की प्रक्रिया क्या होगी। जस्टिस मल्होत्रा ने कहा था कि इस फैसले का असर दूसरे मंदिरों पर भी पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई है। इन पर 22 जनवरी को सुनवाई नियत की गई थी लेकिन उस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच के सदस्य जस्टिस इंदू मल्होत्रा मेडिकल लीव पर हैं।

पिछले 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को निर्देश दिया था कि वो सबरीमाला मंदिर में पिछले 2 जनवरी को प्रवेश करने वाली दो महिलाओं को पूरी सुरक्षा प्रदान करें। इन दो महिलाओं ने अपनी सुरक्षा की मांग की थी। सुनवाई के दौरान केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोर्ट के फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की 51 महिलाएं अब तक प्रवेश कर चुकी हैं।

याचिका कनक दुर्गा और बिंदु अम्मानि ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उनके मंदिर में प्रवेश करने के बाद हिंसा का दौर शुरू हो गया था। इसकी वजह से दोनों महिलाएं छिपकर रह रही थीं। कनक दुर्गा की पिछले 14 जनवरी को उसकी सास ने पिटाई की थी।

शिवराज ने पूछा- क्या म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ में चुनाव बिना ईवीएम के हुए?

भोपाल। ईवीएम हैकिंग को लेकर पक्ष और विपक्ष गुत्थमगुत्था हो रहे हैं। कांग्रेस ने एक अमेरिकी सायबर एक्सपर्ट के हवाले से कहा था कि मोदी लहर का राज ईवीएम हैकिंग ही है। वहीं इसका जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कांग्रेस से सवाल किया है कि क्या मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव बिना ईवीएम के हुए थे, जिसके कारण वहां कांग्रेस की सरकारें बन गईं।

एक अमेरिकी सायबर एक्सपर्ट के हवाले से प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार रात को ट्विटर के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आम आदमी पार्टी पर ईवीएम हैकिंग के आरोप लगाए थे। प्रदेश कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था- मोदी जी ईवीएम हैक करके पीएम बने..? अमेरिकी एक्सपर्ट के दावे--2014 में भाजपा ने ईवीएम हैक कराई-गोपीनाथ मुंडे ने हैकिंग के लिये संपर्क किया-2015 में 'आप' ने भी हैकिंग कराई-महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात में भी धाँधली-ट्रांसमीटर के ज़रिये ईवीएम हैक हुई, तो ये है मोदी लहर का राज?

भारतीय जनता पार्टी के खेमे से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी ट्विटर के जरिए इसका जवाब दिया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कांग्रेसियों को समझाने का आग्रह करते हुए लिखा है- तो क्या राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आपकी जो सरकारें बनी हैं, वो बिना ई॰वी॰एम॰ के चुनाव होने से बनी हैं? राहुल जी, आप तो समझदार हैं, समझाइए अपने नेताओं को...।

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