भाजपा व कांग्रेस में मचा घमासान और लोकसभा चुनाव 2019

भाजपा व कांग्रेस में मचा घमासान और लोकसभा चुनाव 2019

भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी पर आज देश की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है। दोनों बड़ी पार्टियां कांग्रेस व भाजपा में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की होड़ दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसे भारत जैसे सांस्कृतिक और साधु-संतों के देश में कदापि उचित नहीं कहा जा सकता। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत ही ईमानदार, कर्मठ, राष्ट्रवादी और जननायक हैं। मोदी का दामन व्यक्तिगत और पारिवारिक रूप से बिल्कुल बेदाग है। इसी वजह से देशवासी मोदी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार व घूसखोरी रहित एक नए भारत की कल्पना करने लगे हैं। आजकल राफेल वायुयानों की खरीद को लेकर जो हंगामा बरपा है, उसमें खरीद प्रक्रिया अपनाए जाने पर तो बहस हो सकती है, लेकिन मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में कोई मंत्री अथवा राजनयिक देश को घूसखोरी से आर्थिक हानि पहुंचा दे, इसकी संभावना नहीं के बराबर है। विपक्ष की एकजुटता में केंद्र सरकार पर लगातार किये जा रहे हमलों से भारत सरकार के मुखिया मोदी और भाजपा संगठन के शिल्पकार अमित शाह की जिम्मेदारी आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के दृष्टिगत बढ़ गई है, क्योंकि आज देश की समस्त जनता भ्रष्टाचार और अपने रोजमर्रा के कामों में घूसखोरी से मुक्ति चाहती है, ताकि लोगों के आम कामकाज सरलता से निष्पादित हो सके। 2019 के चुनावों में किसी पार्टी के पक्ष में कोई चुनावी लहर होने की संभावना नहीं है। मोदी देश की 125 करोड़ जनता में अपने संपर्कों और उद्बोधनों से जो जागरूकता लाये हैं, उससे यह चुनाव पार्टी और प्रत्याशी दोनों पर फोकस करके ही लड़ा जाएगा। प्रत्याशी के आचरण और काबलियत की अनदेखी इस बार किसी भी पार्टी को भारी पड़ने वाली है। फिर भी भाजपा लाभ की स्थिति में है, क्योंकि इसी भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार, घूसखोरी को खत्म करने और ईमानदारी व कर्मठता के साथ पारदर्शी तरीके से कार्य करना सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। जिसके चलते केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाकामी और शिकायतों के चलते कई केंद्रीय मंत्रियों को मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखाकर साहसिक निर्णय ले चुके हैं। इस पर किसी भी पदच्युत मंत्री की विरोध करने की हिम्मत नहीं पड़ी, क्योंकि मोदी जानते थे कि भारत की जनता ईमानदार और सही आचरण के जनप्रतिनिधि चाहती है। इसीलिए उनके कार्यों में अनियमितता बरते जाने और संदिग्ध आचरण की जांच के बाद मोदी ने उनके अधिकार छीनने में जरा भी विलंब नहीं किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सभाओं, गोष्ठियों और लालकिले की प्राचीर से भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी बिल्कुल बर्दाश्त न करने की बात करते हुए स्पष्ट कहा है कि मैं न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगा। पूर्ववर्ती सरकारें भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के दलदल में हमेशा फंसी रही और अनियमितताओं के चलते सरकारें बदलती रहीं, परन्तु सरकार की कार्य प्रणाली में बदलाव न हो सका और आने वाली सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार की भांति ही लोगों को ठगकर सामाजिक तानेबाने को प्रदूषित करती रही। साढ़े चार साल पहले केंद्र में मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार से वायदे के अनुरूप लोगों को अपेक्षा थी और इस सरकार ने दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ भ्रष्टाचार और घूसखोरी पर लगाम लगाने का प्रयास करते हुए सुशासन देने का सार्थक प्रयास किया है। फलतः देश आर्थिक व सुरक्षा दोनों दृष्टि से मजबूत हुआ है। इसलिये लोगों की प्रधानमंत्री के लिए पहली मजबूत पसंद नरेंद्र मोदी ही हैं, जिसका लाभ पार्टी को जनहित के कार्य करते हुए और चुनाव में सही व स्वच्छ साफ छवि के व्यक्तियों को टिकट देकर सुनिश्चित करना होगा। आज सारा विपक्ष मोदी सरकार पर भले कितने ही अनर्गल आरोप लगा रहा हो, लेकिन देश में भ्रष्टाचार व घूसखोरी को खत्म कर सुशासन को लेकर जनता उनके साथ खड़ी है। यहां से आगे अब मोदी के नेतृत्व व भाजपा की जीत की पटकथा सुनिश्चित करने हेतु पार्टी को दिखावे की राजनीति को दरकिनार कर समाज व देशहित के कार्य करते रहना होगा। यदि कहीं भी आज देश की जनता को किसी समय यह लगा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर होता जा रहा है, तो जनता के रुखसत हो जाने से 2019 के चुनावी परिणामों से बड़ा धक्का भी लग सकता है। अतः पार्टी को अपने सिद्धांतों और विचारधारा में किसी भी स्थिति में ढील न देकर जनाकांक्षाओं के साथ पूरे मनोयोग और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना है।

यशपाल बालियान (शोरम)

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