जीएसटी लेखा परीक्षण के तौर-तरीकोें पर विचार कर रहा है नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)

जीएसटी लेखा परीक्षण के तौर-तरीकोें पर विचार कर रहा है नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)

नयी दिल्ली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) राजीव महर्षि ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को आजादी के बाद का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार बताते हुये आज कहा कि उनका संगठन जीएसटी राजस्व का लेखा परीक्षण करने के तौर-तरीकों पर विचार कर रहा है। श्री महर्षि ने इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकांउटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के प्लेटिनम जुबिली समाराेह को संबोधित करते हुये कहा कि कैग राज्यों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को और केन्द्र से संबंधित रिपोर्ट संसद को सौंपता रहा है, लेकिन जीएसटी ऐसा कानून है जो राज्य और केन्द्र दोनों पर एक समान क्रियान्वित है। इसके तहत राजस्व संग्रह भी एक ही स्थान पर होता है। इसलिए, कैग को भी इस संबंध में विचार करना पड़ रहा है कि इसका लेखा परीक्षण किस तरीके से किया जाये। उन्होंने जीएसटी को उपभोक्ता और व्यापारियों के हित में बताया और कहा कि जीएसटी से जहाँ घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, वहीं भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। उन्होंने कहा कि जीएसटी का अनुपालन बहुत ही सरल है और इसमें आईसीएआई के सदस्यों की महती भूमिका है। श्री महर्षि ने सोशल मीडिया और प्रौद्योगिकी का उल्लेख करते हुये कहा कि इससे काम करने का पूरा तरीका बदल गया है। ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि इस पर देश में शोध और निवेश किये जाने की जरूरत है क्योंकि इस प्रौद्योगिकी में कोई व्यक्ति किसी डाटा में अपने स्तर पर बदलाव नहीं कर सकता। कंपनी मामलों के विभाग के सचिव के तौर पर उनके द्वारा आईसीएआई कानून में किये बदलावों का उल्लेख करते हुये श्री महर्षि ने कहा कि इसको लेकर इस संस्थान के सदस्यों ने बहुत आपत्ति जतायी थी, लेकिन जो बदलाव किये गये थे वे लंबे समय में लाभकारी होंगे। उन्हाेंने सत्यम घोटाला, पीएनबी घोटाला और आईआईएलएफएस घोटाले का उल्लेख करते हुये कहा कि इस तरह की घटनाओं से चार्टर्ड अकांउटेंटों की भूमिका पर सवाल उठते हैं। इस मौके पर आईसीएआई ने विदेशी निवेश काे बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंवेस्ट इंडिया के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किये।

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