फलों का राजा है वास्तव में आम

फलों का राजा है वास्तव में आम

वृक्षपूजा में आम का पीपल की भांति महत्त्व है। जब भी किसी धार्मिक पाठ, यज्ञ या हवन आदि की योजना बनाई जाती है तो आम के पेड़ की पत्तियों को माला के रूप में पिरोकर घर के दरवाजों पर टांगा जाता है। विवाह मंडपों में यदि आम की पत्तियां न लगें तो उसकी शोभा अधूरी ही जान पड़ती है। इसकी इस महत्ता के कारण इसे पिकवल्लभ, आम्रफलानि, मधुदूत, रत-रसाल जैसे नाम दिये गए हैं।
इसे आयुर्वेद ग्रन्थों में आम्र कहा गया है। इसकी पांच सौ से अधिक किस्में हैं लेकिन मुख्य रूप से प्रचलित किस्में-सफेदा, लंगड़ा, सरोली, दशहरी, चोसा, हापुस, फजली व तोतापुरी और सिंदूरी हैं। मलियाबाद का दशहरी आम सारे भारत में प्रसिद्ध है।
आम का उत्पत्ति स्थल दक्षिणी एशिया क्षेत्र है। इसमें भारत, फिलीपिन्स, न्यूग्वाइना को सम्मिलित किया जाता है। इसकी कृषि कम से कम 6000 वर्षों से की जा रही है। इसे भारत, इण्डोनेशिया व अफ्रीका में बहुतायत में उगाया जाता है। भारत में यह उत्तर-प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, आन्ध्र-प्रदेश, पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में खूब उगाया जाता है।
इसके वृक्ष की ऊंचाई लगभग 25 मीटर होती है। पत्तियों का एक गुम्दाकार ताज बना होता है। इसमें छोटे गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं। इसके फल आकृति में अण्डाकार या आयतरूपी व चोंचयुक्त होते हैं। पके आम जून से सितम्बर तक उपलब्ध होते हैं।
आम के गूदे से आम के पापड़, जैम, मीठा अचार मुरब्बा बनाया जाता है। कच्चे फल से अमचूर तैयार होता है। इसके रस को विभिन्न खाद्यान्नों के साथ प्रयोग में लाया जाता है।
आम के गूदे का रसायनिक संगठन:- अच्छी किस्म के 100 ग्राम-आम के गूदे में नमी 81.0 प्रतिशत, प्रोटीन 0.6 प्रतिशत, वसा 0.4 प्रतिशत, मिनरल्स 0.4 प्रतिशत, फाइबर 0.7 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट्स 16.9 प्रतिशत, कैल्शियम 14 मिलीग्राम, फारफोरस 16 मिलीग्राम, आयरन 1.3 मिलीग्राम, विटामिन सी 16.0 प्रतिशत, थोड़ी मात्र में विटामिन बी काम्पलेक्स और ऊर्जा 74 कैलोरी की मात्रा निश्चित होती है।
औषधीय गुण:- आम में विटामिन ए अन्य फलों की अपेक्षा अधिक होता है। अत: यह आंखों की ज्योति बढ़ाने व कब्ज को दूर करने में पूर्ण सक्षम है।
पूर्ण रूप से पका हुआ आम बलवद्र्धधक होता है। यह हृदय को ताकत पहुंचाने वाला है बशर्ते इसका सेवन विधिपूर्वक नित्य किया जाए।
खांसी के संबंध में योग है कि सूखी खांसी होने पर यदि आम को उपलों की आग में भूनकर खाया जाए तो रोगी को लाभ पहुंचाता है।
आम के रस का सेवन दही के साथ किया जाए तो वह बवासीर के लिए एक उत्तम दवा है। आम के रस का सेवन दूध के साथ किया जाना एक हेल्थ टॉनिक का काम करता है। यह पेय पित्तनाशक होता है।
कच्चा आम गर्मियों में विशेषकर लाभकारी है। इसे भूनकर लू लगने की स्थिति में भुने हुए जीरे, नमक व शक्कर के साथ प्रयोग किया जाये।
आम का रस यदि पिसी हुई सोंठ के साथ सुबह-शाम लिया जाये तो यह कमजोर पाचन शक्ति को सुदृढ़ करता है।
आम ही नहीं, इसकी गुठली भी औषधि स्वरूप प्रयोग में लाई जा सकती है। डॉ. अमन के अनुसार आम की गुठली नारी जननांगों के लिए बहुत उपयोगी है।
इनके अनुसार छिलका उतारकर इसकी गुठली को पीस लें। इस तरह जो पेस्ट तैयार हो, उसे एक चम्मच की मात्र में लेकर योनि की अंदरूनी दीवारों पर लगायें। यह श्वेत-प्रदर तथा योनि की अन्य बीमारियों में भी लाभकारी है। प्रसव के कारण यदि योनि ढीली पड़ गई हो तो इसके प्रयोग से उसमें कसाव आ जाता है।
आम की गुठली को फिटकरी के साथ बारीक पीसकर मंजन तैयार करें। यह मंजन पायरिया रोग के लिए अति उत्तम उपचार है।
आम का सेवन करते वक्त यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आम खट्टा तो नहीं है क्योंकि खट्टा आम मंदाग्नि, विषम ज्वर वद्र्धधक होता है। उपरोक्त के संबंध में रोगी ध्यान दें कि किसी प्रकार का उपचार स्वयं न करके चिकित्सक से ही करायें तो बेहतर होगा।
-राजेन्द्र सिंह सैनी

Share it
Top