Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 4

  • विश्लेषण: संघ दृष्टि में 'भविष्य का भारत' की प्रासंगिकता

    भारत सदैव से ही दुनिया के लिए उत्सुकता का विषय रहा है। विश्व इतिहास में भी दर्ज है कि ज्ञान और कला की हमारी समृद्ध विरासत को निकट से देखने, अनुभव करने और लेखनीबद्ध करने के लिए दुनियाभर के विद्वान यात्रियों ने भारत की यात्राएं की हैं। आज भी विश्व के लिए भारत के अतीत और भविष्य का महत्व है तो स्वयं...

  • मुद्दा: शौचालय निर्माण व स्वच्छता मिशन का आर्थिक विकास में योगदान

    देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का प्राथमिक अधिकार समझा जाता है परन्तु भारत में स्वास्थ्य की तरफ पर्याप्त ध्यान न देने से तथा स्वास्थ्य सेवा के अभाव के कारण देश में प्रतिदिन ही हजारों लोग अपनी जान अस्पतालों में चिकित्सा के दौरान गंवा देते है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा इस...

  • चेतावनी: सरकारी तंत्र की लापरवाही से हुए हादसों का जिम्मेदार कौन?

    हादसा अगर दैविक हो तो कुछ हद तक कह सकते हैं कि ईश्वरीय प्रकोप से बचना मुश्किल होता है और दुर्भाग्यवश ऐसे हादसे होते हैं लेकिन अगर ऐसे ही हादसे लापरवाही से हों तो बस एक प्रश्न हृदय में घुमडऩे लगता है कि हादसों में हुए इन हत्याओं का जिम्मेदार आखिर कौन है? हत्या मैं इसलिए कह रहा हूँ कि जब मालूम हो कि...

  • राष्ट्ररंग: घटती आय के कारण गांवों से हो रहा है पलायन

    एक तरफ केंद्र सरकार की यह सुखद घोषणा सबको याद है कि वह अगले पांच वर्षों में देश के किसानों की आय दोगुना तक बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध है और इसके तहत मुख्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना किया जाएगा। दूसरी तरफ कुछ दिन पहले नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने...

  • चेतावनी: खालिस्तानी सांपों को दूध पिला रहे वामपंथी

    विदेशी धरती पर खालिस्तानी आतंकियों व अलगाववादियों की बढ़ रही गतिविधियों की अब और अनदेखी करना शुतरमुर्ग की नीति का अनुसरण करना होगा जो खतरे को सामने देख कर रेत में सिर छिपा लेता है। अभी हाल ही में विदेशी दौरे के दौरान खालिस्तानी तत्वों ने अकाली दल बादल के नेता मनजीत सिंह जीके व कांग्रेस के राष्ट्रीय...

  • विश्लेषण: कश्मीर में हर सुबह एक नई चुनौती?

    कश्मीर वादी में आतंक की आग कब बंद होगी, कहना मुश्किल है। हर सुबह आतंक एक नयी सोच के साथ पैदा हो रहा है। अभी तक पत्थरबाज हमारी सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हैं लेकिन अब एक नई साजिश सामने आयी है जिसकी वजह से घाटी में सुरक्षाबलों की नींद उड़ गयी है। आतंकवादियों ने अब कश्मीर पुलिस के साथ अफसरों के...

  • भाजपा व कांग्रेस में मचा घमासान और लोकसभा चुनाव 2019

    भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी पर आज देश की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है। दोनों बड़ी पार्टियां कांग्रेस व भाजपा में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की होड़ दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसे भारत जैसे सांस्कृतिक और साधु-संतों के देश में कदापि उचित नहीं कहा जा सकता। इसमें...

  • राजनीति: बंगाल की दुर्दशा के लिए दोषी कौन?

    26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया पश्चिम बंगाल राज्य स्वतंत्रता के 71 वर्ष पश्चात आज भी अपनी दुर्दशा के लिए रो रहा है जबकि उस समय एवं उसके वर्षों पश्चात तक देश में अस्तित्व में आने वाले समस्त राज्य विकास, उन्नति एवं प्रगति के मामले में नित नई ऊंचाइयां तय कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या, क्यों एवं कैसे...

  • विश्लेषण: देश ने बढ़ाई विदेश में अपनी साख

    वर्ष 2014 के आम चुनाव प्रचार में नरेन्द्र मोदी ने कभी-कभार पाकिस्तान का जिक्र जरूर किया लेकिन देश की विदेश नीति को लेकर उन्होंने कोई खास टीका-टिप्पणी नहीं की। सत्ता संभालने के साथ ही मोदी के तेवर दूसरे थे। अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशिया के सभी देशों के प्रमुखों को आमंत्रित कर उन्होंने इस...

  • फारूख अब्दुल्ला द्वारा भारत माता की जय

    फारुख अब्दुल्ला द्वारा भारत माता की जय बोलने पर उन के साथ हुई अभद्रता और धक्का-मुक्की पर पढ़े-लिखे लेकिन बंद दिमाग वाले मुस्लिम समाज और वामपंथी समाज की गहरी खामोशी पर मुझे कुछ नहीं कहना। इसलिए भी कि हमारे देश में वामपंथी समाज और मुस्लिम समाज दोनों ही एक बंद समाज हैं। इन से भला क्या कहना , क्या...

  • राजनीति: बूढ़ी कांग्रेस...राहुल का मुकुट बचाने की कवायद!

    अपनी 133 जयंतियां मना चुके और स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्व का दावा करने वाले देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में नया बदलाव किया गया है। वैसे तो यह बदलाव केवल समाचार पत्रों के कालमों तक ही सीमित रहने के योग्य है परंतु इसके पीछे नेहरु-गांधी परिवार में राजनीतिक असुरक्षा की बढ़ती भावना और...

  • राष्ट्ररंग: विधेयक बन जाने भर से घूसखोरी से मुक्ति नहीं मिलेगी

    कोई घूस देकर काम करा लेता है तो कोई नियम-कानून की दुहाई देता फिरता है और बेचारा परेशान रहता है। आलम यह है कि घूस देना और लेना स्थायी भाव सरीखा हो गया है। हम सबको बिलकुल भी गैर जायज-असहज नहीं लगती यह बुराई। इसी मानसिकता से उबरना है। बुरा लगना चाहिए। हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक-2018...

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