मुजफ्फरपुर गृह मामले की जाँच अब सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर की देखरेख में हो : हाई कोर्ट


पटना। बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले की जाँच कर रहे सीबीआइ की कार्य शैली पर पटना कोर्ट ने आज नाराजगी व्यक्त की.कोर्ट ने सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर को स्वयं अपनी देख रेख में इस महत्वपूर्ण मामले की जांच तेजी से कराने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने स्पेशल डायरेक्टर को इस बात की भी छूट दी है कि वे चाहें तो इस मामले की जांच के लिए एसआई टी का गठन कर सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध मे दायर तीन अलग अलग लोकहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. अदालत ने सी बी आई के एस पी जे पी मिश्रा को अचानक जांच के दौरान हटाये जाने पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने श्री मिश्रा के स्थानांतरण को लेकर सीबीआई द्वारा स्पष्ट जबाब नही देने पर नाराजगी जताते हुए इस मामले की जांच की पूरी जिम्मेवारी स्पेशल डायरेक्टर को सौप दी है.डीआईजी द्वारा सौपें गयी आधी अधूरी जांच रिपोर्ट को भी कोर्ट ने संतोषजनक नही माना.साथ ही स्पेशल डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख 17 सितंबर को अदालती आदेश का पालन करते हुए जाँच की प्रगति का अद्यतन रिपोर्ट सील बन्द लिफाफे में दें .

एफ एस एल को निर्देश

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कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार के फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी को निर्देश दिया कि सीबीआई जो भी सामाग्री फॉरेंसिक जांच के लिए उसके पास भेजेगी उसकी जांच कर तुरंत सीबीआई को जांच रिपोर्ट सौंप देगी.

राज्य सरकार को निर्देश

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कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर को कहा कि वे अगली तारीख पर इस बात की जानकारी दें कि इस राज्य में कुल कितने शेल्टर होम है और इसमें कितने शेल्टर होम का संचालन राज्य सरकार करती है और कितने का एनजीओ. कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम को अनुदान देने की प्रक्रिया क्या है.और इसके ऑडिट की क्या व्यवस्था है.

कोर्ट ने हाई कोर्ट की महिला अधिवक्ता प्राकृतिका शर्मा को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए यह जिम्मेवारी सौंपी है कि वह जाकर पीड़िताओं से मिले और उनसे जानकारी प्राप्त कर अगली तारीख पर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौपे.

इसके लिए कोर्ट ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार को हर प्रकार की सुविधा प्राकृतिका को उपलब्ध कराने को कहा है ताकि पीड़िताओं से मिलने में उन्हेंं किसी प्रकार की परेशानी नही हो.


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