मुद्दा: आधार कार्ड बन गया मुसीबत कार्ड

मुद्दा: आधार कार्ड बन गया मुसीबत कार्ड

एक तरफ आधार योजना की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार आधार कार्ड को लेकर तेजी में है। वह स्कूल में बच्चों के दाखिले से लेकर खाने के लिए राशन तक में आधार कार्ड को जरूरी बनाती जा रही है। सरकार को अदालत के फैसले तक का इंतजार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील श्याम दीवान ने कहा कि सरकार आधार कार्ड से चाबी अपने हाथ में ले रही है। इससे सिविल डैथ के हालात बनेंगे। बुनियादी सुविधाओं को आधार कार्ड से लिंक किया गया है। बिना इसके कोई समाज में नहीं रह सकता। यह लोगों की निजता को खत्म कर रहा है।
सरकार ने यह आदेश जारी कर दिया है कि बिना आधार कार्ड से लिंक वाले राशनकार्ड के धारक को राशन नहीं मिलेगा। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, राशनकार्ड में दर्ज हर सदस्य के नाम के साथ आधार कार्ड लिंक होना जरूरी है। अगर किसी सदस्य का नाम आधार कार्ड से लिंक नहीं है तो उस कार्ड पर राशन नहीं मिलेगा। सरकार ने अप्रैल महीने से पहले इस काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को तय समय में पूरा कर लिया जाएगा, ऐसा मुश्किल लगता है।
गरीब और गांव में रहने वाली जनता को इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है। आधार कार्ड को लिंक कराने और बाद में बायोमीट्रिक मशीन को चलाने के लिए साधन नहीं हैं। इंटरनेट की गति का बुरा हाल है। बहुत सी जगहों पर बिजली की समस्या है। सरकार का कहना है कि राष्ट्र्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन को पारदर्शी बनाने के लिए यह फैसला लिया जा रहा है जिसके तहत 1 अप्रैल, 2018 से बिना आधार कार्ड से लिंक वाले राशनकार्ड के धारक को राशन नहीं मिलेगा।
आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाया गया है। मोबाइल फोन को आधार कार्ड से लिंक करना जरूरी है। इसी तरह से बैंक खाता खोलने, बीमा पॉलिसी लेने, म्यूचुअल फंड जैसी बचत योजनाओं के लिए आधार कार्ड को जरूरी बना दिया गया है। देश में अभी भी बहुत सारे लोग, जिनमें मजदूर, कामगार खास हैं, के आधार कार्ड नहीं बने हैं। आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट को लेकर भी कई परेशानियां सामने आ रही हैं।
आधार कार्ड बनाने वाली संस्था यूआईडीएआई द्वारा आधार कार्ड के लिए सभी लोगों की दसों उंगलियों के फिंगर प्रिंट समेत तमाम डेटा लिया जाता है। कई बार फिंगर प्रिंट से 100 फीसदी मिलान नहीं होता। ऐसे में लोग अपने जायज हकों से वंचित रह जाते हैं।
वैसे तो आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक पहचान पत्र है पर सरकार ने जिस तरह से आधार कार्ड का इस्तेमाल हर जगह करना शुरू किया है उससे यह आम नागरिकों के अधिकारों का हनन करता नजर आ रहा है। आधार कार्ड को लेकर सरकार की जबरदस्ती है कि वह बैंक खाते से लेकर राशनकार्ड तक आधार कार्ड से जोड़ रही है। सरकार का काम जनता को सहूलियत देना है, जबकि आधार कार्ड के जरिए वह जनता के सामने तमाम तरह की मुश्किलें खड़ी करती जा रही है। जनता को यह बताया जा रहा है कि इससे भ्रष्टाचार रूकेगा जिससे महंगाई कम होगी।
आधार कार्ड का सबसे अधिक इस्तेमाल रसोई गैस में किया गया। रसोई गैस के आधार कार्ड से लिंक होने का जनता को क्या फायदा मिला? आधार कार्ड से रसोई गैस के लिंक होने की योजना के बाद अगर रसोई गैस की कालाबाजारी रूक गई होती तो रसोई गैस के दाम कम होने चाहिए थे। रसोई गैस के दामों में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है। आज भी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी हो रही है। आधार कार्ड के रसोई गैस कनेक्शन से लिंक होने का क्या फायदा मिला?
आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र है। इसमें बारह नंबर की संख्या छपी होती है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है। यह संख्या भारत में कहीं भी उस शख्स की पहचान और पते का सबूत होती है।
भारत का रहने वाला हर नागरिक इस कार्ड को बनवा सकता है। इसमें हर शख्स केवल एक बार ही अपना नामांकन करा सकता है।
यह कार्ड सरकार द्वारा बिना पैसे लिए बनाया जाता है। कानूनी रूप से आधार कार्ड एक पहचान मात्र है। यह भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र भी नहीं है। इसके बाद भी जिस तरह से आधार कार्ड को लेकर सरकार जनता पर दबाव बना रही है, वह जबरदस्ती जैसा है।
मतदाता पहचान पत्र की जगह आधार कार्ड को मान्यता देने का काम खतरनाक है। जनता के पास कई तरह के पहचान पत्र हैं। इनमें राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र सरकार के कर्मचारी का परिचय पत्र प्रमुख हैं। अब सरकार आधार कार्ड को पहचान पत्र से भी ऊपर रख रही है। आधार कार्ड को खास बनाने के लिए सरकार ने उसको रसोई गैस, पैन नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर से जोडऩे का काम किया है। बिना आधार कार्ड के आयकर की रिटर्न दाखिल नहीं हो रही है। इसके साथ ही जमीन-जायदाद की खरीद- फरोख्त में रजिस्ट्री के समय भी आधार कार्ड जरूरी किया जा रहा है। जायदाद और बैंक से आधार कार्ड के जुडऩे से जनता की डोर सरकार के हाथों में चली जा रही है। इससे एक जंजीर बन रही है। यह जंजीर जनता के लिए ऐसी हथकड़ी बनती जा रही है जिसे वह खुद अपने गले में डालने को मजबूर है।
दरअसल, वोट देने के सिस्टम में सरकार कोई सुधार नहीं करना चाहती। सरकार को पता है कि मतदाता परिचय पत्र में सुधार से फर्जी मतदान रूक सकता है जो नेताओं के फायदे की बात नहीं है। सरकार सुधार के सारे काम जनता के लिए करना चाहती है। जनता से पाई-पाई का हिसाब मांगने वाली सरकार खुद को ऐसी जवाबदेही से मुक्त रखना चाहती है।
-नरेंद्र देवांगन

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