बाल कथा: बांधो मत पानी

बाल कथा: बांधो मत पानी

मछुआरों का एक गांव था। सभी मछुआरे सूरज निकलने से पहले ही मछलियां पकडऩे निकल पड़ते। दोपहर तक उन्हें हाट में बेचकर घर लौट आते। रात को नाचते-गाते और सो जाते। यही उनका जीवन क्रम था।
उसी गांव में बालू नाम का एक मछुआरा रहता था। उसकी तीन लड़कियां थीं। पत्नी माया और बच्चे काम में बालू की सहायता करते। लड़कियों के कारण बालू हमेशा चिंतित रहता। वह चाहता कि जल्दी से जल्दी खूब सारा पैसा इक_ा करे जिससे लड़कियों का विवाह धूमधाम से हो सके।
माया उसे बार-बार समझाती, 'चिंता करने की कोई बात नहीं है। समय आने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा। ईश्वर पर भरोसा रखो।
पर बालू जानता था, ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके ही बात बन सकती है। एक दिन सूर्योदय के समय वह तट पर बैठा था। तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा। बालू चौंक गया। उसने देखा, एक बूढ़ा लंबा लबादा और ऊंची टोपी पहने मुस्कुरा रहा है।
बूढ़े ने बालू से पूछा, 'क्या बात है? तुम किस चिंता में हो?
बालू ने अपनी चिंता का कारण बूढ़े को बता दिया। बूढ़े ने कहा, 'मैं तुम्हारी सहायता करूंगा पर बदले में तुम्हें उम्र भर मेरी देखभाल करनी होगी।
बालू खुशी से उछल पड़ा। बोला, 'मैं आपकी खूब देखभाल करूंगा। बस, मेरे पास इतना धन जमा हो जाए जिससे तीनों बेटियों की शादी अच्छी तरह कर सकूं।
बूढ़े ने समुद्र के तट पर एक बांस
गाड़ा और बांस में लंबी रस्सी बांध दी। फिर रस्सी को हाथ में लेकर मंत्र पढ़ा और रस्सी समुद्र में उछाल दी। रस्सी पानी में डूब गई। उसका एक सिरा बांस में बंधा दिखाई दे रहा था।
उसी दिन से समुद्र की सारी मछलियां उस गांव के मछुआरों के जाल में आने लगीं। मंत्र के प्रभाव से वे रस्सी से आगे नहीं जा पाती थीं। थोड़े ही दिनों में गांव के दूसरे मछुआरों के साथ-साथ बालू भी संपन्न हो गया। वह धन-संपत्ति की देख-रेख में उलझा रहता। यहां तक कि उसने बूढ़े की देखभाल भी करनी छोड़ दी।
माया ही बूढ़े को खाना-पानी देकर आती थी। अब बूढ़ा जादूगर परेशान रहने लगा था। उसकी शक्ति के साथ-साथ उसके मंत्र का प्रभाव भी कम हो रहा था। समय बीतता रहा। बालू अपनी तीनों लड़कियों का विवाह खूब धूमधाम से कर चुका था पर धन का लालच बढ़ता ही जा रहा था।
एक दिन माया ने उससे कहा, 'अब हमारे पास काफी पैसा जमा हो गया है। जादूगर से कहकर बांस व रस्सी हटवा लो। दूसरे गांवों के लोग भी बहुत दुखी और गरीब हैं क्योंकि उनके जालों में मछलियां फंसती ही नहीं।
लेकिन बालू ने पत्नी की बात अनसुनी कर दी। अब उसे दूसरों के दुख की कोई चिंता नहीं थी। उसने बूढ़े से कहा, 'मंत्र का प्रभाव कम हो गया है, इसलिए अब पहले से कम मछलियां आती हैं। नया जादू दिखाओ जिससे मछलियां और कहीं न जाएं।
जादूगर पहले ही दुखी था। उसने कहा, 'अब यह संभव नहीं है।
बालू नाराज होकर बोला, 'तुम इतने दिनों से यहां रहते हो। खाते-पीते हो। क्या इसीलिए?
बूढ़ा बहुत परेशान हुआ। उसने कहा, 'अब यही उपाय है कि मैं पानी में जाकर उसे फिर से बांधने का प्रयास करूं। मैं पानी में जाता हूं। अगर असफल रहा तो तुम्हें समुद्र से सूचना मिल जाएगी। मेरे पानी में डूब जाने के साथ ही तुम्हारी सारी संपत्ति गायब हो जाएगी। मंत्र का प्रभाव भी खत्म हो जाएगा।
बालू ने एक पल सोचा। फिर उसे लगा, बूढ़ा पानी में जाने से बचना चाहता है, इसीलिए बहाने बना रहा है। उसने कहा, 'मुझसे बातें न बनाओ। तुरंत पानी को बांधो।
बूढ़े ने अपना लबादा पहन लिया और ऊंची टोपी लगाकर समुद्र की ओर चल पड़ा। माया समुद्र तट पर बैठकर प्रार्थना करने लगी।
बूढ़ा पानी में उतरने लगा। उसका लबादा पानी पर फैलकर ओझल हो गया। फिर धीरे-धीरे उसकी टोपी का ऊपरी हिस्सा भी डूब गया। कुछ देर बाद एक ऊंची लहर किनारे तक आई। लहर आकाश में उछल गई।
जादूगर गायब हुआ तो गांव वालों की समृद्धि भी छूमंतर हो गई। बालू के जाल में अब एक भी मछली नहीं फंसती थी। वह पहले से भी ज्यादा गरीब हो गया।
ञ्च नरेंद्र देवांगन

Share it
Share it
Share it
Top