Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • देव-मूर्तियों पर दान का अंबार?

    पिछले कुछ वर्षों में प्रसिद्ध मंदिरों और आश्रमों में करोड़ों-अरबों रुपयों के सालाना चढ़ावे के समाचार प्रकाशित होते आ रहे हैं। दानदाताओं द्वारा बहुमूल्य धातुओं के छत्र, द्वार, घंट और आभूषण भी आस्थालयों में अर्पित किए जाते रहे हैं। यह निश्चय ही ईश-आस्था का प्रमाण है। मंदिरों-आश्रमों को ज्ञात और...

  • विश्लेषण: भयंकर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है भारत

    नरम घरेलू उपभोग, स्थायी निवेश में धीमी वृद्धि तथा सुस्त निर्यात के कारण 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त पडऩे के संकेत मिल रहे हैं। यह बात वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताई गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने फरवरी महीने में 2018-19 की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.20...

  • कागज की नाव पर सवार कर्नाटक की सरकार

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का हालिया बयान कि वे कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री हैं, कई मायनों में खास है। इस बयान से कर्नाटक की राजनीतिक उथल-पुथल, सांठ-गांठ और बेमेल गठजोड़ को भली भांति समझा जा सकता है। कुमारस्वामी ने यह बयान देने के बाद सफाई भी पेश की लेकिन जाने-अनजाने ही सही, कुमारस्वामी...

  • जरदारी की गिरफ्तारी के निहितार्थ

    पाकिस्तान की अंदरूनी घटनाएं अब चौंकाती नहीं, बल्कि वहां कुछ नाटकीय न हो, तो यह जरूर चकित करता है। पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मनी लॉन्ड्रिंग के केस में नेशनल अकाउंंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) द्वारा गिरफ्तारी कानूनी कवायद से ज्यादा पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत से प्रेरित है। जरदारी को जिस मामले...

  • आर्थिक गतिशीलता से लक्ष्य संभव

    नरेन्द्र मोदी द्वारा दोबारा प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद आर्थिक मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिशीलता की संभावनाएं बढ़ी हैं। अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत में नयी सरकार मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर, बैंकिंग सेक्टर, कार्पोरेट सेक्टर, निर्यात, ई-कॉमर्स, ग्रामीण विकास, भूमि एवं श्रम...

  • विश्लेषण: जीत प्रत्याशी की नहीं, देश में लोकतंत्र की ही होगी

    इस बार देश लोकतंत्र का (17) सत्तरहवां महापर्व मना रहा है। देश में लोकसभा का चुनाव हो रहा है। इस महापर्व का प्रथम चरण समाप्त हो चुका है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके चुनाव और चुनाव प्रक्रि याओं पर विश्व की नजर लगी रहती है। जिस तरह बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के सामान्यत: इतने बड़े देश...

  • राजनीति: बेनीवाल को अपने पाले में लाकर भाजपा ने बड़े नुकसान से बचा लिया?

    भाजपा ने राजस्थान में कांग्रेस को पछाड़ कर हनुमान बेनीवाल का साथ हासिल कर लिया है। अंत तक सूचनाएं हवा में तैर रही थीं कि बेनीवाल की आरएलपी और कांग्रेस में बातचीत चल रही है। दोनों में गठबंधन की खबर किसी भी क्षण आ सकती है लेकिन हुआ एकदम उलटा। आरएलपी अब राजस्थान से एनडीए का हिस्सा बन गई है। इसी गठबंधन...

  • क्या सुमित्रा खुद ही जिम्मेदार: राजनीति से यूं तकलीफदेह रवानगी के लिए

    सत्ता का सुख बड़ा ही बेहूदा होता है। इसका लालच भी हद दर्जे का होता है। जब सत्ता का सुख अपने हाथ से जाते दिखे तो तमाम ढोंग रचने पड़ते हैं यानी इसको बचाने के लिए साम-दाम-दंड भेद के साथ ही प्रेशर पोलिटिक्स भी करना पड़े तो हया किस बात की। वैसे भी अब राजनीति में सुचिता, आत्म सम्मान का क्या काम। गर...

  • राष्ट्ररंग: देश में ही रहकर देश का विरोध करना कैसी देशभक्ति

    भारत की वर्तमान राजनीतिक दशा व लोगों की विचारधारा को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि देश की एकता और अखण्डता ज्यादा दिन बनी रह सकती है। आज सभी लोग केवल अपनी विचारधारा और समर्थन बढ़ाने के लिए हर हद तक जाने के लिए तैयार हैं। हालांकि सब का तर्क तो यही है कि उनका कार्य भारत के विरोध के लिए नहीं बल्कि किसी...

  • राष्ट्ररंग: एक विचार यह भी

    हर दूसरे मोबाइल में फिंगर प्रिंट स्कैनर है। दस प्रतिशत को छोड़कर लगभग हर आधार होल्डर की अंगुलियों के निशान उपलब्ध हैं। अरबों रुपये की लागत आती है चुनाव में। करोड़ों कर्मचारियों को भत्ता देना, लाखों वाहन और करोड़ों का डीजल-पेट्रोल, जो चुनाव ड्यूटी में लगे हैं उनके काम काज की क्षति तथा करोड़ों की...

  • विश्लेषण: क्या पाकिस्तान कभी समझ सकेगा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को?

    भारतीय जनता पार्टी के नरेन्द्र मोदी ने प्रधान मंत्री पद की शपथ 26 मई 2014 को ली थी और उन्होंने भारत के सभी पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था। उसके उपरान्त नरेन्द्र मोदी की सारी कोशिशें पड़ोसी देशों के साथ मित्रता का संबंध स्थापित करने की रही। देश की जनता की...

  • मुद्दा: कहीं से भी मतदान का अधिकार हो

    स्वस्थ लोकतंत्र की पहली निशानी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने मतदान के अधिकार या कर्तव्य का इस्तेमाल करें। बढ़ती सोच, समझ और साधन के बावजूद पिछले सात दशक में मतदान प्रतिशत में अपेक्षित बढ़ोत्तरी न होना चिंता का विषय है। मेरे एक वोट से क्या बदल जाएगा? जैसी मानसिकता से उबरना होगा। एक वोट से बहुत...

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