राजनीति: हरियाणा में समय पूर्व चढ़ा सियासी पारा

राजनीति: हरियाणा में समय पूर्व चढ़ा सियासी पारा

महाभारत की रणभूमि कुरुक्षेत्र वाले हरियाणा राज्य में चुनाव अभी दूर हैं किंतु पक्ष -विपक्ष के नेताओं के आमद -रफ्त एवं उनकी गतिविधियों ने गर्मी के साथ ही सियासी पारा चढ़ा दिया है। यहां भाजपा ने हुंकार रैली के माध्यम से मिशन 2019 का आगाज कर दिया है दूसरी तरफ इंडियन नेशनल लोकदल बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन कर चुनाव लडऩा तय कर लिया है, वहीं कांग्रेस रैली कर अपनी मौजूदगी का अहसास करा रही है।
हरियाणा को वैदिक कालीन संस्कृति एवं नाम के कारण जाना जाता है इसे जाट भूमि या जाटलैंड भी कहा जाता है। कभी इसे 3 लालों की कर्मभूमि भी कहा जाता था। तब हरियाणा के तीन लाल बंसी, भजन और देवीलाल का जुमला प्रसिद्ध था। इस राज्य में एक समय ऐसा भी आया था जब यह दल बदल एवं दलबदलुओं के कारण ख्यात हो गया था। अब यहां 2014 से भाजपा की सरकार है और मनोहर लाल खट्टर यहां मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री 63 वर्षीय मनोहर लाल खट्टर वर्तमान दौर में किस्मत के सबसे धनी नेता माने जाते हैं। साधारण कृषक परिवार के खट्टर फेरी लगाकर कपड़े की दुकान लगाते एवं कपड़े बेचा करते थे। बाद में दिल्ली में स्थाई रूप से कपड़े की दुकान खोल ली। वह युवावस्था से ही संघ एवं भाजपा से जुड़े थे। 2014 में पार्टी ने पहली बार इन्हें विधानसभा चुनाव में उतारा और वह चुनाव जीत गए। इतना ही नहीं, पार्टी ने उन्हें विधायक दल का नेता चुन कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया जबकि तब खट्टर विधायिका एवं प्रशासनिक अनुभव शून्य थे।
मनोहर लाल खट्टर अविवाहित हैं, इसलिए वह पार्टी, राजनीति और अपनी सरकार को भरपूर समय दे रहे हैं किंतु उनके कुर्सी पर बैठने के बाद जाट आंदोलन एवं राम रहीम प्रकरण प्रकाश में आया जिससे हरियाणा राज्य रह रह कर जलता, थर्राता एवं अशांत रहा। उन्हें समय पर एवं सटीक निदान करने एवं उसे काबू में करने में वह नाकाम रहे जिसके कारण सरकार एवं भाजपा की बड़ी फजीहत हुई।
हरियाणा में भाजपा की खट्टर सरकार का यह चौथा वर्ष चल रहा है। लिहाजा यहां अगले वर्ष विधानसभा का चुनाव होगा एवं लोकसभा का आम चुनाव भी होना है इसीलिए समय पूर्व सभी विरोधी दल खट्टर सरकार को टक्कर देने से पहले से हाथ पैर मारने लगे हैं। भाजपा भी सत्ता बचाने के लिए हुंकार रैली कर हुंकार भरने लगी है ।
यहां की राजनीति में भाजपा, कांग्रेस, बसपा एवं क्षेत्रीय दल इंडियन नेशनल लोकदल का प्रभाव है किंतु अबकी बार दिल्ली समीप होने के कारण इस चुनाव में आम आदमी पार्टी एवं अन्य के उतरने की भी संभावना है। इसका मतलब हरियाणा का आगामी चुनाव विकट चुनौतियों वाला होगा। यहां के विधानसभा में इस समय भाजपा 47, इनेलो 19 एवं कांग्रेस 15 सीटों पर है तथा शेष पर अन्य हैं। हरियाणा की आबादी लगभग 2.53 करोड़ है। यह मध्यम बसाहट वाला कृषि आधारित राज्य है। राज्य में 75.5 प्रतिशत साक्षर हैं एवं यह 22 जिलों में विभाजित है। यह हरियाणवी, पंजाबी एवं हिंदी भाषी राज्य है। चंडीगढ़, हरियाणा एवं पंजाब दोनों राज्य की संयुक्त राजधानी एवं यहाँ दोनों का हाई कोर्ट है। यह शत प्रतिशत कृषि सिंचित राज्य है एवं राज्य के सभी ग्राम विद्युतीकृत हैं। यह उद्योग में भी अग्रणी है एवं दूध उत्पादन में भी बेहतर राज्य है।
हरियाणा कृषि कचरा की समस्या से त्रस्त है। इसका निदान नहीं है इसीलिए इस कचरे को जलाने की मजबूरी है जिसके धुएं एवं प्रदूषण से दिल्ली तक परेशान है। यहां 879 महिलाओं की तुलना में 1000 पुरुष हैं। यहां स्त्री पुरुष अनुपात सबसे खराब है। यह कन्या भ्रूण हत्या एवं लड़कियों के प्रति तंग नजरिये को उजागर करता है। यहां इसे सुधारने की हर कोशिश नाकाम है।
राज्य में पेंशन एवं मजदूरी दर बेहतर है। यहां प्रति व्यक्ति सालाना आय डेढ़ लाख रू से अधिक है। विधानसभा में 90 सीटें हैं जिसमें 17 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं जबकि राज्य में 49 प्रतिशत जाट, 22 प्रतिशत दलित, 17 प्रतिशत ओबीसी, 13 प्रतिशत अगड़ी 8 प्रतिशत मुस्लिम एवं मात्र 3 प्रतिशत आदिवासी हैं तथा शेष अन्य हैं। जाट बहुलता के कारण यहां की राजनीति में उन्हीं का दबदबा एवं प्रभाव है। यहां अब तक के अधिकतर मुख्यमंत्री उन्हीं में से बने हैं। ये मेहनती हैं। कृषि एवं अनाज उत्पादन सब में उन्हीं का दबदबा है जिनकी खाप पंचायतें प्रसिद्ध हैं।
टारगेट 2019 के सिलसिले में अमित शाह की रैली बड़े नेताओं की मौजूदगी के बाद भी कुछ कमजोर रही जबकि जींद रैली में केंद्र एवं राज्य के मंत्रियों की मंच पर मौजूदगी थी। इस रैली के कमजोर होने एवं भीड़ कम जुटने के कारण भाजपा की प्रदेश इकाई अभी से चिंता में पड़ गई है। यहाँ अगले विधानसभा चुनाव के लिए इनेलो बसपा ने गठबंधन कर अभी से तैयारी कर ली है। वह आगे महागठबंधन का हिस्सा बनने को आतुर हैं। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा भी सभा एवं रैली कर रहे हैं। खट्टर ईमानदार एवं सीधे साधे हैं जबकि इसकी तुलना में कांग्रेस के हुड्डा एवं इनेलो के चौटाला तिकड़मी एवं दागदार हैं।
अमित शाह की जींद रैली को भाजपा के मिशन 2019 का आगाज माना जा सकता है। इस युवा हुंकार रैली में अमित शाह ने एक साथ कई राजनीतिक हित साधे हैं। इसे 2019 के विधानसभा चुनाव एवं लोकसभा दोनों चुनाव का आगाज माना जा सकता है। ध्यान रहे हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली सभी आसपास हैं एवं जाट बहुल क्षेत्र हैं।
- सीतेश कुमार द्विवेदी

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