रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की पत्नियों ने उठाया महत्वपूर्ण कदम....अब ली जायेगी लावारिस बच्चों की सुध

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की पत्नियों ने उठाया महत्वपूर्ण कदम....अब ली जायेगी लावारिस बच्चों की सुध

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों के आसपास या ट्रेनों में कचरा बीनते, भीख माँगते, कभी-कभी चोरी आदि अपराधों में लिप्त फटेहाल एवं गंदी हालत में घूमते लावारिस बच्चों को बचाने के लिये रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की पत्नियों ने बीड़ा उठाया है और उनकी पहल पर देश के छह स्टेशनों पर अल्प प्रवास आश्रय / बाल सहायता केन्द्र स्थापित करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष की पत्नी की अध्यक्षता वाली रेलवे पत्नी कल्याण केन्द्रीय संगठन (आरडब्ल्यूडब्ल्यूसीओ) ने एक गैर सरकारी संगठन- प्रयास जेएसी के साथ मिलकर यह पहल की है और गत सप्ताह रेल मंत्रालय ने इस संबंध में दिल्ली, गुवाहाटी, दानापुर, समस्तीपुर, जयपुर और अहमदाबाद स्टेशनों पर करीब दो हजार वर्गफुट की जगह मुहैया कराने की सहमति दे दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशनों के आसपास या ट्रेनों में कचरा बीनते, भीख माँगते, कभी-कभी चोरी आदि अपराधों में लिप्त फटेहाल एवं गंदी हालत में घूमते छोटे बच्चों को बचाने के लिये आरडब्ल्यूडब्ल्यूसीओ ने यह पहल की है। रेल पत्नी कल्याण केन्द्रीय संगठन इसके लिए एनजीओ प्रयास के साथ एक करार पर हस्ताक्षर करेगा और इस बारे में राज्य सरकारों का भी सहयोग लिया जाएगा। अल्प प्रवास आश्रय/ बाल सहायता केन्द्रों को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) कानून 2०15 एवं उसकी नियमावली 2०16 के तहत लाइसेंस लेना होगा। इन केन्द्रों का संचालन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से किया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय ने रेलवे पत्नी कल्याण केन्द्रीय संगठन को सूचित किया है कि उसे इन छहों स्टेशनों पर दो-दो हजार वर्गफुट जमीन अल्प प्रवास आश्रय तथा 36 वर्गफुट की जगह बाल सहायता केन्द्र के लिए मुहैया करायी जाएगी। यह आवंटन आरंभ में केवल पांच साल के लिए होगा, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकेगा। सूत्रों के अनुसार इसमें करीब एक हजार वर्ग फुट में 25 बच्चों के लिए बिस्तर होंगे तथा दो शौचालय एवं दो स्नानगृह होंगे। केन्द्र प्रभारी का कक्ष, बच्चों का परामर्श कक्ष एवं कार्यालय कक्ष के अलावा भंडारगृह भी होगा। सूत्रों के अनुसार इन बच्चों को बाद में बाल संरक्षण गृह में भेजा जा सकेगा। ये केन्द्र समस्त प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने एवं लाइसेंस इत्यादि लेने के बाद ही परिचालित होंगे।

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