Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 4

  • राजनीति: सवर्ण आरक्षण की राजनीति

    जहर में डूबे कुछ लोग पूछ रहे हैं कि अगर सामान्य वर्ग के लोगों को दस परसेंट आरक्षण देना ही था तो पहले ही क्यों नहीं दिया ? यह चलते-चलते देने का क्या मतलब ? यह सवाल वैसे ही है जैसे किसी की शादी में बैंड बजने लगे तो आप पूछें कि भैया , शादी तो बहुत पहले ही तय हो गई थी , बैंड आज क्यों बजा रहे हो , पहले...

  • मुद्दा: कश्मीर में सेना, यूपी में पुलिस पर पत्थरबाजी?

    लोकतंत्र में हमारे अधिकार हिंसक क्यों बन रहे हैं। हम संविधान उसके विधान और व्यवस्था को हाथ में लेकर खुद न्यायी क्यों बनना चाहते हैं। संविधान में लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। हर वे व्यक्ति, संस्था, समूह, दल और संगठन अपनी बात वैचारिक रुप से रख सकता है। यह लोकतांत्रिक तरीके से...

  • राजनीति: क्या कमलनाथ कांग्रेस की लुटिया डुबोना चाह रहे हैं?

    कहते हैं चोर, चोरी छोड़ देता है लेकिन सीनाजोरी नहीं छोड़ता। यह बात कुछ नेताओं के संदर्भ में बेझिझक कही जा सकती है। पिछले दिनों हिन्दी भाषी तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भाजपा की हार हुई। छत्तीसगढ़ में जहाँ कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला तो राजस्थान में बहुमत से कुछ दूर रहे...

  • राजनीति: ओवर कान्फिडेंस के रथ पर अखिलेश-मायावती

    हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों ने जहां विपक्ष को ऊर्जा दी है वहीं कुछ विपक्षी पार्टियां ऐसी भी हैं, जिनके माथे पर इससे शिकन भी आई है। हिंदी हार्टलैंड के 3 राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव परिणामों में कांग्रेस के सरकार गठन के बाद यूपी की विपक्षी-राजनीति कुछ इसी कारण से उलझ...

  • विश्लेषण: मोदी जी जरा संभलना.......

    राजनीति में समय कभी भी एक समान नहीं होता है। आज से चार बरस पहले मोदी की जो लहर दिखाई दे रही थी अब वह हवा वैसी नहीं रही है। 2019 आते -आते मोदी को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, वह भी इससे अनभिज्ञ हैं। हाल के दिनों में मोदी सरकार को लेकर सहयोगी दलों में गठबंधन को लेकर जो स्थिति निर्मित हुई...

  • बहस: मराठों को आरक्षण की पहल

    आखिरकार एक लंबे संघर्ष के बाद महाराष्ट्र में मराठाओं ने आरक्षण पाने का रास्ता बना ही लिया। राज्य की फडणवीस सरकार ने मराठों के आरक्षण को लेकर बीते दिनों विधानसभा के पटल पर प्रस्ताव रखा और कुछ ही देर में यह बिल पास भी कर दिया गया। इस फैसले के जरिए बीजेपी सरकार ने साबित कर दिया है कि किसी खास समुदाय...

  • राजनीति: बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की सुगबुगाहट

    इन दिनों बिहार की राजनीति में जबरदस्त गहमा-गहमी है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के तीन घटक दल आपस में भी उलझे हुए हैं। मसलन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता एवं नरेन्द्र मोदी सरकार के केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा लगातार हमलावर रूख अपनाए हुए हैं हालांकि वे भारतीय जनता पार्टी...

  • विश्लेषण: गंभीर होती नक्सलवाद की चुनौती

    नक्सली हिंसा किसी भी स्तर पर आतंकवाद से कम नहीं है। साठ के दशक में आदिवासियों और भूमिहीन किसानों के लिए यह आंदोलन शुरू किया गया होगा लेकिन वे खाली हाथ जमातें आज भी भूमि और जंगलात के अधिकारों के लिए दिल्ली की ओर देखती हैं। नक्सलवाद ने आदिवासियों को हथियारबंद हमलावर तो बना दिया लेकिन गरीब आदमी...

  • विश्लेषण: आधी आबादी के साथ अन्याय

    दुनिया की जनसंख्या में आधी आबादी महिलाओं की है। दुनिया के प्रत्येक देश में इन की दशा व दिशा में भिन्नता है। परिस्थितियां व परिवेश सहित परंपरागत मान्यताओं से यह प्रभावित होती है। इन सब के बावजूद भारतीय समाज में नारी की दुर्दशा चिंतनीय है। चिंतनीय इस अर्थ में क्योंकि हम जगत गुरु हैं। चिंता इस अर्थ...

  • राष्ट्ररंग: कुपोषण और मोटापे की दोहरी मार झेल रहा भारत

    किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन होता है। जिस देश के पास जितनी अधिक कार्यकारी मानव शक्ति होती है, उसकी अर्थव्यवस्था उतनी ही तेज गति से कुलांचे भरती है। भारत को उसकी इसी खूबी का लाभ मिलता रहा है। अब सोचिए, अगर देश से कुपोषण को खत्म कर दिया गया होता तो उसके मानव संसाधन से मिल रहा...

  • क्या यू.पी. की कायाकल्प कर पायेगें योगी जी?

    यूपी पिछले कई साल बाद भाजपा के योगी राज के सानिध्य में आया। आरम्भ से ही भ्रष्टाचार व अपराध के दमन के लिए भाजपा को माना जाता है। अब यूपी में भाजपा की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में है। जब उन्होंने यूपी की कमान संभाली तो चीख-चीख कर खुलेआम कहा कि अपराधी व भ्रष्टाचारी यूपी को छोड दे नहीं तो परिणाम...

  • राजनीति: राहुल गांधी कांग्रेस के बहादुरशाह जफर

    भाजपा के प्रवक्ता अक्सर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर से करते हैं। यह उनकी प्रवंचना या टीवी डिबेट जीतने की शैली हो सकती है परंतु जफर केवल मुगलिया सल्तनत के पतन के ही नहीं बल्कि कमजोर नेतृत्व के भी ऐतिहासिक प्रतीक कहे जा सकते हैं। तख्त पर वे अवश्य बैठे थे...

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