Read latest updates about "सोशल चौपाल" - Page 1

  • राजनीति: बूढ़ी कांग्रेस...राहुल का मुकुट बचाने की कवायद!

    अपनी 133 जयंतियां मना चुके और स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्व का दावा करने वाले देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में नया बदलाव किया गया है। वैसे तो यह बदलाव केवल समाचार पत्रों के कालमों तक ही सीमित रहने के योग्य है परंतु इसके पीछे नेहरु-गांधी परिवार में राजनीतिक असुरक्षा की बढ़ती भावना और...

  • राष्ट्ररंग: विधेयक बन जाने भर से घूसखोरी से मुक्ति नहीं मिलेगी

    कोई घूस देकर काम करा लेता है तो कोई नियम-कानून की दुहाई देता फिरता है और बेचारा परेशान रहता है। आलम यह है कि घूस देना और लेना स्थायी भाव सरीखा हो गया है। हम सबको बिलकुल भी गैर जायज-असहज नहीं लगती यह बुराई। इसी मानसिकता से उबरना है। बुरा लगना चाहिए। हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक-2018...

  • मुद्दा: माब लिंचिंग - कौन है जिम्मेदार, क्या है समाधान

    आज के समय में हत्यारी भीड़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। न यह प्राकृतिक आपदा है और न दैवीय विधान बल्कि विशुद्ध रूप से मानव जनित सोची - समझी चाल के तहत अपने लिए भीड़ जुटाना और इस्तेमाल करना है जिसमें एक या एकाधिक निर्दोष लोग अकारण हताहत हो जाते हैं। माब लिंचिंग जिसको हिन्दी में भीड़ हत्या या...

  • तोडऩा होगा गरीबी का मकडज़ाल

    भारत गांव में रहता है। जो अनपढ़ है, आधुनिकता रहित है, साधनहीन है, महत्त्वाकांक्षी नहीं है, आज केवल वही गांवों में रहता है। जो उन्नति करना चाहता है, कुछ कर दिखाना चाहता है, उसे गांव छोड़कर शहर की तरफ भागना पड़ता है। सफलता उसे तभी मिलती है जब गांव छोड़ देता है। प्रत्येक परिवार के जो सदस्य गांव के...

  • विश्लेषण: सर्जिकल स्ट्राइक भाजपा की एक अनुपम रणनीति

    सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पचास तरह के अनुमान और व्याख्याएं हो सकती हैं। लोग अपने अपने हित के गणित के अनुसार कर भी रहे हैं, की जानी भी चाहिए क्योंकि राजनैतिक गुणावगुणों के अनुसार सारे राजनैतिक दल अपने अपने हितों के अनुसार इसकी व्याख्या करेंगे। एक स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए यह आवश्यक भी...

  • बहस: कश्मीरी नेताओं के अनर्गल प्रलाप के पीछे उनका व्यक्तिगत स्वार्थ है, कोई जनहित नहीं

    कश्मीरी नेताओं के अनर्गल प्रलाप के पीछे उनका व्यक्तिगत स्वार्थ है, जनहित जैसी कोई खास बात नहीं। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं- गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज की हालिया बयानबाजी भी इसका अपवाद नहीं है। इस पर बीजेपी नेताओं की जो प्रतिक्रिया आ रही है, वह भी राजनीतिक ज्यादा है, व्यावहारिक कम। यह कटु सत्य...

  • प्रश्न चिन्ह: क्या अमेरिकी इशारे पर चलेगा भारत या फिर चुकाएगा बड़ी कीमत?

    पिछले डेढ़ दशक में भारत-अमेरिकी सम्बन्ध जितनी तेजी से आगे बढ़े हैं, अब उस पर ब्रेक लगने के स्पष्ट आसार नजर आ रहे हैं क्योंकि आगे पारस्परिक उलझाऊ रिश्तों का पहाड़ है तो पीछे आपसी विश्वासघात की खाई, जिस पर लुढ़कना खतरे से खाली नहीं। ऐसा इसलिए कि अमेरिका भारत को अपने वैश्विक हितों के मुताबिक मोहरा...

  • पक्ष या विपक्ष नहीं, मुद्दों पर वैचारिक गठबंधन के बहुमत से हों फैसले

    कर्नाटक में आये वर्तमान जनादेश तथा ऐसे ही पिछले अनेक खण्डित चुनाव परिणामों से वर्तमान संवैधानिक प्रावधानों में संशोधन की जरूरत लगती है। सरकार बनाने के लिये बड़ी पार्टी के मुखिया को नहीं वरन चुने गये सारे प्रतिनिधियों के द्वारा उनमें आपस में चुने गये मुखिया को बुलाया जाना चाहिये। आखिर हर...

  • राजनीति: क्या क्षुद्र राजनीति के कठघरे में है विपक्षी एकता का सवाल?

    जब जब राजनैतिक अवसरवाद की वजह से विरोधी दलों की स्वार्थपरक मिलीभगत को विपक्षी एकता का अमलीजामा पहनाया जाता है तो कतिपय सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि जनहित के मद्देनजर विपक्षी एकता के जो मायने होने चाहिए, वो यहां बिलकुल कम या फिर नहीं के बराबर दिखाई देते हैं, खासकर तब जब कांग्रेस अथवा बीजेपी जैसी...

  • राजनीति: हरियाणा में समय पूर्व चढ़ा सियासी पारा

    महाभारत की रणभूमि कुरुक्षेत्र वाले हरियाणा राज्य में चुनाव अभी दूर हैं किंतु पक्ष -विपक्ष के नेताओं के आमद -रफ्त एवं उनकी गतिविधियों ने गर्मी के साथ ही सियासी पारा चढ़ा दिया है। यहां भाजपा ने हुंकार रैली के माध्यम से मिशन 2019 का आगाज कर दिया है दूसरी तरफ इंडियन नेशनल लोकदल बहुजन समाज पार्टी ने...

  • पास पड़ोस: भारत के प्रति अडिय़ल रवैय्या छोड़ें ओली

    नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली की पहचान भारत विरोधी रही है। उन्होंने कभी भी अपने पड़ोसी मुल्क के साथ संबंध अच्छे रखने की पहल नहीं की लेकिन अब माहौल बदला हुआ है, इसलिए उनकी भारत से संबंध मधुर करने की कुछ मजबूरियां भी हो सकती हैं। नेपाल चीन के विस्तारवादी दंश के गिरफ्त में है। सर्वविदित है कि चीन...

  • मुद्दा: भारत का इकतरफा संघर्ष विराम-क्या अच्छा होगा अंजाम

    महबूबा मुफ्ती की अपील पर केंद्र सरकार द्वारा इकतरफा बिना शर्त संघर्ष विराम की घोषणा करने की कुछ लोगों को छोड़कर अधिकाँश लोगों द्वारा आलोचना की जा रही है। राजनीति, युद्ध और अनवरत संघर्ष की बारीकियों से अपरिचित जनसाधारण के लिए यह एक दोषपूर्ण फैसला हो सकता है। होना भी चाहिए। वह समझ रही है कि जब,...

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