गर्भवती के पेट, माथे, बांह पर भी विज्ञापन

गर्भवती के पेट, माथे, बांह पर भी विज्ञापन

ग्लोबल विलेज की कल्पना व उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते विज्ञापन महत्त्वपूर्ण हो गया है। आज किसी भी उत्पाद के लिए विज्ञापन महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।
विज्ञापन के जरिये ही वह वस्तु उपभोक्ताओं तक पहुंचती है। ऐसा कोई भी उत्पाद जिसका विज्ञापन उपभोक्ता ने देखा पढ़ा या सुना न हो, वह लेना पसंद ही नहीं करता।
विज्ञापन संस्कृति के युग में हर चीज एक विज्ञापन बनकर रह गई है। कंपनियां विज्ञापन के लिए नये नये आइडियाज ढूंढती रहती हैं। कुछ लोग खुद की कंपनियों को प्रपोज करते हैं कि हम विज्ञापन हेतु प्रस्तुत हैं।
जितनी सनसनी फैलाने वाला विज्ञापन होगा, उतनी ज्यादा बिक्री की संभावना होगी।
अमेरिका ओमाहा के 20 वर्षीय एन्डयू फिशर ने अपना माथा विज्ञापन के लिए किराये पर दिया। एक दवा कंपनी ने उसके साथ 37 हजार 375 डालर में एक महीने का करार भी कर लिया। इसके तहत उसे अपने माथे पर कंपनी का लोगो चिपकाये घूमना था। माथे पर लोगों जनता का ध्यान तो खींचेगा ही। बस कंपनी को लगा यह विज्ञापन का अनूठा व प्रभावी तरीका है। अब फिशर आगे अन्य कंपनियों को भी यह स्थान देगा ही।
इससे प्रेरित भारत पुणे के प्रतीक पटेल ने भी अपना माथा विज्ञापन हेतु देने के लिए बाजी डाट काम पर विज्ञापन दे दिया। उनका कहना था इसको किराये पर देने के लिए नीलामी कराऊंगा।
उधर न्यूयार्क में इन दिनों विज्ञापन बोर्ड के रूप में अपना शरीर प्रस्तुत करने का टें्रड चल पड़ा है। जिये टोमरागो नाम 31 वर्षीय व्यक्ति ने अपना शरीर के अलग- अलग हिस्से विज्ञापन हेतु देने का निर्णय लिया है। उसकी दाहिनी बांह तो मार्था स्टीवर्स की एक वेबसाइट ने 500 डालर में विज्ञापन हेतु खरीद ही ली। टोमरागो ने इस बांह पर स्थयी टेटू(लोगो) गुदवा लिया है।
कंपनियों का मानना है कि विज्ञापन का यह तरीका है जो उपभोक्ता को भीतरी मन तक प्रभावित कर डालता है।
न्यूयार्क रासवेल की रहने वाली एक महिला एलिस हार्प ने आठ माह की गर्भावस्था में अपना पेट विज्ञापन हेतु विज्ञापित किया। हार्प का कहना था कि यह एडवरटाइजिंग स्पेस ज्यादा लोगों को प्रभावित करेगा। उनका पेट विज्ञापन हेतु किसी कंपनी ले लिया या नहीं, पता नहीं चल पाया किंतु होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए धन जुटाने का यह नायाब तरीका था। एलिस हार्श एक तलाकशुदा महिला है।
इधर बांग्लादेश की तलाकशुदा महिला शेफाली ने अपनी ढाई साल की बच्ची की परवरिश हेतु अपनी आंखें बेचने का विज्ञापन दे डाला।
विज्ञापन की दुनिया अजीब है। इसमें कोई मजबूरीवश तो कोई शौकिया आया है। वैसे आपका क्या इरादा है विज्ञापन से पैसा कमाने के बारे में।
- अनिल शर्मा अनिल

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