राष्ट्ररंग : पेट्रो पदार्थों की कीमतों ने तोड़ी कमर

राष्ट्ररंग : पेट्रो पदार्थों की कीमतों ने तोड़ी कमर

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अबतक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। बढ़ी कीमतों ने चारों ओर हाहाकार मचा दिया है। पेट्रो की कीमतें रोज नए रिकार्ड बना रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में इस समय पेट्रोल और डीजल का दाम अब तक के इतिहास में इतना महंगा कभी नहीं हुआ। बढ़ी कीमतों ने सबसे ज्यादा असर किसानों पर डाला है। फसलों की सिंचाई में महंगाई ने खलल डाल दिया है। कीमतों को बढ़ाने का नायाब तरीका डेढ़ साल पहले शुरू किया गया था। दरअसल उस वक्त भाव बढ़ाने की तरकीब को न जनता भांप पाई न ही तेल वितरण कंपनियां।
पेट्रो पदार्थों के दाम रोजाना लागू करने से सरकार का खूब फायदा हो रहा है। डायनामिक प्राइजिंग सिस्टम योजना की आड़ में उपभोक्ताओं की जेब काटनी शुरू हो गई है। योजना को लागू हुए करीब डेढ़ साल हो गया। इसी बीच पेट्रोल-डीजल में तकरीबन रोजाना बढ़ोत्तरी की जा रही है। नियम लागू से अभी तक पेट्रोल-डीजलों के दाम लगातर बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर कीमतें कम नहीं हुई बल्कि बढ़ी हैं। चुपके-चुपके कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। सिलसिला अगर यूं ही जारी रहा तो दिसंबर तक पेट्रोल सौ रूपए प्रति लिटर भी पार कर जाएगा। बढ़ोत्तरी की खबरें बाहर नहीं आने से मामला शांत है। पेट्रोलियम उत्पाद पर केंद्र सरकार की रोज मूल्य निर्धारण की व्यवस्था का असर कुछ ऐसा हो रहा है कि दाम भी लगाातर बढ़ रहे हैं और हो-हल्ला भी नहीं हो रहा है। पिछले दो माह के भीतर ही पेट्रोल की कीमत में 11 रुपये प्रति लिटर का इजाफा हुआ है और इस समय पेट्रोल की कीमत पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची है। पेट्रोल-डीजल के खुदरा बिक्री मूल्य यानी आरएसपी के रोजाना मूल्य की इस नई तरकीब का फायदा सरकार को प्रत्यक्ष रूप से हो रहा है।
तेल कंपनियां भी परेशान हैं। उनको भी कुछ समझ नहीं आ रहा। पिछले साल 16 जून से कीमतें घटने की बजाय लगातार बढ़ रही हैं। बढ़ी कीमतों की खबरें मीडिया में भी नहीं आ पा रही हैं। गौरतलब है कि 16 जून से केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पाद पर डायनामिक प्राइजिंग सिस्टम लागू करने की योजना को मंजूरी दी थी। योजना के शुरूआत में बताया गया था कि इससे विदेशी बाजार के हिसाब से ही भारत में कीमतें निर्धारित की जाएंगी पर वैसा कुछ नहीं किया गया। पेट्रोल-डीजल के मूल्य में महज कुछ पैसे की बढ़ोत्तरी होने पर जनता व विपक्षी पार्टियां हंगामा काटने लगती थी, उनको भनक तक नहीं हो रही। महज दो महीने पहले डीजल की कीमतों में 5.67 रुपये प्रति लिटर की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। नई कीमतों के तहत इस समय दिल्ली में डीजल 65.31 रुपये प्रति लिटर है, वहीं पेट्रोल 74.08 रुपये प्रति लिटर पर पहुंच गया है।
तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी की मानें तो कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय मार्केंट में तेलों की कीमतों पर नियंत्रण होने के बावजूद भारत में लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। इसको लेकर विपणन कंपनियां सरकार को शिकायतें भी कर रही हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही। इस क्षेत्र से जुड़े कई एक्सपर्ट भी हैरान-परेशान हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरने के बावजूद भी केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पादन शुल्क और अन्य करों को इतना क्यों बढ़ा दिया है। बढ़ी कीमतों की मार सिर्फ आम जनता पर पड़ रही है। खामोशी के साथ कट रही है लोगों की जेब। जब यह योजना लागू करने की बात कही जा रही थी, उस दौरान वादा किया गया था कि इसका फायदा सीधे जनता को होगा लेकिन वह सिर्फ छलावा मात्र था। अगर ऐसी सोच थी तो उसे निश्चित तौर पर जनविरोधी फैसला कहा जाएगा।
कुछ पंप मालिक कहते हैं कि नए दामों की खबरें किसी और को न देने की हिदायत दी जाती है। अजीब सा माहौल उत्पन्न हो गया है। डायनामिक प्राइजिंग के बहाने जो लूट मचाई गई है, उससे पेट्रोल-डीजल डीलर्स भी खासे नाराज हैं। उन्होंने शुरूआत में भी इस योजना का जमकर विरोध किया था लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनीं। डीलर्स इस योजना को जनविरोधी के साथ-साथ असुविधाजनक भी कह रहे हैं। दरअसल रोजाना के घटते-बढ़ते दाम उनके लिए कई तरह की परेशानी पैदा कर रहे हैं। जनता महंगाई से हलकान है, उनकी परवाह कोई नहीं कर रहा। जनता को बड़ी उम्मीद थी कि नई योजना से तेलों की कीमतों में कमी आएगी जिसका उनको फायदा होगा लेकिन हुआ उल्टा। जनता खुद को ठगा हुई महसूस कर रही है।
पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते जा रहे दाम से आम आदमी हलकान है। जनता महंगाई से पहले से ही परेशान है और अब यह रोजाना का बोझ सहना पड़े रहा है। पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। एक सवाल सबके जेहन में उठ रहा है कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का दाम लगातार गिर रहा है लेकिन फिर भी उसका फायदा आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कारण सरकार ने कच्चे तेल के दाम में गिरावट के हिसाब से तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने का मौका नहीं दिया है। सरकार अपना खजाना भरने के लिए एक्साइज ड्यूटी में लगातार बढ़ोत्तरी करती जा रही है।
इसमें दो राय नहीं कि कच्चे तेल की कीमत में कमी का जो लाभ आम आदमी को मिलना चाहिए, वह सरकार ने उनको नहीं दिया है। मौजूदा सरकार ने सबसे पहले जब कच्चे तेल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई थी, तब कच्चे तेल की कीमत 79 डालर प्रति बैरल थी। आज की तारीख में भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 32 डालर प्रति बैरल है। जब केंद्र एक्साइज ड्यूटी बढ़ाता है तब राज्य सरकार की ओर से लगे लोकल टैक्स भी बढ़ा दिए जाते हैं। यही कारण है कि आम आदमी पर दोहरी मार पड़ती है।
- रमेश ठाकुर

Share it
Top