'भविष्य का भारत-आरएसएस की दृष्टि' कार्यक्रम सोमवार से, संघ प्रमुख करेंगे सीधा संवाद

भविष्य का भारत-आरएसएस की दृष्टि कार्यक्रम सोमवार से, संघ प्रमुख करेंगे सीधा संवाद


नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बाहरी दुनिया से संवाद करने और विपरीत विचारधाराओं को अपने नजरिये से रूबरू कराने की पहल कर दी है। इसके तहत संघ प्रमुख मोहन भागवत सोमवार से लेकर बुधवार (17 सितम्बर से 19 सितम्बर) तक दिल्ली में विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त करेंगे और समय-समय पर आरएसएस और उसकी विचारधारा को लेकर उठने वाले सवालों के जवाब भी देंगे।

विज्ञान भवन में सोमवार से शुरू हो रहे 'भविष्य का भारत-आरएसएस की दृष्टि' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भविष्य के भारत की परिकल्पना और संघ की सोच पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में पहले दो दिन (17-18 सितम्बर की शाम) को तरकरीबन डेढ़-दो घंटे के सत्र में संघ प्रमुख अलग-अलग विषयों पर संघ के विचार प्रस्तुत करेंगे। वह इन दो दिनों में हर राष्ट्रीय महत्व से जुड़े विषयों पर आरएसएस की राय से रूबरू कराएंगे। कार्यक्रम के तीसरे और आखिरी दिन 19 सितम्बर को सवाल-जवाब का सत्र होगा, जिसमें वह श्रोताओं के हर उन सवालों का जवाब देंगे, जो गाहे-बगाहे संघ और उसकी विचारधारा को लेकर उठते हैं।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विभिन्न संगठनों और राजनैतिक दलों को निमंत्रण भेजा गया है। इस कार्यक्रम में हर रोज तकरीबन एक हजार लोग शामिल होंगे, जो सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, कला, सिनेमा और उद्योग समेत अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं। इस कार्यक्रम का मकसद संघ को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों में बने भ्रम को तोड़ना और राष्ट्र, राष्ट्रीयता, हिन्दू और हिन्दुत्व के विषय पर संघ के नजरिये से परिचित कराना है।

इसके पहले आरएसएस ने अपनी विचारधारा के विपरीत कांग्रेसी पृषठभूमि से आने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को गत जून माह में नागपुर में संपन्न शिक्षा वर्ग के समापन के अवसर पर आमंत्रित किया था। इस अवसर मुखर्जी ने संघ मुख्यालय में अपने विचार भी व्यक्त किए थे।

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