Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 3

  • राष्ट्ररंग: देश में ही रहकर देश का विरोध करना कैसी देशभक्ति

    भारत की वर्तमान राजनीतिक दशा व लोगों की विचारधारा को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि देश की एकता और अखण्डता ज्यादा दिन बनी रह सकती है। आज सभी लोग केवल अपनी विचारधारा और समर्थन बढ़ाने के लिए हर हद तक जाने के लिए तैयार हैं। हालांकि सब का तर्क तो यही है कि उनका कार्य भारत के विरोध के लिए नहीं बल्कि किसी...

  • राष्ट्ररंग: एक विचार यह भी

    हर दूसरे मोबाइल में फिंगर प्रिंट स्कैनर है। दस प्रतिशत को छोड़कर लगभग हर आधार होल्डर की अंगुलियों के निशान उपलब्ध हैं। अरबों रुपये की लागत आती है चुनाव में। करोड़ों कर्मचारियों को भत्ता देना, लाखों वाहन और करोड़ों का डीजल-पेट्रोल, जो चुनाव ड्यूटी में लगे हैं उनके काम काज की क्षति तथा करोड़ों की...

  • विश्लेषण: क्या पाकिस्तान कभी समझ सकेगा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को?

    भारतीय जनता पार्टी के नरेन्द्र मोदी ने प्रधान मंत्री पद की शपथ 26 मई 2014 को ली थी और उन्होंने भारत के सभी पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था। उसके उपरान्त नरेन्द्र मोदी की सारी कोशिशें पड़ोसी देशों के साथ मित्रता का संबंध स्थापित करने की रही। देश की जनता की...

  • मुद्दा: कहीं से भी मतदान का अधिकार हो

    स्वस्थ लोकतंत्र की पहली निशानी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने मतदान के अधिकार या कर्तव्य का इस्तेमाल करें। बढ़ती सोच, समझ और साधन के बावजूद पिछले सात दशक में मतदान प्रतिशत में अपेक्षित बढ़ोत्तरी न होना चिंता का विषय है। मेरे एक वोट से क्या बदल जाएगा? जैसी मानसिकता से उबरना होगा। एक वोट से बहुत...

  • राजनीति: मुश्किल होगी शॉटगन की राहें

    पिछले दो चुनावों में भारी मतों से जीत हासिल करने वाले सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की जीत पर इस बार ब्रेक लग सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में उनके मुकाबले तेज तर्रार केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को आगे किया है। बतौर मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जमीनी स्तर पर बहुत कार्य किए हैं। पटना जिले के कई गाँवों...

  • राष्ट्ररंग: राजनीति के गिरते स्तर को रोकने की जिम्मेवारी मतदाता की

    देश एक बार फिर अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए तैयार हैं। नेता मतदाताओं को रिझाने से भ्रमित करने तक कुछ भी करने को तैयार है। 'कुछ भी' में अभिनय से झूठ तक, भाषायी गिरावट से स्वयं को नीचे गिराने तक भी शामिल हो तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश की राजनीति का स्तर लगातार...

  • राजनीति: कांग्रेस 2024 के चुनावों की तैयारी में

    चाहे चुनाव आयोग द्वारा आम चुनावों की घोषणा से कुछ दिन पहले ही राजनीतिक दलों ने अपने लंगर लंगोट कसने शुरू कर दिए थे परंतु राजनीतिक रणभेरी बजने के एक सप्ताह में ही कुछ ऐसा दिखने लगा कि कल तक सत्ता परिवर्तन का दावा करने वाली कांग्रेस 2024 के चुनावों की तैयारी कर रही है। पार्टी के रणनीतिकार व नेता जोर...

  • राजनीति: फ्लाप शो रही प्रियंका की स्टीमर यात्रा

    एक समय मुझे लगा था कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए संजीवनी बन कर आई हैं, एक संभावना बन कर आई हैं, कुछ न कुछ करिश्मा जरूर करेंगी लेकिन यह मेरा पूरी तरह गलत आकलन था। अब स्पष्ट हो गया है कि वह मृत कांग्रेस में प्राण फूंकने में निरंतर असफल होती दिख रही हैं। पूरी तरह स्पष्ट हो गया है...

  • राजनीति: मोदी की सियासी किलेबंदी में क्या ढह जाएगा राहुल गांधी का गढ़ अमेठी

    भाजपा मिशन-2019 की तैयारी में पूरी तरह जुट गयी है। उसने अपनी रणनीति के केंद्र में यूपी और कांग्रेस के सियासी गढ़ अमेठी को रखा है, जबकि महागठबंधन की चुनावी तस्वीर अभी जमीन पर उतरती नहीं दिखती। भाजपा किसी भी तरह से यूपी को अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती। अबकी बार उसके निशाने पर गांधी परिवार की...

  • कांग्रेसियों की बुद्धि आखिर कहां बंद है?

    पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान से जब से हमारे संबंध कुछ-कुछ खराब होते-होते बदतर हालात तक पहुंचे हैं। तमाम कांग्रेसियों की बुद्धि सटक गई है। हमारे यूपी में एक कहावत है - बुद्धि घास चरने गई है। अधिसंख्य कांग्रेसियों की हालत इन दिनों यही है। सलमान साहब को ही लें। न, न, अभिनेता सलमान खान नहीं, नेता सलमान...

  • प्रश्न चिन्ह: एक सर्जिकल स्ट्राइक अंदर क्यों नहीं?

    पुलवामा में हुए आतंकी हमले से उत्पन्न जबरदस्त आक्रोश के बाद स्वाभिमानी राष्ट्र के पास आतंकियों की फैक्टरी पर प्रहार करने के अतिरिक्त कोई विकल्प हो ही नहीं सकता था। सरकार का धन्यवाद कि उसने जिम्मेवारी से बचने का कोई बहाना नहीं बनाया और सेना को अपना काम करने को कहा। हमारी सेना अपने पराक्र म के लिए...

  • मुद्दा: एक पादरी की ऐसी कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएंगी

    मैं जालंधर के एक अखबार में काम कर रहा था। उन दिनों एक बड़ी खबर आयी कि चर्च के किसी पादरी ने चर्च के साथ जुड़ी एक नन का रेप किया है। उस नन ने उक्त पादरी के खिलाफ केस किया है। खबर हमारे यहां भी छपी। चूंकि उक्त पादरी के बारे में मुझे कोई ज्यादा जानकारी नहीं थी इसलिए मैंने उस खबर पर ध्यान नहीं दिया।...

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