Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 4

  • मुद्दा: चिंताजनक है एससी-एसटी कानून का दुरूपयोग

    समाज की समस्याओं को दुरूस्त करने के लिए कानून के रूप में जब भी सरकारी पहल हुई है, उस कदम का परिणाम एक नए विद्रूप में दिखा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति व जनजाति कानून का दुरूपयोग रोकने के लिए एक अहम व्यवस्था दी। उसने कहा कि एससी-एसटी कानून के तहत प्रताडऩा की शिकायत मिलने पर तत्काल...

  • खतरे में है मतदाताओं की प्रभुसत्ता

    जो आपकी पसंद है क्या वह सचमुच में आपकी है? डिजिटल युग में आपके विचार भी बदले जा सकते हैं। कैंब्रिज एनलिटिका घोटाला उजागर हुआ है। देश की सभी बड़ी पार्टियां मतदाताओं की थाह पाना चाहती हैं। कैसे वोट बटोरे जाएं। किसी तरह से सुराग मिल जाए कि मतदाता की पसंद क्या है? मतदाता कैसे भाषण चाहता है? मतदाता को...

  • कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी का भाषण

    वर्षों बाद आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण की चर्चा इन दिनों हो रही है। राहुल गांधी का जोशीला उद्बोधन उनके आत्मविश्वास को तो दर्शाता है लेकिन देश की आम आदमी की समस्याओं और ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी की नीतियों को जनता के समक्ष साफ तौर पर रखने में राहुल गांधी का भाषण...

  • बहस: एससी-एसटी एक्ट पर उच्चतम न्यायालय का आदेश

    एक तरफ तो सारे देश में दलित उत्पीडऩ के मामले बढ़ते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून को कमजोर कर दिया है और इतना कमजोर कर दिया है कि इसके होने या न होने से ज्यादा फर्क नहीं पडऩे वाला नहीं है। पहले यह कानून बहुत सख्त था जिसमें मामला दर्ज...

  • मुद्दा: लिंगायत के रूप में हिंदू समाज का विभाजन

    ब्रिटिश सरकार ने हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कम्यूनल एवार्ड योजना के तहत मुसलमानों की तरह दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव किया तो महात्मा गांधी ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि समाज का यह विभाजन अंतत: देश में विभाजन के बीज बोएगा। गांधी जी ने इसके खिलाफ सत्याग्रह...

  • मुद्दा: स्वास्थ्य सुविधाओं के दो विपरीत ध्रुव

    गत मास दिल्ली के एक बड़े सरकारी अस्पताल में एक गंभीर रोगी को वेंटिलेटर उपलब्ध न कराये जाने से क्षुब्ध रोगी के परिजनों द्वारा डाक्टर के साथ मारपीट का समाचार स्वास्थ्य सेवाओं में हमारे सामने दो परस्पर विरोधी ध्रुवों की तस्वीर प्रस्तुत करता हैं। एक ओर पंचसितारा निजी अस्पतालों के निर्माण के बाद से...

  • समस्या: नक्सलियों पर नकेल कसने की जरूरत

    एक बार फिर नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया है। सुकमा में नक्सली हमले में नौ जवान शहीद हो गये। अब तक सैंकड़ों सुरक्षाबलों को नक्सली हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में सैंकड़ों नक्सली भी मारे जा चुके हैं। यह अजीब विडंबना है कि जो बल देश को मजबूत और खूबसूरत बनाने में...

  • मुद्दा: कृषि संकट का दीर्घकालिक समाधान खोजे सरकार

    देश के किसान आंदोलित हैं। इस बार देश की वित्तीय राजधानी मुंबई ने फिलहाल किसानों और आदिवासियों की मांगों की धमक महसूस की। अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में छह मार्च को हजारों की तादाद में किसान महाराष्ट्र के नासिक और आसपास के इलाकों से निकले और दो सौ किलोमीटर पैदल चलकर मुंबई पहुंचे थे। ...

  • राष्ट्ररंग: दलितों का दमन लगातार जारी है

    गुजरात के युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी पाखंडवाद के खिलाफ आवाज को बुलंद कर पाएंगे, इसमें शक है और जब तक हर तरह के पाखंड की पोल और चाल का भंडाफोड़ न होगा, समाज वर्गों व वर्णों में बंटा रहेगा। दलितों पर अत्याचार होते ही इसलिए हैं कि पाखंडवाद के चलते एक बच्चे को एक धर्म, एक जाति, एक गोत्र पकड़ा दिया...

  • राजनीति: 'लाल सलाम' को आखिरी सलाम

    कार्ल माक्र्स व लेनिन के बाद वामपंथ के सबसे बड़े नायक माओ त्से-तुंग मानते थे कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। उनके इसी ध्येय वाक्य को सत्य साबित करने के लिए आज जहां माओवादी व नक्सली आतंकी जगह-जगह रक्तपात करते हैं, वहीं कथित तौर पर लोकतंत्र की समर्थक कहे जाने वाली पार्टियां भी माओ के उक्त विचार...

  • प्रश्नचिन्ह ..तो फिर आरएसएस और भाजपा पर ही तोहमत क्यों?

    अभिव्यक्ति की आजादी को जिंदा रखने के साथ लैंगिक और उत्पीडऩ के खिलाफ संघर्ष को नया आयाम देने के प्रस्ताव के साथ बीते दिनों जनवादी लेखक संघ का दो दिवसीय सम्मेलन धनबाद में संपन्न हो गया। हालांकि इस सम्मेलन का सबसे बड़ा व सुखद पहलू यह रहा कि जलेस ने दशकों बाद किसी अल्पसंख्यक को अध्यक्ष की कुर्सी पर...

  • मुद्दा: एस एस सी टियर 2 पेपर लीक मामला: छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार मौन क्यों?

    2016 के बाद कर्मचारी चयन आयोग ( एस एस सी ) ने जब अपनी सभी परीक्षाओं को ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया तो तो आशा थी कि इससे डिजिटलीकरण की तरफ बढ़ते देश में आयोजित परीक्षाओं की गुणवत्ता बढेगी। इस निर्णय से उम्मीद थी कि योग्यता सूची और मूल्याकंन आसान हो जाएगा। धांधली और पेपरलीक होने जैसे समस्याओं...

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