मुद्दा: घटिया दवाओं के निर्माताओं को कड़ी सजा मिलनी चाहिए

मुद्दा: घटिया दवाओं के निर्माताओं को कड़ी सजा मिलनी चाहिए

देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में आजकल महंगाई व चिकित्सकों में व्याप्त लालच हावी हो गया है। आम नागरिक किसी भी प्रकार अपनी चिकित्सा नहीं करवा पा रहा है जिस कारण वह हताश व निराश होकर मेडिकल स्टोर से सस्ती व घटिया दवाई क्रय करता है जिससे वह स्वस्थ तो हो जाता है परन्तु दवाई के साइड इफेक्ट से वह कालान्तर में किसी बीमारी का शिकार हो जाता है।
छोटे शहरों व गावों के चिकित्सकों की फीस भी बडे शहरों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की तर्ज पर एक हजार रुपये से ज्यादा हो गई है। पर्चे पर सप्ताह में दो बार ही चिकित्सक के द्वारा परामर्श दिया जाता है। एक बार परामर्श तो शुरु में हो गया और दूसरी बार दवाइयों का असर भी पता नहीं चलता और पर्चे की मियाद पूरी हो जाती है। चिकित्सक महंगी दवाई लिखता है जिन पर चिकित्सक को अच्छा खासा कमीशन व दवाई निर्माता से बड़ी सुविधाएं चिकित्सक को दी जाती है।
देश में अधिसंख्य गरीब बिमार लोग निवास करते है जिनको देखते हुए कुछ निर्माता घटिया दवाई निर्मित करते हैं जिनको कोई चिकित्सक नहीं लिखता। दवाइयों में मिलावट व एक्सपायरी तारीख का भी प्रचलन चल रहा है। चिकित्सक के द्वारा महंगी दवाइयां लिखना, दवाई निर्माता के द्वारा घटिया व मिलावटी दवाइयों का निर्माण करना, तीनों ही स्थितियों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। सरकार चिकित्सकों के परामर्श शुल्क पर कोई नियंत्रण नहीं लगा पा रही है।
देश में जिन लोगों का बीमा होता है उनसे तो चिकित्सक खुश रहते हैं। वे मोटी फीस भी दे सकते हैं तथा महंगी दवाई भी खरीद सकते हैं। अब सरकार को बीमा का दायरा भी बढ़ाना चाहिए जिससे आम लोग भी बीमा करवा सकें तथा आसानी से बीमारी पर हुए व्यय को बीमा कम्पनी से वसूल कर सकें। सरकारी चिकित्सालयों से भी दवाई भी बंटवाई जा सकती है तथा लोगों को सरकारी चिकित्सालयों में आकर्षित किया जाये।
घटिया व मिलावटी दवाओं पर प्रभावपूर्ण नियंत्रण स्थापित किया जाय। देखा गया है कि दवा नियंत्रक व परीक्षक ही भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं तथा उनकी मिली भगत से ही घटिया दवाओं का निर्माण व वितरण होता है। अत: जिस मेडिकल स्टोर व दुकान पर घटिया दवा बरामद होती है उसी क्षेत्र के दवा नियंत्रक व दवा निरीक्षक को भी दुकानदार के साथ साथ सजा मिलनी चाहिए। घटिया दवाई को बेचने के लिए केवल एक दुकानदार ही उत्तरदायी नहीं होता है। सरकारी - सूर्य प्रकाश अग्रवाल

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