दही के गुण अनेक

दही के गुण अनेक

हमारे देश में दही का प्रयोग भोजन एवं मांगलिक कार्यों में प्राचीन काल से होता आ रहा है। भारतीय परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ या शादी विवाह जैसे अवसरों पर दही का प्रयोग शुभ-संकेत माना जाता है। कई शुभ अवसरों पर दही का तिलक लगाने की भी प्रथा है। खाद्य-पदार्थ के रूप में दूध की अपेक्षा दही को अधिक गुणकारी मानकर सभी उम्र के लोग समान रूप से खाना पसंद करते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार दही का प्रयोग हर मौसम में किया जा सकता है क्योंकि अन्य खाद्य-पदार्थों की तुलना में दही में अधिक पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं। दूध से ही दही बनता है फिर भी दूध से दही अधिक सुपाच्य होता है। जानकार बताते हैं कि दूध की अपेक्षा दही निम्न कारणों से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
दही से बनी लस्सी पेट की ज्वाला शांत कर आमाशय और पाचन शक्ति को बढ़ा कर पेट में शीतलता लाती है इसलिए पेट के रोगियों के लिए दही या उससे बनी लस्सी वरदान साबित होती है।
- दूध की तुलना में दही में चिकनाई काफी कम होती है इसलिए दही कोलेस्ट्रोल को बढऩे नहीं देता। उच्च रक्तचाप या हृदय के रोगियों के लिए दही फायदेमंद है।
- दही में कैल्शियम की मात्रा दूध से अधिक होती है तथा दही 80 प्रतिशत फायदेमंद है।
- दही में विद्यमान बैक्टीरिया तथा पोषक तत्व शरीर के लिए एण्टीबायोटिक का कार्य करते हैं तथा शरीर को रोगाणुओं से लडऩे की क्षमता भी प्रदान करते हैं।
- दूध की अपेक्षा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस आदि के अलावा कई अन्य प्रकार के विटामिनों का संगठन विद्यमान होता है इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी दही अधिक पोषक माना गया है।
- औषधि के रूप में दही का प्रयोग घरेलू उपचार में भी किया जा सकता है।
- बताया जाता है कि अपच या अजीर्ण में दही की लस्सी बनाकर उसमें काला जीरा, नमक और काली मिर्च मिलाकर पीने से लाभ मिलता है। कब्ज, गैस, पेट की ऐंठन, आंत, दस्त जैसे पेट के रोगों में दही की लस्सी फायदेमंद होती है।
- आंखों में जलन होने पर दही की मलाई आंखों पर लगाने से आराम मिलता है। मुंह के छालों में जलन होने पर दही की मलाई छालों पर लगाने से जलन को समाप्त कर छालों को भी ठीक करती है।
- घरेलू उपचार में इसके अलावा पीलिया रोग, अनिद्रा, पित्त, शरीर का रूखापन, लू लगने पर, नकसीर आदि अनेक कष्टों से दही या इसकी मलाई एवं लस्सी निदान दिलाती है।
प्राचीन काल से ही वैद्यों के अनुसार 'पंचौषधि' या पंचामृत में दही को भी एक औषधि या अमृत का सेवन माना गया है। बताया जाता है कि दही का सेवन हमेशा करने से शरीर स्वस्थ तथा उम्र दीर्घायु होती है। दही का प्रयोग केवल भोजन की औषधि के रूप में ही नहीं अपितु श्रृंगार प्रसाधन के रूप में भी किया जा सकता है।
- दही में बेसन मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा निखरती है। इससे मुंहासे भी दूर होते हैं।
- गर्मी या तेज धूप में काम करने वालों को दही में नींबू या टमाटर का रस मिला कर लगाना चाहिए। ऐसा करने से चेहरे पर निखार आता है।
- दही में आटे का चोकर भिगो कर त्वचा पर मलने से त्वचा को पोषण मिलता है जिससे त्वचा में कांति आ जाती है।
- चेहरे पर क्लींजर के रूप में प्रयोग करने के लिए दही में संतरे का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की छटा में तेजी आती है।
- दही में मसूर की दाल रात भर भिगोकर रखें तथा सुबह उसे पीसकर पेस्ट बनाएं। उस पेस्ट में थोड़ी हल्दी, मक्खन और चन्दन मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा का रंग साफ हो कर निखर उठता है।
- दही में मुल्तानी (काली) मिट्टी मिला कर सिर के बालों में लगाने से यह शैम्पू की तरह कार्य करता है। ऐसा नियमित करने से बालों का झडऩा बन्द हो जाता है। इसके अलावा रूसी को हटाकर बालों को मुलायम बनाता है।
इसके अलावा दूध की अपेक्षा दही में अनेक गुण विद्यमान हैं। दही सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है।
- सारिका पाठक

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