शिवसेना को पटकनेवाला आज तक पैदा ही नहीं हुआ हैः उद्धव ठाकरे

शिवसेना को पटकनेवाला आज तक पैदा ही नहीं हुआ हैः उद्धव ठाकरे



मुंबई। शिवसेना को पटकनेवाला आज तक इस दुनिया में पैदा ही नहीं हुआ है। मराठा माणुस धमकी देनेवालों का मुंहतोड़ जवाब देना जानता है। कमजोर लहरों को शिवसैनिक भांप लेता है और उस लहर को आसानी से खत्म भी कर देता है। शिवसेना के खात्मे की बात करनेवाले खुद ही नष्ट हो जाते हैं। ऐसी तीखी टप्पणी करते हुए शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को एक बार फिर भाजपा के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाए। शिवसेना की ओर से स्थानीय लोकाधिकार समिति के अधिवेशन के दौरान ठाकरे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार की नाकामी पर भी जमकर टिप्पणी की। ठाकरे ने शाह का नाम लिए बिना ही कहा कि शिवसैनिक मनबढ़ों को सबक सिखाना जानते हैं।

रविवार को मुंबई में आयोजित स्थानीय लोकाधिकार समिति के अधिवेशन में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर टिप्पणी की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की जनविकास मोर्चे पर असफल होने पर आलोचना की। उन्होंने भाजपा पर हमला तेज करते हुए कहा कि सरकारों को जनता के साथ धोखाधड़ी नहीं करनी चाहिए। कोरी बयानबाजी और हवाई घोषणाबाजी के मृगजाल में जनता को भरमाने का खेल बंद कर देना चाहिए। जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करना घातक सिद्ध होगा। जनता ने कई घमंडी सत्ताधारियों को सबक सिखाया है। जनता की नाराजगी से बड़े-बड़े लोगों का सिंहासन डोल चुका है। आगामी चुनावों में भी जनता मनबढ़ लोगों को सबक सिखा कर रहेगी।

स्थानीय लोकाधिकार समिति के अधिवेशन में मौजूद शिवसेना प्रमुख ने कहा कि पिछले सप्ताह कर्ज माफी के लिए एक किसान उनकी सभा में आया था। उसी समय शिवसेना ने सरकार को कर्जमाफी देने की अपील की थी। शिवसेना की धमकी से ही केवल पांच घंटे के भीतर ही उस किसान की कर्ज माफी का प्रस्ताव पारित हो गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि युती हुई, तो किसकी सीटें बढ़ेगी, किसको लाभ होगा या मतदान का प्रतिशत कितने प्रतिशत बढ़ेगा, इससे वह इत्तेफाक नहीं रखते। वह तो इतना ही जानते हैं कि मजबूत सरकार से ही देश का विकास होगा। देश की कितनी तरक्की होगी, कितनी जीडीपी बढ़ेगी, इस पर ही उनका फोकस रहता है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि शिवसेना को हल्के में लेने की भूल नहीं करना चाहिए। ठाकरे सिनेमा के जरिए शिवसेना ने अपनी कार्य शैली के बारे में बता दिया है। शिवसेना ने ही मराठी माणुस की ताकत को पहचाना है, मराठियों को सम्मान दिलाया है।


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