रहस्य रोमांच: जब महिलाएं वृक्षों से चिपक गईं

रहस्य रोमांच: जब महिलाएं वृक्षों से चिपक गईं

भारत विविधता का देश है और यहाँ पर अनेक ऐसी घटनाएं प्राय: घटित होती रहती हैं जिससे आस्था की जड़ और भी मजबूत होती रहती है। कुछ वर्ष पूर्व पूरे देश में एक साथ गणेश जी की प्रतिमाओं द्वारा दूध पीने की घटना घटित हुई थी। इस घटना के पीछे भले ही वैज्ञानिक कारण कुछ भी रहा हो परन्तु दो दिनों के अन्दर-अन्दर लाखों लिटर दूध गणेशजी को अर्पित कर दिया गया था।
जब भी कोई ऐसी विचित्र घटना घटती है तो इसका सबसे अधिक प्रभाव औरतों पर ही पड़ता है क्योंकि इस देश की औरतों में आस्था एवं विश्वास कूट-कूट कर भरा हुआ है। इस प्रकार की घटनाओं को 'अन्ध विश्वास' के दायरे में भी लाया जाता है किंतु जब कोई स्वयं प्रत्यक्ष देखता है तो उसमें आस्था एवं विश्वास की जड़ें और भी गहराई तक जाकर जम जाती हैं।
कुछ वर्ष पूर्व दिनों बिहार के अनेक भागों में युवतियों के महुआ के पेड़ों से चिपक जाने की खबर एक आश्चर्यजनक सत्य थी। एक माह के अन्दर भिन्न-भिन्न स्थानों पर महुआ के पेड़ से दर्जनों युवतियां व लड़कियां चिपककर बेहोश हो गईं। होश आने पर उन सभी ने यही बताया कि हम उसका वर्णन नहीं कर सकते कि बेहोशी की अवस्था में हमने क्या देखा?
25 अक्टूबर 2004 से 12 नवम्बर 2004 के दौरान बिहार के पटना, फतुहा, बाढ़ आदि अनेक स्थानों पर महुआ के पेड़ से नवयुवतियों के चिपकने की घटनाएं घटित होती रही। मौके पर स्थानीय पुलिस एवं अनेक वैज्ञानिक भी पहुंचे लेकिन इस घटना को सभी ने एक अलौकिक चमत्कार ही कहा।
विवरण के अनुसार पटना जिला के बाढ़ नामक स्थान पर बासोबागी गांव में महुआ वृक्ष की पूजा करने आठ लड़कियां गईं। पूजा के बाद जैसे ही वे उठना चाहती थीं। अचानक ऐसा लगा जैसे वृ़क्ष उन्हें अपनी ओर खींच रहा है। वे सभी वृक्ष के तने से जाकर चिपक गईं और बेहोश हो गईं। कुछ अन्य महिलाएं उन्हें जब छुड़ाने के लिए गईं तो वे भी पेड़ से चिपककर बेहोश हो गईं। वे सभी दो घंटे तक बेहोशी की अवस्था में पेड़ से चिपकी रहीं।
इस बीच थाने को सूचित किया गया। सिपाही आये और आगे बढ़कर महिलाओं को छुड़ाने लगे किन्तु वे अपने प्रयास में कामयाब नहीं हो सके। आश्चर्य तो तब हुआ जब वे पुरूष उक्त पेड़ से नहीं चिपके। इस दौरान हजारों की संख्या में भीड़ जुट गई और दैवी प्रकोप मानकर भजन-कीर्तन शुरू हो गया। दो घन्टे के बाद स्वत: ही सारी महिलाएं पेड़ के चंगुल से छूट गईं और उनकी बेहोशी भी दूर हो गई।
वृक्ष से अलग होने के बाद सभी महिलाओं एवं बालिकाओं को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया। उन सभी का रक्तचाप बढ़ा हुआ था। पूछने पर उन सभी ने यह बताने से इंकार कर दिया कि बेहोशी की अवस्था में उन्हें किस प्रकार का अनुभव हुआ।
इसी प्रकार फतुहा (पटना) के दनियावां प्रखण्ड के अन्तर्गत छोटी केवई नामक गांव में महुआ के पेड़ के नीचे पूजा करने गईं लगभग एक दर्जन युवतियां बेहोश होकर गिर पड़ी। इस गांव में एक देवी का मन्दिर है। वहीं पर कुछ महुआ के छोटे-छोटे पौधे लगे हैं। महुआ पेड़ की पूजा करके युवतियां अपने लिए उचित जीवन साथी को पाने की कामना किया करती हैं। इसी क्रम में युवतियां बेहोश हो गई थी और दो घन्टा बाद ही उन्हें होश आया था। वे भी इस संबंध में कुछ नहीं बता सकी। लगातार तीन दिनों तक उस स्थान पर ऐसी घटना घटती रही।
पटना सिटी के एक नीम के वृ़क्ष से भी युवतियों के चिपक जाने की घटना इन्हीं दिनों घटित हुईं। कुछ युवतियां बाजार से सामान लेकर घर जा रही थी। एक बच्ची को पेशाब लगा। वह नीम के पेड़ की ओट से पेशाब करने चली गयी। जब बहुत देर तक वह वापस नहीं आई तो उसकी सहेलियां उस स्थान पर पहुंची। जहां वे भी बेहोश हो गई। वे चिल्ला रही थीं और बारी-बारी से बेहोश होकर गिर रही थी। उन्हें भी दो घन्टे बाद ही होश आया। वे भी इस बेहोशी का विवरण नहीं दे सकीं।
उपरोक्त घटनाओं पर अगर ध्यान दिया जाय तो हम इसे 'अंध विश्वास' कहकर नहीं टाल सकते क्योंकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति के अनेक स्थानों पर एक माह के अन्दर हुई। इस घटना के बाद महिलाओं में वृक्षों के प्रति अपार श्रद्वा जागृत हो गई है और लोग जगह-जगह वृक्षों की पूजा करने लगे हैं।
-पूनम दिनकर

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