मुठभेड़ मामले में उप्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

मुठभेड़ मामले में उप्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस



नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में हाल के महीनों में हुई मुठभेड़ की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराये जाने संबंधी जनहित याचिका पर राज्य सरकार को सोमवार को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की याचिका में उठाये गये मुद्दों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि वह इस मामले को विस्तार से सुनेगी। न्यायालय ने याचिका में उठाये गये बिंदुओं को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए 12 फरवरी को सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर की।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि मुठभेड़ के सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। राज्य सरकार ने इस मामले में पूर्व में अपने जवाब में कहा था कि याचिकाकर्ता ने बहुत सावधानी से उन्हीं मुठभेड़ों का हवाला दिया है, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मारे गये हैं। यह पूरी तरह से एकतरफा है, जबकि मुठभेड़ों में चार पुलिसकर्मी भी मारे गए है।

राज्य सरकार की दलील थी कि कोई भी कार्रवाई धर्म देखकर नहीं किया जाता है, बल्कि कानून से भाग रहे अपराधियों के खिलाफ कानून के अनुसार की जाती है। पुलिस ने यह कार्रवाई भी आत्मरक्षा में की है, जब उन पर घातक हथियारों से हमले किये गये।

राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि यह मामला उत्तर प्रदेश तक सीमित है इसलिए मामले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भेजा जाना चाहिए था, लेकिन शीर्ष अदालत ने मामले को उच्च न्यायालय भेजने से इन्कार कर दिया।


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