Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 4

  • पास पड़ोस: भारत के प्रति अडिय़ल रवैय्या छोड़ें ओली

    नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली की पहचान भारत विरोधी रही है। उन्होंने कभी भी अपने पड़ोसी मुल्क के साथ संबंध अच्छे रखने की पहल नहीं की लेकिन अब माहौल बदला हुआ है, इसलिए उनकी भारत से संबंध मधुर करने की कुछ मजबूरियां भी हो सकती हैं। नेपाल चीन के विस्तारवादी दंश के गिरफ्त में है। सर्वविदित है कि चीन...

  • मुद्दा: भारत का इकतरफा संघर्ष विराम-क्या अच्छा होगा अंजाम

    महबूबा मुफ्ती की अपील पर केंद्र सरकार द्वारा इकतरफा बिना शर्त संघर्ष विराम की घोषणा करने की कुछ लोगों को छोड़कर अधिकाँश लोगों द्वारा आलोचना की जा रही है। राजनीति, युद्ध और अनवरत संघर्ष की बारीकियों से अपरिचित जनसाधारण के लिए यह एक दोषपूर्ण फैसला हो सकता है। होना भी चाहिए। वह समझ रही है कि जब,...

  • विश्लेषण: शांति धर्म है, लेकिन देशद्रोह से निपटना प्रथम धर्म

    पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री ने रमजान के पवित्र महीने में वहां सक्रिय आतंकवादियों के खिलाफ एकतरफा संघर्षविराम की मांग की थी। उनके अनुसार ऐसा करने से शांतिपूर्ण माहौल बनाने में मदद मिलेगी। अत: केन्द्र ने केंद्रीय सुरक्षा बल द्वारा रमजान माह में आतंकियों के खिलाफ अभियान स्थगित रखने की...

  • मुद्दा: पेड़ लगाएं और फलदार प्रजातियों को बचाएं

    वर्तमान समय में कोई पुण्य कार्य है, तो वह है वृक्ष लगाना। पुण्य कमाने या जनहित के काम करने के विषय पर हर बार सामर्थ्य का मुद्दा सामने आ जाता है। सम्पन्नता के अपने पैमाने हैं और विपन्नता के अपने लेकिन यही एक काम है जो हर वर्ग का व्यक्ति कर सकता है। धरती को संभाले रखने में वृक्षों की सबसे अहम भूमिका...

  • मुद्दा: चित्र नहीं, कट्टर चिंतन का प्रतीक हैं जिन्ना

    किसी भी ऐसे समाज में जिसमें विभिन्न समुदाय और मत-मतान्तरों के लोग रहते हों, उसमें मत भिन्नता एक आवश्यक तत्व के रूप में विद्यमान होना उसकी जीवन्तता का प्रतीक होता है। भारतीय समाज में यह जीवन्तता भरपूर है। हम सब सहस्त्रधिक मत-मतान्तरों और लाखों मतभिन्नताओं के रहते भी एक राष्ट्र, एक समाज और एक...

  • मोदी जी बचें नहीं तो फिर क्या करें..

    इन दिनों नरेन्द्र भाई मोदी की लोकप्रियता में जैसे-जैसे कमी आ रही है वैसे-वैसे अपने और पराए दोनों उन पर हमलावर होते जा रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने यह कह कर मोदी के विरोध में अपना बयान जारी किया कि हमें कांग्रेस मुक्त भारत नहीं चाहिए। वहीं मोदी लगभग अपनी हर...

  • राष्ट्ररंग: नक्सलवाद की अंतिम सांसें

    - राकेश सैनवर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के बाद रणनीति बदली। अब जिन इलाकों को सुरक्षा बल मुक्त करवाते, वे वहीं टिक जाते और वहीं नया कैंप बनाने लगे। इससे स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा और सरकार की विकास संबंधी योजनाएं उन तक पहुंचनी शुरू हो गईं। सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियारों के...

  • मुद्दा: बलात्कार की विकृत मानसिकता पर कठोर प्रहार हो

    भारत में जिस प्रकार गत दिनों में पूरे देश में छोटी छोटी बालिकाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं मीडिया की सुर्खियों में छायी रही है, उससे भारत की विदेशों में प्रतिष्ठा कम हुई है तथा भारत को जहां अंग्रेजों ने साप व सपेरों का देश कह कर बदनाम किया, अब भारत को अंग्रेज मानसिकता के देशी व विदेशी लोग...

  • विश्लेषण: पानी की समस्या को सरकार और समाज दोनों मिलकर हल करें

    जल यानी बुनियादी मानवाधिकार। कहा भी जाता है कि - जल है तो कल है या बिन पानी सब सून। इन सबके बावजूद भारत में शुद्ध जल आज भी आम जनता के लिए दूर की ही कौड़ी है। हमारे देश में पानी की भारी कमी होने के बाद भी भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखाई दे रहा है। यूनेस्को की जो हालिया रिपोर्ट आई है वह देश में पानी की...

  • विश्लेषण: क्यों लाचार है हमारा बैंकिंग सेक्टर

    नगदी संकट पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने चिंता जताते हुए कहा है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम सत्ताधारी पार्टी की निजी जागीर हो गई है। उसके साथ सिर्फ मजाक किया जा रहा है। आजादी के बाद से सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है बैंकिंग नेटवर्क। उनके ये शब्द सप्ताह भर के नगदी संकट को रेखांकित करते हैं।...

  • मुद्दा : महापुरूषों को भी डस रहा है-जातिवाद

    गणतंत्र भारत में जैसे जैसे लोकतंत्र मजबूती की ओर अग्रसर होता जा रहा है वैसे वैसे ही देश में छोटी व बड़ी सभी जाति अपना वोट बैंक उजागर कर अपनी राजनीतिक शक्ति प्रगट करने हेतु अपने अपने जातिगत संगठन बना रहे हैं। स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के अधिसंख्य राजनेता अपनी अपनी जातिगत पहचान बताते हुए...

  • व्यंग्य: जांच अभी जारी है....

    जांच एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे दोषी पर कभी आंच नहीं आती। अफसर-नेता, घोटाले का करें नंगा नाच। जब जनता चिल्लाये तो थमा देते हैं, जांच और किसी दोषी पर कभी नहीं आती आंच। ये है पब्लिक उवाच। तो हमारे नेता जी को एक चिरकुट कैमरे ने किसी से एक करोड़ रुपये लेते कैद कर लिया। फिर क्या था, सब तरफ...

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