गर्मी में आंत्रशोथ व अतिसार

गर्मी में आंत्रशोथ व अतिसार

गर्मी का मौसम सामने आते ही आंत्रशोथ एवं अतिसार की शिकायतें होने लगती हैं। वैसे इस मौसम में खसरा, चेचक, पीलिया, हैजा, अम्लपित, चर्मरोग, आदि का भी आक्रमण होता है किंतु आंत्रशोथ एवं अतिसार (डायरिया) से अधिक लोग पीडि़त नजर आते हैं।
सभी ऋतुओं के अपने-अपने खास रोग हैं । उपरोक्त दो रोग ग्रीष्म के खास रोग हैं। सभी ऋतु की अपनी क्षमताएं एवं विषमताएं, खासियत एवं खामियां हैं। इस मौसम में प्रचंड गर्मी का प्रकोप रहता है तो रसीले फलों की बहार रहती है।
ग्रीष्मकाल के सभी रोगों का संबंध खानपान एवं पाचन से है। दूषित आहार-विहार, दूषित पानी व पेय पदार्थ ये रोगजनक हैं। तेज धूप, बासी भोजन, दूषित वातावरण, कूड़ा-करकट, गंदगी, मच्छर, मक्खी ये सब मुसीबत की जड़ हैं जो हैजा, आंत्रशोथ व डायरिया देते हैं।
ग्रीष्मकाल की तीन बीमारियों आंत्रशोथ, अतिसार, हैजा होने के कारण, लक्षण, उपचार सब एक समान हैं। ये खानपान एवं पाचन की विषमता के कारण होते हैं। अतिसार डायरिया में मल द्रव के रूप में निष्कासित होता है। 5-6 बार शौच जाना पड़ता है। शरीर में पानी की कमी से आंखें अंदर धंसी हुई दिखाई देती हैं। त्वचा सूख जाती है। मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। प्यास बार-बार लगती हैं।
दस्त न रुकने पर यह प्राणघातक हो जाता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सा में देरी नहीं करनी चाहिए। आंत्रशोथ, अतिसार, हैजा की समान चिकित्सा की जाती है। शरीर में पानी की कमी नहीं होने दी जाती। ऐसी स्थिति में रेडिमेड या घर में बना जीवन रक्षक घोल देना चाहिए। एक गिलास पानी में एक चुटकी नमक व दो चुटकी शक्कर घोलकर देना चाहिए। यह घोल बार-बार देना चाहिए। नींबू शिकंजी भी लाभदायी है। प्याज, अदरक, मठा, जौ का सत्तू, पोदीन हरा, तरबूज, अनार, पपीता, ताजे भोजन में दही, मूंग चावल की खिचड़ी गेहूं का दलिया फायदेमंद होता है।
गर्मी में कोल्डड्रिंक्स नहीं, शर्बत, ठंडाई से लाभ:- गर्मी में कोल्ड डिं्रक्स का आकर्षण व स्वाद भले ही भाए पर ये स्वास्थ्य के लिए लाभदायी नहीं हैं जबकि परंपरागत शर्बत व ठंडाई सब के लिए सब दृष्टि से राहतदायी हैं। कोल्ड ड्रिंक्स से तात्कालिक स्वाद व राहत के अलावा कुछ नहीं नहीं मिलता अपितु उसके पीने के उपरांत गला सूखता है और प्यास बढ़ती है।
परंपरागत रूप से जल जीरा, लस्सी, शिकंजी, ठंडी चाय, छाछ, गुलाब, केवड़ा व खस ठंडाई शर्बत से सबको लाभ मिलता है। मधुमेह रोगी इसमें शक्कर के स्थान पर शुगर फ्री (कृत्रिम मिठास) का उपयोग कर सकते हैं। परंपरागत पेयों से ऊर्जा मिलती है, ग्रीष्म काल के रोगों से मुक्ति मिलती है।
पाचन सुधरता है। गैस से राहत मिलती है। भूख खुलकर लगती है। लू नहीं लगती। शरीर में पानी की कमी नहीं होती। घमौरियों का प्रकोप नहीं होता।
-सीतेश कुमार द्विवेदी

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