Read latest updates about "वे कहते हैं" - Page 1

  • राष्ट्ररंग: जनता को अकर्मण्य न बनाये सरकार

    'अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गये सबके दाता राम' संत मलूक दास जी के इस दोहे के अनुपालन के उद्देश्य के लिये, इन दिनों देश में तरह तरह की योजनाएं चल रही हैं। अकर्मण्य और नाकारा लोगों के हितार्थ सरकारें नित नई घोषणाएं कर रही हैं। कहीं कर्ज माफी हो रही है, तो कहीं लोक अदालतें लगाकर...

  • राष्ट्ररंग: स्पष्ट रूप से हो पैकेट पर लेबलिंग

    जंक या फास्ट फूड सारी दुनिया के साथ हमारे देश में भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि नई पीढ़ी का भविष्य बीमार व कमजोर हो रहा है। यही कारण है कि यूजीसी को स्थिति का अध्ययन कर महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाना पड़ा लेकिन यह...

  • खरी-खरी: क्यों उठ रहे हैं राफेल सौदे पर गंभीर सवाल?

    राफेल एक फ्रांसीसी कम्पनी 'दसाल्ट एविएशन' द्वारा निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी रोल काम्बैट एयरक्राफ्ट (एम.एम.आर.सी.ए.) है। इस विमान में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे विश्व का बेहतरीन लड़ाकू विमान बनाने के लिए पर्याप्त हैं। यह हवाई हमला, वायु वर्चस्व, जमीनी समर्थन, भारी हमला, परमाणु प्रतिरोध...

  • स्विस बैंकों में भारतीयों की जमाराशि में आए उछाल से उभरे कतिपय महत्त्वपूर्ण सवाल

    जब कालेधन पर चोट के बाद भारतीयों द्वारा सिंगापुर और हांगकांग जैसे फाइनेंशियल हब की ओर रुख किया गया हो, तब स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन महज एक साल में ही डेढ़ गुना बढ़ जाना कई सवाल खड़े करता है। ऐसा इसलिए भी कि स्विस बैंकों में भारतीयों की जमाधनराशि में वर्ष 2014 से 2016 तक लगातार गिरावट दर्ज...

  • विश्लेषण: रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दे सरकार

    देश में बढ़ रही बेरोजगारी को लेकर चिंता की लकीरें युवाओं के चेहरों पर हैं तो सरकार भी कम चिंतित नहीं है। वैसे रोजगार और स्वरोजगार का विवाद ऐसा मुद्दा है जिस पर कुछ भी ठोस रूप से जांच परख कर नहीं कहा जा सकता है। दरअसल रोजगार को लेकर कोई तथ्य परख सौ फीसद पुष्ट आंकड़ा ही नहीं है। सरकार के दावे और...

  • जम्मू-कश्मीर: रमजान में सीजफायर के सियासी निहितार्थ

    केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में रमजान के महीने में जिस तरह से सैन्य अभियान स्थगित करने की घोषणा की गई है, उसके गहरे सियासी मायने हैं। इस फैसले में कुछ जोखिम हैं तो कई फायदे भी नजर आ रहे हैं। लिहाजा इस फैसले पर कतिपय सवाल उठना लाजिमी है। क्या यह एकतरफा संघर्ष विराम है जिसे आतंकवादियों ने कुछ ही...

  • आर्थिक चर्चा: इंडिया की तुलना में भारत अभी भी समृद्ध है

    स्वतंत्रता प्राप्त के उपरान्त से ही देश में सीमाओं के बंटवारे के अतिरिक्त एक और प्रकार का बंटवारा भारत में देखा जा रहा है, वह है इण्डिया व भारत के रुप में। इण्डिया के रुप में शहरी व महानगर संस्कृति है तथा बड़े बड़े शहरों की अपनी ही संस्कृति विकसित हो गयी है जबकि भारत के रुप में छोटे छोटे शहर कस्बे...

  • व्यंग्य: आधी रात को सुप्रीम कोर्ट की ड्योढ़ी पर हम

    पिछले 15 दिनों से मेरे स्वास्थ्य परीक्षण चल रहे हैं। खून की जाँच, तरह तरह के मेडिकल टेस्ट, कभी खाली पेट तो कभी दो सौ ग्राम ग्लूकोज खाने के बाद सेम्पल लिये गये। सारा खानदान मेरे मेडिकल टेस्ट के परिणामों के अंदाजे लगा रहा था। बच्चे मेरी तरफ हैं, उनका अनुमान था कि मुझे कोई बीमारी नहीं है। पत्नी मेरी...

  • दंभ में डूबे हुए शिवराज, भाजपा के उल्टे दिन शुरू

    जैसे जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, मध्यप्रदेश के मुखिया के तेवर वैसे-वैसे अकड़ और दंभ से भरते जा रहे हैं। मुखिया के हाल बदले से हैं या तो हार का डर सता रहा है या फिर शिवराज भी समझ रहे हैं कि दुल्हन की विदाई तय है। राजधानी का हाल भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। एक तरफ बढ़ रही गर्मी शहर...

  • पास पड़ोस: चीन भरोसेमंद दोस्त साबित होगा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया चीन यात्र के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में ऐसी खबरें प्रचारित और प्रसारित हो रही हैं मानो चीन और भारत के रिश्ते बहुत मधुर और पक्के हो गये हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चौथी चीन यात्र में जिस गर्मजोशी से उनका आदर सत्कार पड़ोसी देश के राष्ट्रपति...

  • मुद्दा: दुराचार पर सजा-ए-मौत का शिकंजा?

    नाबालिग बेटियों पर बढ़ती बलात्कार की घटनाओं से पूरा देश हिल गया है। उन्नाव और कठुआ की घटना के बाद देश की छवि को विदेशों में भी नुकसान पहुँचा। संयुक्तराष्ट्र संघ ने भी इन घटनाओं को गम्भीरता से लिया। दिल्ली महिला आयोग की स्वाति पालीवाल को अनशन पर बैठना पड़ा। सोशल मीडिया और मीडिया में इन घटनाओं को...

  • राष्ट्ररंग: जिन्ना की तस्वीर और तदबीर दोनों डरावनी हैं

    भारत विभाजन के जिम्मेवार और पाकिस्तान के पैरोकार दिवंगत राजनेता मोहम्मद अली जिन्ना एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, उनकी तस्वीर और तदबीर से जुड़ीं स्मृतियां इतनी भयावह हैं कि भारत के बहुसंख्यक लोग अब भी उनकी बात छिड़ते ही खौफजदा हो जाते हैं। गत दिनों अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ...

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