अयोध्या केस- मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों : ओवैसी

अयोध्या केस- मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों : ओवैसी

नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत में अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद केस की सुनवाई पूरी हो गई है और अब इस मामले में फैसले का इंतजार है। अदालत के फैसले में अभी वक्त है लेकिन इस पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अब इसको लेकर बयान दिया है, उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराना कानून का मज़ाक था। एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, '..बाबरी मस्जिद के ताले खोले गए थे, तो कांग्रेसियों की सरकार थी। कौन था होम मिनिस्टर, जब मस्जिद शहीद हुई। मेरे भाई, ये आपको याद रखना है। अल्लाह से दुआ करो इस फैसले से इंसाफ को कायम करे'।

इसी के साथ ही एआईएमआईएम की ओर से जारी ट्वीट में लिखा गया कि असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों। बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था'। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच ने करीब 40 दिन इस मामले की रोजाना सुनवाई की और अब इस पर फैसला रिजर्व रख लिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले पर फैसला 17 नवंबर तक आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बुधवार को इस मसले पर अपने चेंबर में मीटिंग की और आगे की रणनीति पर बात की। वहीं, इस मामले में मध्यस्थता की चर्चा लगातार हो रही है। हाल ही में ऐसी खबर आई कि मुस्लिम पक्ष की ओर से इस मामले में मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा गया है और मध्यस्थता पैनल को इस बारे में बताया भी गया है, लेकिन बाद में वकील की ओर से इस बात को सिर्फ अफवाह बताया गया। वहीं हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया है कि वह किसी तरह के मध्यस्थता के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।

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