राफेल मामले में सीबीआई पर अनिल अंबानी और दसाल्ट कम्पनी के मालिक के विरुद्ध जांच का दबाव

राफेल मामले में सीबीआई पर अनिल अंबानी और दसाल्ट कम्पनी के मालिक के विरुद्ध जांच का दबाव


नई दिल्ली। युद्धक विमान राफेल से जुड़े सौदे को लेकर देश में जहां एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी चरम पर है वहीं दूसरी तरफ इस मामले में रिलायंस डिफेंस और दसाल्ट कम्पनी के मालिकों के विरुद्ध सीबीआई जांच का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले में प्रधान मंत्री, रक्षा मंत्री, उद्योगपति अनिल अंबानी तथा फ्रांस की राफेल कम्पनी दसाल्ट के मालिक के विरुद्ध न सिर्फ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं बल्कि अनिल अम्बानी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया सौदा बताकर कुछ 'साक्ष्यों' के साथ सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को चार अक्टूबर, 2018 को लिखित शिकायत भी की है। प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने दबाव बनाने के लिए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से मिलकर यह शिकायती पत्र उन्हें दिया। राफेल सौदे को गंभीर बताते हुए उन्होंने सीबीआई प्रमुख से इसकी जांच कराने की मांग की।

अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सीबीआई प्रमुख से कहा कि इस मामले में प्रधान मंत्री और रक्षामंत्री के खिलाफ जांच के लिए तो उन्हें केंद्र सरकार की अनुमति लेनी पड़ेगी। इसमें आपको मुश्किल होगी लेकिन अनिल अंबानी और राफेल बनाने वाली कम्पनी दसाल्ट के मालिक पर केस चलाने और जांच करने के लिए सरकार से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। इसलिए इन दो से तो सीबीआई पूछताछ शुरू ही कर सकती है। अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सीबीआई प्रमुख से इन दोनों के विरुद्ध तत्काल जांच शुरू करने का आग्रह किया।

सूत्रों का कहना है कि इस दौरान अरुण शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा बीच – बीच में सीबीआई को रिमांइडर देते रहेंगे। तीसरे या चौथे माह में न्यायालय में मुकदमा दायर कर देंगे। इस तरह न्यायालय के मार्फत सरकार व सीबीआई पर दबाव डालकर इस मामले की जांच कराने की भी कोशिश करेंगे। उन दिनों में लोकसभा चुनाव प्रचार परवान चढ़ने लगेगा, जिसमें यह बड़ा मुद्दा बन जायेगा।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार डा. हरि देसाई का कहना है कि यदि राफेल सौदे में सब कुछ पाक – साफ हुआ है तब सरकार और उसके हुक्मरान को सभी दस्तावेज दिखाने में क्या हर्ज है?और जिस गोपनीयता के करार की बात की जा रही है उसकी आड़ लेकर बचा नहीं जा सकता।

इस बारे में कर्नल पट्टू का कहना है कि राफेल बनाने वाली दसाल्ट कम्पनी ने अपनी बैलेंशशीट में बहुत कुछ उजागर कर दिया है। राफेल में उन्नत तकनीक उतनी ही है,दसाल्ट कम्पनी ने अन्य देशों को राफेल आपूर्ति में दी है। इसलिए किस गोपनीयता की आड़ में सौदे का खुलासा नहीं किया जा रहा है? इससे संदेह पैदा हो रहा है। इसे ही राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा बनायेंगे।


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