वाजपेयी के बिना बाहर से फौलादी पर अन्दर से खाली किला लग रहे भाजपा व संघ

वाजपेयी के बिना बाहर से फौलादी पर अन्दर से खाली किला लग रहे भाजपा व संघ


कृष्णमोहन सिंह

नई दिल्ली । वैसे तो किसी के जीवन, मरण पर किसी का वश नहीं है, ना ही कोई रोक सकता है। वशिष्ठ मुनि जी भगवान राम के वनवास और राजा दशरथ की मृत्यु पर शोकाकुल भरत को समझाते हैं। इसको महाकवि तुलसीदास जी ने एक चौपाई में लिखा है -

'सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहे हुँ मुनिनाथ। हानि, लाभ,जीवन, मरण, यश, अपयश विधि हाथ।'

सब कुछ विधि के हाथ है, फिर भी इस माह अगस्त 2018 में, अब तक देश के 03 महान राजनीतिक विभूतियों- तमिलनाडु के 05 बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि, वामपंथी नेता व लोकसभा अध्यक्ष रहे सोमनाथ चटर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, के चले जाने से भारत का राजनीतिक क्षितिज खाली - खाली लगने लगा है। हालांकि ये तीनों विभूतियां अपना पूरा जीवन जीकर गई हैं । लेकिन इन्होंने अपने कर्मों से भारत की करोड़ो-करोड़ जनता को, भारत के इतिहास को, भारत के भविष्य को जो दिया है, उसे ना तो नकारा जा सकता है, ना ही भुलाया जा सकता है। भले ही आप इनसे सहमत हों या नहीं। अथवा आपका इनसे वैचारिक मतभेद हो सकता है , लेकिन आप इनको नकार नहीं सकते।

इनमें से जहां तक विराट व्यक्तित्व अटल बिहारी वाजपेयी का सवाल है, तो बहुतों को तो अचरज इस बात को लेकर हो रहा है कि वाजपेयी पर बेहतरीन लेख , बेहतरीन श्रद्धांजलि लिखने वाले वे लोग हैं जो भाजपा व संघ के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। चाहे वे राजनीतिक विरोधी हों या वैचारिक विरोधी हों या तटस्थ लिखने वाले । उनको ऐसा मानने वाले और कोई नहीं भाजपा व संघ के लोग हैं। ऐसा क्या था वाजपेयी के व्यक्तित्व में , क्या था उनके व्यवहार में , क्या था उनके सरोकार में ? इसका जवाब गैर भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं , तटस्थ टिप्पणीकारों से लगायत देशी-विदेशी विद्वानों के इस कहे में है जो "गलत पार्टी में सही आदमी" शीर्षक से प्रसिद्ध हो गया। जिसे अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने 13 दिन की सरकार में ,अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए विपक्षी मित्रों द्वारा मुझ पर लगाया जा रहा आरोप कहा था। उन्होंने हंसते हुए कहा था कि हमारे विपक्षी मित्र कहते हैं कि वाजपेयी "गलत पार्टी में सही आदमी" हैं। जिस पर लोक सभा में जोरदार ठहाका लगा था। ठहाका लगाने वाले पक्ष व विपक्ष दोनों के ही दिग्गज व सांसद थे। यह थी वाजपेयी की "सेकुलर" छवि। यह छवि आज तक भाजपा के किसी भी नेता की नहीं बन पाई है। भारत की राजनीति में वाजपेयी की अकेले यह छवि ही उनको टावरिंग परसनालिटी बनाने में सक्षम रही है। उनकी अन्य विशेषताएं इसमें चार चांद लगाती गईं हैं।

वाजपेयी, आडवाणी, डा. जोशी, देवरस जी, रज्जू भैय्या, सुदर्शन जी, मदनदास देवी से लगायत नरेन्द्र मोदी व अमित शाह तक को अच्छी तरह जानने , समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर व्यास बिना लाग-लपेट कह और लिख रहे हैं कि वाजपेयी कितने महान थे , यह अहसास आज मोदी सरकार के अनुभव से है। वाजपेयी के लिए भारत आज इसलिए भी भाव विह्वल हैं क्योंकि मोदी सरकार के अनुभव से हताश ....यह सोचने को मजबूर हैं कि कहां वाजपेयी का नेतृत्व ,कहां मोदी का नेतृत्व! ..वाजपेयी की लीडरशीप का मूल्यांकन इस कसौटी में होना है कि जिस विचारधारा ने भारत में हिन्दू राजनीतिक दर्शन के बीज डाले, उसमें उनका नेतृत्व कैसा बेजोड़ था? नेतृत्व की छाप क्या थी ? उस नाते आज के परिपेक्ष्य में उनकी विरासत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। और कैसा त्रासद मामला है कि इसी बात पर वाजपेयी बनाम मोदी का जो फर्क कंट्रास्ट दिखा है, उसी में यह भाव चौतरफा है कि नेता हो तो वाजपेयी जैसा!

मुंबई और गुजरात के सभी पुराने व नये संघ व भाजपा नेताओं से घनिष्ठता रखने वाले, सबको अन्दर – बाहर अच्छी तरह जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार डा. हरि देसाई का कहना है कि बहुतों को अचरज है कि गोविन्दाचार्य तक ने वाजपेयी की प्रशंसा में लिखा है। प्रताप भानू मेहता ,विनय सीतापति, संजय बारू, स्वामीनाथन एस.ए.अय्यर, नीरजा चौधरी ने भी वाजपेयी की तारीफ में भावुक मन से लिखे हैं। यह तभी हो सकता है जब जिसके बारे में लिखा जा रहा है उसका जीवन दर्शन बृहद समाज के हित वाला , समावेशी रहा हो । समरसता वाले गैर अहंकारी भारतीय जीवन दर्शन वाला हो। झूठ-फरेब वाला मायावी व अहं वाला नहीं हो । उनका कहना है कि

वाजपेयी के प्रति श्रद्दांजलि लिखने में ,अपने मन की बात को, भावनाओं को शब्दों में पिरोने में भी विपक्षी व विरोधी ही आगे रहे हैं। चाहे वह सोनिया गांधी, गुलाम नबी आजाद , शशि थरूर हों या वामपंथी नेता । यही है उस वाजपेयी की ताकत, थाती। यह वही ताकत है जिसने आडवाणी को कहा था कि आप एक बात का ध्यान रखियेगा , आप अयोध्या जा रहे हैं, लंका नहीं। यह वही ताकत है जिसने गुजरात दंगे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को राजधर्म का पालन करने की हिदायत दी थी। भाजपा और उसकी जननी संघ आज उस विराट व्यक्तित्व व ताकत के बिना बाहर से फौलाद की तरह ताकतवर तो दिख रहा है लेकिन अंदर से पूरी तरह खाली किला लग रहे भाजपा व संघ ।


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